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सीएम योगी का निर्देश: पुलिस आवास निगम की 233 परियोजनाओं में गुणवत्ता और समयसीमा से कोई समझौता नहीं

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सीएम योगी का निर्देश: पुलिस आवास निगम की 233 परियोजनाओं में गुणवत्ता और समयसीमा से कोई समझौता नहीं

सारांश

सीएम योगी ने UP पुलिस आवास निगम की समीक्षा में साफ किया — 75 जनपदों में चल रहीं 233 परियोजनाओं में गुणवत्ता और समयसीमा से कोई समझौता नहीं। 2023 से अब तक ₹1,104 करोड़ की लागत से 1,586 कार्य पूर्ण, और निगम ₹11.14 करोड़ के लाभ में।

मुख्य बातें

सीएम योगी आदित्यनाथ ने 27 मई 2026 को UP पुलिस आवास निगम की समीक्षा बैठक की और गुणवत्ता व समयबद्धता पर सख्त निर्देश दिए।
निगम 75 जनपदों में 233 निर्माण कार्य संचालित कर रहा है, जिनमें से 221 निर्धारित समयसीमा के भीतर हैं।
2023 से 20 मई 2026 तक 1,586 परियोजनाएं पूर्ण, कुल लागत लगभग ₹1,104 करोड़ ।
निगम वर्ष 2025-26 में अब तक ₹11.14 करोड़ के लाभ में है।
गुणवत्ता निगरानी के लिए थर्ड पार्टी ऑडिट , सामग्री परीक्षण और मोबाइल ऐप आधारित रियल टाइम मॉनिटरिंग लागू।
रिक्त पदों को मेरिट के आधार पर भरने के निर्देश।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार, 27 मई 2026 को उत्तर प्रदेश पुलिस आवास निगम की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि पुलिस लाइन, थाना भवन, बैरक, अग्निशमन केंद्र और अन्य निर्माण कार्यों में गुणवत्ता तथा समयबद्धता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों की कार्यक्षमता और मनोबल को बनाए रखने के लिए बेहतर आवासीय एवं कार्य सुविधाएं अनिवार्य हैं।

मुख्य घटनाक्रम

बैठक में अवगत कराया गया कि उत्तर प्रदेश पुलिस आवास निगम वर्तमान में प्रदेश के 75 जनपदों में सक्रिय है और इसकी छह निर्माण इकाइयों के माध्यम से कुल 233 निर्माण कार्य संचालित हैं। इनमें से 221 कार्य निर्धारित समयसीमा के भीतर चल रहे हैं।

यह भी बताया गया कि वर्ष 2023 से 20 मई 2026 के बीच कुल 1,586 निर्माण कार्य पूर्ण किए जा चुके हैं, जिन पर लगभग ₹1,104 करोड़ की लागत आई है। इन परियोजनाओं में बहुमंजिला बैरक, ट्रांजिट हॉस्टल, थाना भवन, अग्निशमन केंद्र, पुलिस चौकी, जीआरपी बैरक, एटीएस फील्ड यूनिट तथा महाकुंभ-2025 से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं।

गुणवत्ता निगरानी की व्यवस्था

मुख्यमंत्री योगी ने निर्देश दिए कि सभी परियोजनाओं का समय-समय पर प्रतिष्ठित संस्थानों से थर्ड पार्टी ऑडिट कराया जाए। बैठक में बताया गया कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए थर्ड पार्टी जांच, सामग्री परीक्षण और मोबाइल ऐप आधारित रियल टाइम मॉनिटरिंग की व्यवस्था पहले से लागू है।

उन्होंने यह भी कहा कि आवश्यकतानुसार तकनीकी विशेषज्ञों की मदद ली जाए और अतिरिक्त मैनपॉवर भी तैनात किया जाए, ताकि कोई भी परियोजना समयसीमा से पीछे न रहे। गौरतलब है कि आधुनिक पुलिसिंग के लिए मजबूत आधारभूत ढांचे की आवश्यकता पर यह राज्य सरकार का लगातार बल रहा है।

