पुंछ सड़क हादसा: सुरनकोट में 6 की मौत की आशंका, 5 घायल; LG सिन्हा ने जताया दुख
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले के सुरनकोट क्षेत्र में बुधवार, 26 अगस्त को हुए एक भीषण सड़क हादसे में छह लोगों की मौत की आशंका जताई जा रही है, जबकि पाँच अन्य घायल हो गए हैं। अधिकारियों के अनुसार हादसा शिएंद्रा इलाके के पास हुआ और राहत-बचाव कार्य तत्काल शुरू कर दिया गया।
हादसे का घटनाक्रम
अधिकारियों के अनुसार दुर्घटना सुरनकोट के शिएंद्रा क्षेत्र के निकट हुई। घटना की सूचना मिलते ही वरिष्ठ सिविल और पुलिस अधिकारी मौके पर पहुँच गए और स्थानीय लोगों के सहयोग से राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। घायलों को तत्काल नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुँचाया गया, जहाँ उनका उपचार जारी है।
LG सिन्हा की प्रतिक्रिया
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शोक व्यक्त करते हुए कहा, 'पुंछ में एक दुखद सड़क हादसे में लोगों की जान जाने से बहुत दुख हुआ है। मेरी संवेदनाएँ पीड़ित परिवारों के साथ हैं। घायलों के जल्द ठीक होने की प्रार्थना करता हूँ।' उन्होंने जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि प्रभावित लोगों को तुरंत हर संभव सहायता प्रदान की जाए।
पहाड़ी जिलों में सड़क हादसों का संकट
यह हादसा ऐसे समय में आया है जब पुंछ, राजौरी, डोडा, किश्तवाड़, रामबन, रियासी और उधमपुर जैसे पहाड़ी जिले पहले से ही जानलेवा सड़क दुर्घटनाओं के लिए चिंताजनक रूप से जाने जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इन हादसों के पीछे खराब सड़कें, तेज़ रफ़्तार, लापरवाही, ओवर-लोडिंग और रोड रेज प्रमुख कारण हैं।
प्रशासन के सुरक्षा उपाय
ट्रैफिक अधिकारियों ने अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए इन जिलों में विशेष चेकिंग स्क्वाड तैनात किए हैं। क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (RTO) ट्रैफिक उल्लंघन पर रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट और ड्राइविंग लाइसेंस रद्द करने तक की कार्रवाई की चेतावनी दे रहे हैं। नाबालिगों के वाहन चलाते पाए जाने पर माता-पिता पर जुर्माना लगाने का प्रावधान भी लागू किया जा रहा है। पेट्रोल स्टेशनों को निर्देश दिया गया है कि बिना हेलमेट वाले दोपहिया चालकों को ईंधन न दिया जाए।
आगे क्या
हादसे की सटीक वजह और उसमें शामिल लोगों की पहचान की पुष्टि अभी बाकी है। जाँच जारी है और प्रशासन की ओर से जल्द विस्तृत जानकारी सामने आने की उम्मीद है। गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी इलाकों में सड़क सुरक्षा को लेकर दीर्घकालिक नीतिगत उपायों की माँग लंबे समय से उठती रही है।