13 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

बकरीद पर पुंछ में मौलाना की अपील: नशामुक्त समाज के लिए सरकारी अभियान को दें समर्थन

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
बकरीद पर पुंछ में मौलाना की अपील: नशामुक्त समाज के लिए सरकारी अभियान को दें समर्थन

सारांश

जम्मू-कश्मीर में बकरीद शांतिपूर्वक मनाई गई — हजरतबल में 60 हजार से अधिक श्रद्धालु जुटे। पुंछ के मेंढर में मौलाना ने नशामुक्ति अभियान को धार्मिक मंच से समर्थन दिया। वहीं, श्रीनगर की जामा मस्जिद में नमाज की अनुमति न मिलने और मीरवाइज की नजरबंदी पर स्थानीय नाराजगी भी सामने आई।

मुख्य बातें

27 मई को जम्मू-कश्मीर में ईद-उल-अजहा (बकरीद) शांतिपूर्ण माहौल में मनाई गई।
हजरतबल दरगाह, श्रीनगर में 60 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने नमाज अदा की।
पुंछ जिले के मेंढर में मौलाना ने सरकार के नशा विरोधी अभियान का समर्थन कर समाज को एकजुट होने की अपील की।
श्रीनगर की जामा मस्जिद और ईदगाह में इस बार भी नमाज की अनुमति नहीं दी गई।
मीरवाइज उमर फारूक को रिपोर्टों के अनुसार एहतियातन नजरबंद रखा गया।

जम्मू-कश्मीर में 27 मई को ईद-उल-अजहा (बकरीद) का पर्व श्रद्धा, उल्लास और शांतिपूर्ण माहौल में मनाया गया। कश्मीर घाटी से लेकर जम्मू क्षेत्र तक मस्जिदों, ईदगाहों और दरगाहों में हजारों श्रद्धालु एकत्र हुए और देश में अमन, भाईचारे तथा खुशहाली की दुआ माँगी। पुंछ जिले के मेंढर सब-डिवीजन में आयोजित विशेष नमाज के दौरान मौलाना ने सरकार के नशा विरोधी अभियान को समर्थन देने की अपील की।

मुख्य घटनाक्रम

श्रीनगर स्थित हजरतबल दरगाह में इस बार सबसे अधिक भीड़ उमड़ी, जहाँ 60 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने बकरीद की नमाज अदा की। नमाज के बाद लोगों ने परस्पर गले मिलकर मुबारकबाद दी और समाज में शांति व सौहार्द बनाए रखने का संदेश साझा किया।

जम्मू शहर में भी पर्व शांतिपूर्ण रहा। रेजिडेंसी रोड स्थित ईदगाह, मीका मस्जिद बठिंडी और जामिया मस्जिद तालाब खटीकन में बड़ी संख्या में नमाजियों ने इबादत की। नमाज के बाद पारंपरिक रूप से मवेशियों की कुर्बानी दी गई।

मौलाना का संबोधन: नशामुक्ति की अपील

पुंछ जिले के मेंढर सब-डिवीजन में आयोजित नमाज के अवसर पर मौलाना ने कहा कि बकरीद केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि यह त्याग, भाईचारे और इंसानियत का संदेश भी देती है।

उन्होंने सरकार के नशा विरोधी अभियान का समर्थन करते हुए लोगों से अपील की कि समाज को नशे जैसी बुराई से मुक्त करने के लिए हर वर्ग को एकजुट होकर काम करना होगा। मौलाना ने विशेष रूप से युवाओं और बच्चों को नशे की गिरफ्त से बचाने पर जोर दिया।

जामा मस्जिद में नमाज पर रोक, मीरवाइज नजरबंद

इस बार भी श्रीनगर की ऐतिहासिक जामा मस्जिद और ईदगाह में ईद की नमाज की अनुमति नहीं दी गई। इसे लेकर स्थानीय लोगों और मीरवाइज उमर फारूक ने नाराजगी जताई। रिपोर्टों के अनुसार, मीरवाइज उमर फारूक को एहतियातन उनके घर में नजरबंद रखा गया।

गौरतलब है कि जामा मस्जिद में नमाज पर यह प्रतिबंध लगातार कई वर्षों से जारी है और यह मुद्दा स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना रहता है।

आम जनता पर असर और सामाजिक संदेश

इस वर्ष बकरीद का पर्व ऐसे समय में मनाया गया जब जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा स्थिति को लेकर प्रशासन सतर्क है। बावजूद इसके, घाटी और जम्मू दोनों क्षेत्रों में त्योहार का माहौल शांतिपूर्ण रहा। धार्मिक नेताओं की नशामुक्ति जैसे सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय भागीदारी को सामुदायिक जागरूकता का सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह सामुदायिक आह्वान ज़मीनी बदलाव में तब्दील होगा। दूसरी ओर, श्रीनगर की ऐतिहासिक जामा मस्जिद में लगातार कई वर्षों से नमाज पर प्रतिबंध और मीरवाइज की नजरबंदी जैसे मुद्दे सामान्य त्योहारी कवरेज में दब जाते हैं, जबकि ये घाटी में नागरिक स्वतंत्रता की बड़ी बहस का हिस्सा हैं। त्योहार का शांतिपूर्ण माहौल प्रशासन की सतर्कता का परिणाम हो सकता है, पर दीर्घकालिक सौहार्द के लिए प्रतिबंधों की समीक्षा भी उतनी ही ज़रूरी है।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जम्मू-कश्मीर में इस बार बकरीद कैसे मनाई गई?
जम्मू-कश्मीर में 27 मई को ईद-उल-अजहा शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण माहौल में मनाई गई। कश्मीर घाटी और जम्मू दोनों क्षेत्रों में मस्जिदों, ईदगाहों और दरगाहों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्र हुए।
हजरतबल दरगाह में इस बार कितने लोगों ने नमाज पढ़ी?
श्रीनगर स्थित हजरतबल दरगाह में 60 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने बकरीद की नमाज अदा की, जो इस बार सबसे अधिक भीड़ वाला स्थल रहा।
पुंछ में मौलाना ने क्या अपील की?
पुंछ जिले के मेंढर सब-डिवीजन में नमाज के दौरान मौलाना ने सरकार के नशा विरोधी अभियान का समर्थन करते हुए लोगों से समाज को नशे की बुराई से मुक्त करने की अपील की। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं और बच्चों को नशे से बचाने के लिए समाज के हर वर्ग को एकजुट होने का आह्वान किया।
श्रीनगर की जामा मस्जिद में नमाज की अनुमति क्यों नहीं मिली?
इस बार भी श्रीनगर की ऐतिहासिक जामा मस्जिद और ईदगाह में ईद की नमाज की अनुमति नहीं दी गई। इसके कारणों का आधिकारिक विवरण सामने नहीं आया, लेकिन स्थानीय लोगों और मीरवाइज उमर फारूक ने इस पर नाराजगी जताई।
मीरवाइज उमर फारूक को नजरबंद क्यों किया गया?
रिपोर्टों के अनुसार, मीरवाइज उमर फारूक को बकरीद के मौके पर एहतियातन उनके घर में नजरबंद रखा गया। इसे लेकर स्थानीय स्तर पर नाराजगी देखी गई, हालाँकि प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 3 महीने पहले