निगम की वित्तीय स्थिति

बैठक में यह भी सामने आया कि उत्तर प्रदेश पुलिस आवास निगम लगातार लाभ की स्थिति में है। वर्ष 2025-26 में अब तक ₹11.14 करोड़ का लाभ अर्जित किया जा चुका है। थानों में महिला प्रसाधन जैसी बुनियादी सुविधाओं का विकास भी इन्हीं परियोजनाओं के अंतर्गत किया गया है।

आम पुलिसकर्मियों पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश पुलिस बल की संख्या और कार्यभार दोनों में वृद्धि हो रही है। बेहतर आवास और कार्यस्थल सुविधाएं सीधे तौर पर जमीनी स्तर के पुलिसकर्मियों के दैनिक जीवन और कार्यदक्षता पर असर डालती हैं।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि रिक्त पदों को मेरिट के आधार पर भरा जाए और पुलिस बल की जरूरतों के अनुरूप आधुनिक, सुरक्षित एवं उपयोगी अधोसंरचना विकसित की जाए।

क्या होगा आगे

मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार सभी परियोजनाओं की नियमित समीक्षा जारी रहेगी। तकनीकी मानकों की निगरानी और थर्ड पार्टी ऑडिट की व्यवस्था को और सुदृढ़ किए जाने की उम्मीद है। प्रदेश के 75 जनपदों में चल रहे शेष निर्माण कार्यों को भी निर्धारित समयसीमा में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

104 करोड़ और 1,586 पूर्ण परियोजनाओं के आंकड़े प्रभावशाली लगते हैं, लेकिन असली कसौटी यह है कि इन सुविधाओं से जमीनी पुलिसकर्मियों के जीवन में वास्तविक बदलाव आया या नहीं। थर्ड पार्टी ऑडिट और रियल टाइम मॉनिटरिंग की व्यवस्था सराहनीय है, पर इन ऑडिट रिपोर्टों की सार्वजनिक उपलब्धता पारदर्शिता की असली परीक्षा होगी। यह भी ध्यान देने योग्य है कि 233 में से 12 परियोजनाएं अभी भी समयसीमा से बाहर हैं — मुख्यमंत्री की सख्ती इन्हीं अपवादों को संबोधित करती दिखती है।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

UP पुलिस आवास निगम की समीक्षा बैठक में क्या निर्णय हुए?
27 मई 2026 को हुई समीक्षा बैठक में सीएम योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिए कि सभी निर्माण कार्य गुणवत्ता और समयबद्धता के साथ पूरे किए जाएं। थर्ड पार्टी ऑडिट, तकनीकी विशेषज्ञों की सहायता और रिक्त पदों को मेरिट से भरने के भी निर्देश दिए गए।
UP पुलिस आवास निगम अभी कितने जनपदों में काम कर रहा है?
उत्तर प्रदेश पुलिस आवास निगम वर्तमान में प्रदेश के 75 जनपदों में सक्रिय है। छह निर्माण इकाइयों के माध्यम से कुल 233 निर्माण कार्य संचालित हैं, जिनमें से 221 निर्धारित समयसीमा के भीतर हैं।
2023 से अब तक कितनी पुलिस आवास परियोजनाएं पूरी हुई हैं?
वर्ष 2023 से 20 मई 2026 तक कुल 1,586 निर्माण कार्य पूर्ण किए गए हैं, जिनकी कुल लागत लगभग ₹1,104 करोड़ रही। इनमें बहुमंजिला बैरक, थाना भवन, अग्निशमन केंद्र और महाकुंभ-2025 से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं।
पुलिस आवास परियोजनाओं की गुणवत्ता कैसे सुनिश्चित की जा रही है?
गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए थर्ड पार्टी जांच, सामग्री परीक्षण और मोबाइल ऐप आधारित रियल टाइम मॉनिटरिंग की व्यवस्था लागू है। सीएम योगी ने प्रतिष्ठित संस्थानों से नियमित थर्ड पार्टी ऑडिट कराने के भी निर्देश दिए हैं।
UP पुलिस आवास निगम की वित्तीय स्थिति कैसी है?
निगम लगातार लाभ की स्थिति में है। वर्ष 2025-26 में अब तक ₹11.14 करोड़ का लाभ अर्जित किया जा चुका है, जो निगम की संचालन दक्षता को दर्शाता है।
राष्ट्र प्रेस
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