शहीद दिवस: तीन महान क्रांतिकारियों की शहादत जिसने ब्रिटिश साम्राज्य को हिला दिया

Click to start listening
शहीद दिवस: तीन महान क्रांतिकारियों की शहादत जिसने ब्रिटिश साम्राज्य को हिला दिया

सारांश

हर साल 23 मार्च को 'शहीद दिवस' मनाया जाता है, जो शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के बलिदान को याद करता है। इन क्रांतिकारियों ने देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। जानें, कैसे उनकी वीरता ने ब्रिटिश हुकूमत को हिला दिया।

Key Takeaways

  • शहीद दिवस हर साल 23 मार्च को मनाया जाता है।
  • भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव ने स्वतंत्रता के लिए बलिदान दिया।
  • इन क्रांतिकारियों की शहादत ने ब्रिटिश साम्राज्य को हिला दिया।
  • भगत सिंह ने युवाओं में जोश भरा और क्रांति का संदेश फैलाया।
  • इनकी मित्रता विचारधारा की एकता से बनी थी।

नई दिल्ली, 22 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। हर वर्ष 'शहीद दिवस' हमें यह याद दिलाता है कि भारत की स्वतंत्रता बलिदान और साहस के माध्यम से हासिल की गई थी। स्वतंत्रता संग्राम में अनेक युवा थे जिन्होंने अपनी शक्ति के माध्यम से आजादी की दिशा में कदम बढ़ाया और क्रांतिकारी कहलाए। जब भी क्रांतिकारियों का जिक्र होता है, सबसे पहले शहीद भगत सिंह, उनके साथी राजगुरु और सुखदेव का नाम लिया जाता है।

हर साल 23 मार्च को, देश के इन तीन महान क्रांतिकारियों के बलिदान को याद करने के लिए 'शहीद दिवस' मनाया जाता है। 23 मार्च को, इन नायकों को अंग्रेजों द्वारा फांसी दी गई थी। इन क्रांतिकारियों ने महात्मा गांधी के मार्ग से अलग रास्ता चुना, लेकिन यह सब अपने देश के कल्याण के लिए था, जिसे वे अत्यधिक प्रेम करते थे।

"दिल से निकलेगी न मरकर भी वतन की उल्फत, मेरी मिट्टी से भी खुशबू ए वतन आएगी।"

यह पंक्ति भगत सिंह की है, जिन्होंने युवाओं में ऊर्जा का संचार किया था कि विदेशी हुकूमत उनसे डरने लगी थी। हाथ जोड़कर निवेदन करने के बजाय बगावत की आग में कूदने वाले भगत सिंह की वीरता की कहानियाँ आज भी हमारे अंदर देशभक्ति की ज्वाला जलाती हैं।

सच्चे क्रांतिकारी और 'इंकलाब जिंदाबाद' का नारा देने वाले शहीद भगत सिंह ने क्रांति की वेदी पर अपनी जवानी का बलिदान किया। 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर में जलियावाला बाग हत्याकांड ने भगत सिंह की सोच पर गहरा प्रभाव डाला।

यह वही काला दिन था, जब इस हत्याकांड ने पूरे देश के साथ-साथ 12 वर्षीय भगत सिंह के दिल में अंग्रेजों के लिए नफरत पैदा कर दी थी। साइमन कमीशन के विरोध में लाला लाजपत राय की हत्या का बदला लेने के लिए भगत सिंह और उनके साथियों ने अंग्रेज अधिकारी सांडर्स की हत्या की। अंग्रेजों की बहरी सरकार को जगाने के लिए भगत सिंह ने अपने सहयोगी बटकेश्वर दत्त के साथ दिल्ली विधानसभा में 8 अप्रैल 1929 को बम फेंका। धमाके के बाद वे भागे नहीं, बल्कि खुद को गिरफ्तार करवा लिया।

भगत सिंह लगभग दो साल जेल में रहे। इस दौरान उन्होंने कई लेख लिखे और अपने क्रांतिकारी विचारों को जिंदा रखा। राजगुरु और सुखदेव, जो आजादी की लड़ाई में उनके साथ थे, भी इसी रास्ते पर चलने वाले सच्चे साथी थे।

तीनों युवा देशभक्त 'भारत सभा' और 'हिंदुस्तान समाजवादी रिपब्लिकन आर्मी' के अद्वितीय वीर थे। इनकी मित्रता की मजबूती का कारण था कि उनकी विचारधारा एक ही थी, और वह थी देश की आजादी। इन आज़ादी के दीवानों ने अपनी अंतिम सांस तक अंग्रेजों का डटकर सामना किया और हंसते-हंसते फांसी पर चढ़ गए।

इन तीनों वीरों को 23 मार्च 1931 को लाहौर जेल में फांसी पर लटकाया गया। इन महापुरुषों ने बलिदान दिया, क्योंकि वे मानते थे कि यह ऐसा समय है जब बलिदान की आवश्यकता है। जब भी भारत अपने आजाद होने पर गर्व महसूस करता है, तो वह इन महापुरुषों के प्रति हमेशा झुकता है।

Point of View

हमें उन महान क्रांतिकारियों की शहादत को याद करना चाहिए, जिन्होंने स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की बलि दी। यह दिन हमें यह सिखाता है कि देश की आजादी के लिए बलिदान कितनी महत्वपूर्ण है।
NationPress
23/03/2026

Frequently Asked Questions

शहीद दिवस कब मनाया जाता है?
शहीद दिवस हर साल 23 मार्च को मनाया जाता है।
कौन से क्रांतिकारी शहीद हुए थे?
भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव ये तीन प्रमुख क्रांतिकारी थे।
इन क्रांतिकारियों को किस दिन फांसी दी गई थी?
इन तीनों को 23 मार्च 1931 को फांसी दी गई थी।
भगत सिंह का क्या योगदान था?
भगत सिंह ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और युवाओं में जोश भरा।
राजगुरु और सुखदेव का योगदान क्या था?
राजगुरु और सुखदेव ने भगत सिंह के साथ मिलकर अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया।
Nation Press