30 सितंबर 2026
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प्रत्युषा बनर्जी सुसाइड केस: बॉम्बे हाई कोर्ट ने 10 साल बाद राहुल राज सिंह को आरोपमुक्त किया

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प्रत्युषा बनर्जी सुसाइड केस: बॉम्बे हाई कोर्ट ने 10 साल बाद राहुल राज सिंह को आरोपमुक्त किया

सारांश

'बालिका वधू' की अभिनेत्री प्रत्युषा बनर्जी की मौत का मामला 10 साल बाद बॉम्बे हाई कोर्ट में बंद हो गया — राहुल राज सिंह आरोपमुक्त। कोर्ट ने कहा, ट्रायल के लिए सबूत नाकाफी। परिवार के पास सुप्रीम कोर्ट का रास्ता अभी खुला है।

मुख्य बातें

बॉम्बे हाई कोर्ट ने 30 सितंबर 2026 को राहुल राज सिंह को प्रत्युषा बनर्जी सुसाइड केस में आरोपमुक्त किया।
डिगे की एकल पीठ ने कहा — अभियोजन के पास ट्रायल के लिए पर्याप्त सबूत नहीं।
प्रत्युषा बनर्जी 1 अप्रैल 2016 को गोरेगांव वेस्ट, मुंबई में 24 वर्ष की आयु में फांसी पर लटकी मिली थीं।
राहुल पर IPC धारा 306, 323, 504 और 506 के तहत मामला दर्ज था; 2018 में चार्जशीट दाखिल हुई थी।
डिंडोशी सेशन कोर्ट ने अगस्त 2023 में डिस्चार्ज याचिका खारिज की थी; हाई कोर्ट ने पलटा।
प्रत्युषा का परिवार चाहे तो सर्वोच्च न्यायालय में अपील कर सकता है।

बॉम्बे हाई कोर्ट ने 30 सितंबर 2026 को 'बालिका वधू' की अभिनेत्री प्रत्युषा बनर्जी की आत्महत्या मामले में उनके पूर्व पार्टनर राहुल राज सिंह को आरोपमुक्त कर दिया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष के पास इस मामले को ट्रायल तक ले जाने के लिए पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। इस फैसले के साथ करीब 10 वर्षों से चली आ रही यह कानूनी लड़ाई एक निर्णायक मोड़ पर पहुँच गई है।

मामले की पृष्ठभूमि

टेलीविज़न जगत की जानी-मानी अभिनेत्री प्रत्युषा बनर्जी, जिन्होंने 'बालिका वधू' में 'आनंदी' की भूमिका से घर-घर में पहचान बनाई थी, 1 अप्रैल 2016 को गोरेगांव वेस्ट, मुंबई स्थित अपने किराए के फ्लैट में फांसी पर लटकी पाई गई थीं। उस समय वे मात्र 24 वर्ष की थीं।

उनकी माँ सोमा बनर्जी की शिकायत के आधार पर बांगुर नगर पुलिस ने राहुल राज सिंह के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना), 323, 504 और 506 के तहत प्रकरण दर्ज किया था। परिवार का आरोप था कि राहुल ने प्रत्युषा को शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित किया।

मुख्य घटनाक्रम

राहुल को जुलाई 2016 में बॉम्बे हाई कोर्ट से ही अग्रिम जमानत मिल गई थी। 2018 में पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की। इसके बाद राहुल ने डिस्चार्ज याचिका दायर की, जिसे डिंडोशी सेशन कोर्ट ने अगस्त 2023 में यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि गवाहों के बयानों से प्रतीत होता है कि आरोपी ने मृतका का जीवन दुरूह बना दिया था।

इसके बाद राहुल ने बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया, जहाँ न्यायमूर्ति एस.जी. डिगे की एकल पीठ ने 30 सितंबर 2026 को उन्हें आरोपमुक्त करने का आदेश दिया।

बचाव पक्ष की दलीलें

राहुल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आबाद पोंडा और श्रेयांश मिठारे ने तर्क दिया कि एफआईआर जल्दबाजी में दर्ज की गई और घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ। बचाव पक्ष ने यह भी बताया कि आत्महत्या से करीब एक घंटे पहले की अंतिम फोन रिकॉर्डिंग में राहुल प्रत्युषा को कोई भी कदम न उठाने के लिए समझा रहे थे और अपना प्यार जता रहे थे। इसके अतिरिक्त, राहुल ही वह व्यक्ति था जिसने फ्लैट का दरवाज़ा खुलवाया और उन्हें अस्पताल पहुँचाने का प्रयास किया।

कोर्ट का निष्कर्ष

न्यायालय ने बचाव पक्ष की इन दलीलों को स्वीकार करते हुए कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला नहीं बनता। कोर्ट के अनुसार, ऐसी परिस्थितियों में ट्रायल जारी रखना कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। गौरतलब है कि राहुल का शुरू से यह दावा रहा है कि दोनों दिसंबर 2016 में विवाह करने वाले थे।

आगे क्या

बॉम्बे हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद अब प्रत्युषा बनर्जी का परिवार चाहे तो सर्वोच्च न्यायालय में अपील कर सकता है। यह मामला न केवल न्यायिक प्रक्रिया की जटिलताओं को उजागर करता है, बल्कि यह भी रेखांकित करता है कि उकसाने के आरोपों को साबित करने के लिए ठोस और सत्यापन-योग्य साक्ष्य कितने आवश्यक हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन दस साल की थकान और साक्ष्यों की सीमाएँ उस राह को आसान नहीं बनातीं।
RashtraPress
30 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रत्युषा बनर्जी सुसाइड केस में बॉम्बे हाई कोर्ट का फैसला क्या है?
बॉम्बे हाई कोर्ट ने 30 सितंबर 2026 को राहुल राज सिंह को इस मामले में आरोपमुक्त कर दिया है। न्यायमूर्ति एस.जी. डिगे की एकल पीठ ने कहा कि अभियोजन पक्ष के पास ट्रायल चलाने लायक पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं।
प्रत्युषा बनर्जी का निधन कब और कैसे हुआ था?
प्रत्युषा बनर्जी 1 अप्रैल 2016 को मुंबई के गोरेगांव वेस्ट स्थित अपने किराए के फ्लैट में फांसी पर लटकी मिली थीं। उस समय वे 24 वर्ष की थीं और 'बालिका वधू' में 'आनंदी' की भूमिका से प्रसिद्ध थीं।
राहुल राज सिंह पर क्या आरोप लगाए गए थे?
प्रत्युषा की माँ सोमा बनर्जी की शिकायत पर राहुल के विरुद्ध IPC की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना), 323, 504 और 506 के तहत मामला दर्ज किया गया था। आरोप था कि उन्होंने प्रत्युषा को शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित किया।
डिंडोशी सेशन कोर्ट और बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले में क्या अंतर है?
डिंडोशी सेशन कोर्ट ने अगस्त 2023 में राहुल की डिस्चार्ज याचिका खारिज करते हुए कहा था कि गवाहों के बयानों से लगता है आरोपी ने मृतका की जिंदगी दुरूह बना दी थी। बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस निष्कर्ष को पलटते हुए कहा कि उकसाने का मामला नहीं बनता और ट्रायल जारी रखना कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।
क्या प्रत्युषा का परिवार इस फैसले को चुनौती दे सकता है?
हाँ, बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ प्रत्युषा का परिवार सर्वोच्च न्यायालय में अपील कर सकता है। अभी तक परिवार की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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