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प्रयागराज: खुसरो बाग में 'पहली आजादी महोत्सव', 1857 की 10 दिनों की स्वतंत्रता को किया याद

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प्रयागराज: खुसरो बाग में 'पहली आजादी महोत्सव', 1857 की 10 दिनों की स्वतंत्रता को किया याद

सारांश

7 जून 1857 को इलाहाबाद (अब प्रयागराज) के क्रांतिकारियों ने खुसरो बाग से 10 दिनों तक स्वतंत्र सरकार चलाई थी — इसी ऐतिहासिक पल को जीवित रखने के लिए हर साल यह महोत्सव मनाया जाता है। इस बार डीएम मनीष वर्मा की उपस्थिति ने इसे प्रशासनिक मान्यता दी।

मुख्य बातें

7 जून 2026 को प्रयागराज के खुसरो बाग में 'पहली आजादी महोत्सव' का आयोजन किया गया।
7 जून 1857 को क्रांतिकारियों ने तत्कालीन इलाहाबाद को ब्रिटिश शासन से मुक्त कर 10 दिनों तक स्वतंत्र प्रशासन चलाया था।
जिलाधिकारी मनीष वर्मा ने कार्यक्रम में भाग लिया और क्रांतिकारियों के बलिदान को याद करने की शपथ दिलाई।
कार्यकर्ता आशुतोष के अनुसार, क्रांतिकारियों ने कथित तौर पर अंग्रेजों से ₹30 लाख लूटकर स्वाधीनता आंदोलन को समर्पित किया था।
'भारत भाग्य विधाता' संगठन यह वार्षिक आयोजन आगामी पीढ़ियों में इतिहास-चेतना जगाने के लिए करता है।

प्रयागराज के ऐतिहासिक खुसरो बाग में 7 जून 2026 को 'प्रयागराज की पहली आजादी महोत्सव' का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम 7 जून 1857 की उस ऐतिहासिक घटना की स्मृति में मनाया गया, जब स्थानीय क्रांतिकारियों ने तत्कालीन इलाहाबाद को ब्रिटिश शासन से मुक्त कराकर 10 दिनों तक स्वतंत्र प्रशासन चलाया था। जिलाधिकारी मनीष वर्मा सहित प्रबुद्ध नागरिक और 'भारत भाग्य विधाता' संगठन के कार्यकर्ता इस अवसर पर एकत्रित हुए।

मुख्य घटनाक्रम

जिलाधिकारी मनीष वर्मा ने कार्यक्रम में पत्रकारों से बातचीत करते हुए बताया कि 7 जून 1857 को जब यह शहर इलाहाबाद के नाम से जाना जाता था, तब यहाँ के क्रांतिकारियों ने ब्रिटिश सत्ता को चुनौती देते हुए शहर को आजाद करा लिया था। उन्होंने खुसरो बाग से 10 दिनों तक अपनी स्वतंत्र सरकार चलाई — यह भारत के स्वाधीनता संग्राम का एक अल्पचर्चित लेकिन महत्त्वपूर्ण अध्याय है।

क्रांतिकारियों का बलिदान और संकल्प

वर्मा ने कहा, 'हर वर्ष 7 जून को यहाँ बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा होते हैं और उन क्रांतिकारियों के बलिदान को नमन करते हैं। हम सभी ने शपथ ली कि एक नागरिक के रूप में उनके बलिदान को आगे बढ़ाएंगे।' 'भारत भाग्य विधाता' के कार्यकर्ता आशुतोष ने बताया कि क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी सेना को किले के भीतर ही घेरे रखा और खुसरो बाग से स्वतंत्र प्रशासन संचालित किया।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

आशुतोष के अनुसार, उस समय क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों से कथित तौर पर करीब ₹30 लाख की राशि लूटकर स्वाधीनता आंदोलन के लिए उपयोग की थी। गौरतलब है कि 1857 की क्रांति को भारत का पहला स्वतंत्रता संग्राम माना जाता है, और प्रयागराज (तत्कालीन इलाहाबाद) उसका एक सक्रिय केंद्र था। यह ऐसे समय में महत्त्वपूर्ण है जब स्थानीय इतिहास को राष्ट्रीय स्मृति में पुनर्स्थापित करने के प्रयास बढ़ रहे हैं।

