सीएम योगी का PWD को कड़ा निर्देश: हर सड़क समय पर पूरी हो, देरी पर अधिकारी होंगे जवाबदेह
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 20 मई 2026 को लखनऊ से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए लोक निर्माण विभाग (PWD) की वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना की समीक्षा की और अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि प्रदेश में कोई भी विकास कार्य अधूरा या विलंबित नहीं रहना चाहिए। बैठक में प्रदेश के सभी जिलाधिकारी, मंत्री और जनप्रतिनिधि शामिल रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास कार्यों में गुणवत्ता, मानक और समयबद्धता से किसी भी स्तर पर समझौता स्वीकार्य नहीं होगा।
मुख्य निर्देश और कार्ययोजना
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिया कि प्रदेश के प्रत्येक जिले से स्थानीय ज़रूरतों के अनुसार विकास प्रस्ताव एक सप्ताह के भीतर भेजे जाएँ। उन्होंने कहा कि जून के प्रथम सप्ताह तक कार्ययोजना को शासन से स्वीकृति दिला दी जाएगी। इसके लिए जिलाधिकारियों को जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक कर विकास योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर अंतिम रूप देने के निर्देश दिए गए।
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि विकास कार्यों का भूमि पूजन और शिलान्यास संबंधित जनप्रतिनिधियों के हाथों ही कराया जाए। उन्होंने कहा कि विभागीय कमियों या ठेकेदारों की गलतियों की जिम्मेदारी जनप्रतिनिधियों की नहीं, बल्कि विभागीय अधिकारियों की है।
कनेक्टिविटी और अवस्थापना पर ज़ोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि मज़बूत कनेक्टिविटी और अवस्थापना किसी भी राज्य की आर्थिक प्रगति की जीवनरेखा होती है। सड़क, पुल और संपर्क मार्ग केवल आवागमन के साधन नहीं, बल्कि व्यापार, रोज़गार और सामाजिक विकास को गति देने का माध्यम भी हैं। उन्होंने अधिकारियों को चेताया कि प्रस्ताव तैयार करते समय 'पिक एंड चूज़' की प्रवृत्ति से बचें और हर क्षेत्र की ज़रूरत को समान महत्व दें।
प्रत्येक जनपद में संचालित हर परियोजना के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने का भी निर्देश दिया गया, जो नियमित रूप से कार्य की प्रगति की निगरानी करे और गुणवत्ता सुनिश्चित करे। पिछले वर्ष स्वीकृत परियोजनाओं की प्रगति रिपोर्ट समय पर शासन को भेजने के साथ-साथ PWD को प्रत्येक जनपद में अलग टीम भेजकर स्थलीय निरीक्षण कराने के निर्देश भी दिए गए।
हेलीपैड निर्माण और तकनीकी नवाचार
बैठक में मुख्यमंत्री ने आपात परिस्थितियों को देखते हुए हेलीपैड निर्माण को अनिवार्य बताया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा, स्वास्थ्य आपातकाल या अन्य संकट के समय हेलीपैड अत्यंत उपयोगी होते हैं, इसलिए प्रत्येक ब्लॉक, तहसील और जिला मुख्यालय के निकट हेलीपैड बनाए जाएँ। इनके रखरखाव की जिम्मेदारी PWD की होगी और उपयोग के लिए निर्धारित शुल्क व्यवस्था भी विकसित की जाए।
वैश्विक परिस्थितियों के कारण ईंधन और बिटुमेन की उपलब्धता पर पड़ रहे प्रभाव का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने PWD को तकनीकी नवाचार अपनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि GSB के स्थान पर CTSB (सीमेंट ट्रीटेड सबबेस) और WMM के स्थान पर सीमेंट ट्रीटेड बेस तकनीक को प्राथमिकता दी जाए, ताकि सड़क निर्माण अधिक टिकाऊ और किफायती हो। 2 किलोमीटर तक के ग्रामीण मार्गों पर आवश्यकतानुसार गुणवत्तापूर्ण सीसी रोड के निर्माण का भी निर्देश दिया गया।
सीएम ग्रिड योजना और शहरी कनेक्टिविटी
मुख्यमंत्री ने नगर विकास विभाग की 'सीएम ग्रिड' योजना की सराहना करते हुए कहा कि यह शहरी कनेक्टिविटी को मज़बूत करने की महत्वपूर्ण पहल है, लेकिन इसकी गति और तेज़ करने की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि नगर विकास विभाग स्थानीय ज़रूरतों के अनुसार प्रस्ताव तैयार करे और प्रदेश के हर मोहल्ले व कॉलोनी तक बेहतर सड़क और संपर्क व्यवस्था पहुँचाना सुनिश्चित किया जाए।
30,000 से अधिक प्रस्ताव और आगे की राह
बैठक में अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि PWD के 17 मदों के अंतर्गत चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अब तक 30,000 से अधिक प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी प्रस्तावों की प्राथमिकता तय कर योजनाओं को चरणबद्ध और समयबद्ध तरीके से धरातल पर उतारा जाए, ताकि विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँच सके। यह समीक्षा बैठक उत्तर प्रदेश में बुनियादी ढाँचे के विकास को नई गति देने की दिशा में एक निर्णायक कदम मानी जा रही है।