अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर अश्विनी वैष्णव बोले — योग भारत की प्राचीन विरासत, विश्व कर रहा अंगीकार
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 21 जून 2025 को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में भाग लेते हुए कहा कि योग भारत की सदियों पुरानी और अमूल्य धरोहर है, जिसे आज समूचा विश्व अपनाने लगा है। उन्होंने राजस्थान के बीकानेर स्थित करणी सिंह स्टेडियम में आयोजित सामूहिक योग सत्र को संबोधित किया।
मुख्य घटनाक्रम
सूचना और प्रसारण मंत्रालय के अनुसार, वैष्णव ने कानून एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के साथ इस सामूहिक योग कार्यक्रम में हिस्सा लिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्कूली विद्यार्थी, युवा, महिलाएँ, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और विभिन्न सरकारी विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
प्रतिभागियों ने प्रशिक्षित प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में विभिन्न योगासन, प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास किया।
वैष्णव का संदेश
उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए वैष्णव ने कहा, 'योग भारत की प्राचीन और अमूल्य विरासत है, जिसे अब पूरी दुनिया अपना रही है। नियमित योग अभ्यास से लोग स्वस्थ, ऊर्जावान और मानसिक रूप से मजबूत बने रहते हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में योग को वैश्विक पहचान मिली है और यह शारीरिक, मानसिक तथा भावनात्मक स्वास्थ्य के लिए एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा है।
वैष्णव ने नागरिकों से आग्रह किया कि वे योग को अपनी दैनिक दिनचर्या का अभिन्न अंग बनाएँ, क्योंकि यह न केवल शारीरिक स्वास्थ्य सुधारता है, बल्कि मानसिक शांति, सकारात्मक सोच और तनावमुक्त जीवनशैली को भी प्रोत्साहित करता है।
मेघवाल का दृष्टिकोण
इस अवसर पर अर्जुन राम मेघवाल ने योग को भारतीय संस्कृति और जीवन-दर्शन का अभिन्न हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि एक सशक्त समाज और विकसित राष्ट्र की नींव स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन पर टिकी होती है। मेघवाल ने यह भी रेखांकित किया कि योग अनुशासन, आत्म-नियंत्रण और जीवन में संतुलन का पाठ पढ़ाता है, इसलिए प्रत्येक नागरिक को इसे अपनी जीवनशैली में शामिल करना चाहिए।
योग की वैश्विक यात्रा
गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र ने 2015 से प्रतिवर्ष 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मान्यता दी है — यह प्रस्ताव भारत की पहल पर पारित हुआ था। तब से यह दिवस विश्व के 190 से अधिक देशों में मनाया जाने लगा है। यह ऐसे समय में आया है जब मानसिक स्वास्थ्य और समग्र कल्याण को लेकर वैश्विक स्तर पर जागरूकता तेज़ी से बढ़ रही है।
आगे की राह
सरकार का ज़ोर योग को जन-जन तक पहुँचाने और इसे स्वास्थ्य नीति के केंद्र में रखने पर है। इस वर्ष के आयोजनों में देशभर में बड़े पैमाने पर सामूहिक योग सत्र आयोजित किए गए, जिनमें विद्यालयों, सरकारी संस्थानों और सामुदायिक केंद्रों की व्यापक भागीदारी देखी गई।