आम जनता पर असर

आशुतोष ने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य आने वाली पीढ़ी को यह बताना है कि यदि इन पूर्वजों ने आजादी की ज्वाला प्रज्वलित न की होती, तो देश पर ब्रिटिश दासता और लंबी चलती। 'भारत भाग्य विधाता' की पूरी टीम और प्रबुद्ध नागरिकों द्वारा शुरू किया गया यह वार्षिक अभियान स्थानीय इतिहास-चेतना को जीवित रखने का प्रयास है।

क्या होगा आगे

आयोजकों के अनुसार यह कार्यक्रम प्रतिवर्ष 7 जून को खुसरो बाग में आयोजित किया जाएगा, ताकि 1857 के उन गुमनाम नायकों की स्मृति को जीवंत रखा जा सके। जिलाधिकारी की सहभागिता इस आयोजन को प्रशासनिक स्वीकृति और व्यापक सामाजिक पहचान दिलाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इतिहास की इन घटनाओं को केवल उत्सव तक सीमित रखना पर्याप्त नहीं। खुसरो बाग की 10 दिनों की स्वतंत्र सरकार का विधिवत दस्तावेज़ीकरण और पाठ्यक्रम में समावेश अभी भी अधूरा है। जिलाधिकारी की उपस्थिति प्रशासनिक समर्थन का संकेत देती है, पर यह देखना होगा कि यह जागरूकता अभियान नीतिगत पहल में बदलती है या केवल वार्षिक रस्म बनकर रह जाती है।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'प्रयागराज की पहली आजादी महोत्सव' क्या है?
यह एक वार्षिक स्मृति कार्यक्रम है जो 7 जून 1857 की उस ऐतिहासिक घटना को याद करने के लिए खुसरो बाग, प्रयागराज में आयोजित होता है, जब स्थानीय क्रांतिकारियों ने तत्कालीन इलाहाबाद को 10 दिनों के लिए ब्रिटिश शासन से मुक्त कराया था। 'भारत भाग्य विधाता' संगठन इसका आयोजन करता है।
1857 में प्रयागराज (इलाहाबाद) में क्या हुआ था?
7 जून 1857 को स्थानीय क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी सेना को किले के भीतर घेरकर शहर पर नियंत्रण कर लिया और खुसरो बाग से 10 दिनों तक स्वतंत्र प्रशासन चलाया। कार्यकर्ता आशुतोष के अनुसार, क्रांतिकारियों ने कथित तौर पर अंग्रेजों से ₹30 लाख की राशि लूटकर आंदोलन के लिए उपयोग की।
इस कार्यक्रम में कौन शामिल हुए?
जिलाधिकारी मनीष वर्मा, 'भारत भाग्य विधाता' के कार्यकर्ता और प्रबुद्ध नागरिक इस कार्यक्रम में शामिल हुए। डीएम वर्मा ने उपस्थित लोगों को क्रांतिकारियों के बलिदान को आगे बढ़ाने की शपथ दिलाई।
यह आयोजन क्यों महत्त्वपूर्ण है?
यह आयोजन 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के उन स्थानीय नायकों को याद करता है जिन्हें राष्ट्रीय इतिहास में पर्याप्त स्थान नहीं मिला। आयोजकों का उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों में इतिहास-चेतना जगाना और इन क्रांतिकारियों की विरासत को जीवित रखना है।
यह कार्यक्रम हर साल कब और कहाँ होता है?
यह कार्यक्रम प्रतिवर्ष 7 जून को प्रयागराज के खुसरो बाग में आयोजित किया जाता है। यही वह स्थान है जहाँ से 1857 में क्रांतिकारियों ने 10 दिनों तक स्वतंत्र प्रशासन संचालित किया था।
राष्ट्र प्रेस
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