योगी आदित्यनाथ का PWD को निर्देश: विकास कार्यों में गुणवत्ता और समयबद्धता अनिवार्य, 30,000 से अधिक प्रस्ताव प्राप्त

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योगी आदित्यनाथ का PWD को निर्देश: विकास कार्यों में गुणवत्ता और समयबद्धता अनिवार्य, 30,000 से अधिक प्रस्ताव प्राप्त

सारांश

योगी आदित्यनाथ ने PWD की 2026-27 कार्ययोजना समीक्षा में साफ संदेश दिया — गुणवत्ता और समयसीमा पर कोई ढील नहीं। 30,000 से अधिक प्रस्तावों के बीच नोडल अधिकारी, हेलीपैड नेटवर्क और सीमेंट-आधारित सड़क तकनीक पर जोर — यह महज़ समीक्षा नहीं, जवाबदेही का नया ढाँचा है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 20 मई 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिये PWD की 2026-27 कार्ययोजना की समीक्षा की।
चालू वित्त वर्ष में 17 मदों के अंतर्गत 30,000 से अधिक प्रस्ताव प्राप्त; जून के प्रथम सप्ताह तक स्वीकृति का लक्ष्य।
प्रत्येक परियोजना के लिए नोडल अधिकारी नियुक्ति अनिवार्य; PWD द्वारा स्वतंत्र स्थलीय निरीक्षण का आदेश।
प्रत्येक ब्लॉक, तहसील और जिला मुख्यालय के निकट हेलीपैड निर्माण का निर्देश; रखरखाव PWD की जिम्मेदारी।
बिटुमेन की जगह सीटीएसबी और सीमेंट ट्रीटेड बेस तकनीक अपनाने तथा 2 किमी तक ग्रामीण मार्गों पर सीसी रोड के निर्देश।
विभागीय कमियों या ठेकेदारों की गलतियों का दायित्व जनप्रतिनिधियों पर नहीं — यह स्पष्ट किया गया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 20 मई 2026 को लखनऊ से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिये लोक निर्माण विभाग (PWD) की वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना की व्यापक समीक्षा की और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि विकास कार्यों में मानक, गुणवत्ता एवं समयबद्धता के साथ किसी भी स्तर पर समझौता स्वीकार्य नहीं होगा। इस बैठक में प्रदेश के सभी जिलाधिकारी, संबंधित मंत्री एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

कार्ययोजना और प्रस्तावों की समयसीमा

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि प्रदेश के प्रत्येक जिले से स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप विकास प्रस्ताव तैयार कर एक सप्ताह के भीतर शासन को भेजे जाएँ। उन्होंने कहा कि जून के प्रथम सप्ताह तक कार्ययोजना को शासन की स्वीकृति मिल जाएगी। जिलाधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक कर विकास योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर अंतिम रूप दें।

विभाग की ओर से बताया गया कि चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 17 मदों के अंतर्गत अब तक 30,000 से अधिक प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी प्रस्तावों की प्राथमिकता तय कर योजनाओं को चरणबद्ध एवं समयबद्ध तरीके से धरातल पर उतारा जाए, ताकि विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँच सके।

जवाबदेही और निगरानी तंत्र

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना और निर्धारित समय में कार्य पूर्ण कराना विभागीय अधिकारियों की ज़िम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि विभागीय कमियों अथवा ठेकेदारों की गलतियों का दायित्व जनप्रतिनिधियों पर नहीं डाला जाएगा।

सभी जिलाधिकारियों और मुख्य विकास अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि जनपद में संचालित प्रत्येक परियोजना के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाए, जो नियमित रूप से कार्य की प्रगति की निगरानी करे। इसके अतिरिक्त लोक निर्माण विभाग को निर्देश दिए गए कि प्रत्येक जनपद में अलग से टीम भेजकर कार्यों का स्थलीय निरीक्षण और स्वतंत्र समीक्षा कराई जाए।

कनेक्टिविटी और तकनीकी नवाचार पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि कनेक्टिविटी और मजबूत अवस्थापना किसी भी राज्य की आर्थिक प्रगति की जीवनरेखा होती है। सड़क, पुल और संपर्क मार्ग केवल आवागमन के साधन नहीं, बल्कि व्यापार, रोज़गार और सामाजिक विकास को गति देने का माध्यम भी हैं। उन्होंने अधिकारियों को प्रस्ताव तैयार करते समय 'पिक एंड चूज़' की प्रवृत्ति से बचने और हर क्षेत्र की आवश्यकता को समान महत्व देने का निर्देश दिया।

वैश्विक परिस्थितियों के कारण ईंधन एवं बिटुमेन की उपलब्धता पर पड़ रहे प्रभाव का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने तकनीकी नवाचार अपनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दो किलोमीटर तक के ग्रामीण मार्गों पर गुणवत्तापूर्ण सीसी रोड का निर्माण कराया जाए। बिटुमेन की खपत कम करने के लिए जीएसबी के स्थान पर सीटीएसबी (सीमेंट ट्रीटेड सबबेस) तथा डब्ल्यूएमएम के स्थान पर सीमेंट ट्रीटेड बेस तकनीक को प्राथमिकता से अपनाने के निर्देश दिए गए, ताकि सड़क निर्माण अधिक टिकाऊ और किफायती बन सके।

हेलीपैड निर्माण और आपात तैयारी

मुख्यमंत्री ने आपात परिस्थितियों के दृष्टिगत हेलीपैड निर्माण को आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा, स्वास्थ्य आपातकाल अथवा अन्य संकट की स्थिति में हेलीपैड अत्यंत उपयोगी सिद्ध होते हैं। इसके मद्देनज़र प्रत्येक ब्लॉक, तहसील और जिला मुख्यालय के निकट हेलीपैड बनाए जाने का निर्देश दिया गया। रखरखाव की जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग को सौंपी गई और उनके उपयोग के लिए निर्धारित शुल्क व्यवस्था विकसित करने को भी कहा गया।

सीएम ग्रिड योजना और शहरी कनेक्टिविटी

मुख्यमंत्री ने नगर विकास विभाग की 'सीएम ग्रिड' योजना की सराहना करते हुए कहा कि यह शहरी कनेक्टिविटी को मजबूत करने की महत्वपूर्ण पहल है, लेकिन इसकी गति और तेज़ करने की आवश्यकता है। उन्होंने निर्देश दिया कि नगर विकास विभाग स्थानीय जरूरतों के अनुरूप प्रस्ताव तैयार करे और प्रदेश के प्रत्येक मोहल्ले तथा कॉलोनी तक बेहतर सड़क एवं संपर्क व्यवस्था पहुँचाना सुनिश्चित किया जाए।

बैठक में केंद्रीय पशुपालन और डेयरी राज्य मंत्री एस.पी. सिंह बघेल, उत्तर प्रदेश के वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अरुण कुमार सक्सेना, लोक निर्माण राज्य मंत्री ब्रजेश सिंह तथा विभिन्न विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। आगामी हफ्तों में जिला स्तरीय प्रस्तावों की समीक्षा और जून में अंतिम स्वीकृति के साथ योजनाओं के क्रियान्वयन की दिशा तय होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 से अधिक प्रस्तावों की भीड़ और जून की स्वीकृति की समयसीमा के बीच असली सवाल क्रियान्वयन का है — उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर सरकारी निर्माण कार्यों में गुणवत्ता की शिकायतें नई नहीं हैं। नोडल अधिकारी और स्वतंत्र निरीक्षण टीम की व्यवस्था सही दिशा में कदम है, लेकिन इनकी प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि जवाबदेही तंत्र कागज़ों से ज़मीन तक कितनी तेज़ी से उतरता है। सीमेंट-आधारित सड़क तकनीक को प्राथमिकता देना वैश्विक आपूर्ति दबाव के बीच व्यावहारिक निर्णय है, पर इसके लिए ज़िला स्तर पर तकनीकी क्षमता निर्माण भी उतना ही ज़रूरी है।
RashtraPress
20 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

CM योगी आदित्यनाथ ने PWD की 2026-27 समीक्षा बैठक में क्या मुख्य निर्देश दिए?
मुख्यमंत्री ने विकास कार्यों में गुणवत्ता और समयबद्धता पर कोई समझौता न करने का स्पष्ट निर्देश दिया। उन्होंने प्रत्येक परियोजना के लिए नोडल अधिकारी नियुक्ति, स्वतंत्र स्थलीय निरीक्षण और एक सप्ताह के भीतर जिलों से प्रस्ताव भेजने का आदेश दिया।
उत्तर प्रदेश PWD को 2026-27 के लिए कितने प्रस्ताव मिले हैं?
लोक निर्माण विभाग को चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 17 मदों के अंतर्गत अब तक 30,000 से अधिक प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि इन्हें प्राथमिकता के आधार पर चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाए।
CM योगी ने हेलीपैड निर्माण के बारे में क्या कहा?
मुख्यमंत्री ने आपात स्थितियों के लिए प्रत्येक ब्लॉक, तहसील और जिला मुख्यालय के निकट हेलीपैड बनाने का निर्देश दिया। रखरखाव की जिम्मेदारी PWD को सौंपी गई और उपयोग के लिए निर्धारित शुल्क व्यवस्था विकसित करने को भी कहा गया।
सड़क निर्माण में सीटीएसबी तकनीक क्यों अपनाने का निर्देश दिया गया?
वैश्विक परिस्थितियों के कारण बिटुमेन की उपलब्धता प्रभावित हो रही है, इसलिए मुख्यमंत्री ने जीएसबी के स्थान पर सीटीएसबी और डब्ल्यूएमएम के स्थान पर सीमेंट ट्रीटेड बेस तकनीक अपनाने का निर्देश दिया। इससे सड़क निर्माण अधिक टिकाऊ और किफायती बनेगा।
'सीएम ग्रिड' योजना क्या है और इसे लेकर क्या निर्देश मिले?
'सीएम ग्रिड' नगर विकास विभाग की शहरी कनेक्टिविटी योजना है। मुख्यमंत्री ने इसकी सराहना करते हुए इसकी गति तेज़ करने और प्रदेश के प्रत्येक मोहल्ले व कॉलोनी तक बेहतर सड़क व्यवस्था पहुँचाने के निर्देश दिए।
राष्ट्र प्रेस
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