21 अक्टूबर 2026
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ललित कला अकादमी पुरस्कार 2026: राष्ट्रपति मुर्मु ने 65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी के विजेताओं को सम्मानित किया

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ललित कला अकादमी पुरस्कार 2026: राष्ट्रपति मुर्मु ने 65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी के विजेताओं को सम्मानित किया

सारांश

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने नई दिल्ली में 65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी के विजेताओं को ललित कला अकादमी पुरस्कार प्रदान किए और नवोदित कलाकारों को वित्तीय सहायता, बाज़ार पहुँच और प्रशिक्षण देने का आह्वान किया — कला को गैलरी से निकाल समाज तक पहुँचाने पर बल दिया।

मुख्य बातें

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 21 अक्टूबर 2026 को 65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी के चयनित कलाकारों को ललित कला अकादमी पुरस्कार प्रदान किए।
'तीसरे प्रिंट बिएनाले इंडिया, 2026' के ग्रैंड प्राइज विजेताओं और 'ऑनरेबल मेंशन' प्राप्तकर्ताओं को भी सम्मानित किया गया।
राष्ट्रपति ने दूरदराज के कलाकारों को नई तकनीकों का प्रशिक्षण देने और वित्तीय सहायता व बाज़ार पहुँच सुनिश्चित करने का आह्वान किया।
ललित कला अकादमी और संस्कृति मंत्रालय द्वारा कलाकृतियों की बिक्री को प्रोत्साहित करने के प्रयासों की सराहना की गई।
कला को स्कूलों, विश्वविद्यालयों और सार्वजनिक स्थानों तक पहुँचाने का आग्रह किया गया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 21 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एक विशेष समारोह में 65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी के चयनित कलाकारों को प्रतिष्ठित ललित कला अकादमी पुरस्कार प्रदान किए। इसी अवसर पर उन्होंने 'तीसरे प्रिंट बिएनाले इंडिया, 2026' के ग्रैंड प्राइज विजेताओं और 'ऑनरेबल मेंशन' (सम्माननीय उल्लेख) पाने वाले कलाकारों को भी सम्मानित किया।

समारोह का स्वरूप और संदेश

सभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति मुर्मु ने इस आयोजन को भारत की कलात्मक विरासत, सांस्कृतिक विविधता और समकालीन रचनात्मकता का उत्सव बताया। उन्होंने कहा, 'इस कार्यक्रम के माध्यम से हम भारत की विविध कलाओं की समृद्ध परंपरा, इसकी रचनात्मक ऊर्जा और इसकी निरंतर विकसित होती कलात्मक अभिव्यक्तियों का जश्न मना रहे हैं।'

राष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि कला केवल कैनवास पर चित्रकारी या पत्थर से तराशी गई मूर्तियों तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, 'कला हमारी संस्कृति का प्रतिबिंब है — यह वर्तमान की यादों, अनुभवों और भविष्य की आकांक्षाओं को दर्शाती है तथा समाज को एक नए दृष्टिकोण से देखने में सक्षम बनाती है।'

नवोदित कलाकारों के समर्थन पर बल

राष्ट्रपति मुर्मु ने परंपरागत और आधुनिक कला पद्धतियों के बीच सेतु बनाने की आवश्यकता रेखांकित करते हुए दूरदराज के क्षेत्रों के कलाकारों को नई तकनीकों का प्रशिक्षण देने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने तर्क दिया कि इससे कलाकार व्यापक मंचों पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकेंगे और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे।

उन्होंने युवा और उभरते कलाकारों के लिए आह्वान किया: 'आइए हम उन्हें अपनी प्रतिभा विकसित करने, नए माध्यमों का अन्वेषण करने और अपनी रचनात्मक क्षमता का विस्तार करने के लिए पर्याप्त अवसर प्रदान करें।'

कलाकारों की व्यावहारिक चुनौतियाँ

राष्ट्रपति ने कलाकारों के सामने आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों को भी रेखांकित किया। उनके अनुसार, रचनात्मक अवसरों के अलावा कलाकारों को वित्तीय सहायता, व्यापक बाज़ारों तक पहुँच और कला संग्राहकों से संपर्क की आवश्यकता होती है। उन्होंने ललित कला अकादमी और संस्कृति मंत्रालय द्वारा कलाकृतियों की बिक्री को प्रोत्साहित करने के प्रयासों पर संतोष व्यक्त किया।

गौरतलब है कि भारत में दृश्य कलाओं के लिए संस्थागत समर्थन की माँग लंबे समय से उठती रही है। यह समारोह ऐसे समय में आयोजित हुआ है जब वैश्विक स्तर पर भारतीय समकालीन कला को बढ़ती मान्यता मिल रही है और देशज कला परंपराओं के संरक्षण पर नीतिगत बहस तेज़ हो रही है।

कला को समाज से जोड़ने का आग्रह

राष्ट्रपति मुर्मु ने कला को गैलरी की दीवारों तक सीमित न रखने का आह्वान करते हुए आग्रह किया कि यह स्कूलों, विश्वविद्यालयों, सार्वजनिक स्थानों और समाज के व्यापक वर्गों तक पहुँचे। राष्ट्रपति सचिवालय और संस्कृति मंत्रालय के तत्वावधान में आयोजित इस समारोह ने राष्ट्रीय मंच पर भारतीय दृश्य कलाओं की जीवंतता का जश्न मनाया और पारंपरिक तथा नई पीढ़ी के रचनाकारों दोनों के लिए सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

आने वाले समय में ललित कला अकादमी से इन घोषणाओं को ठोस कार्यक्रमों में रूपांतरित करने की अपेक्षा रहेगी, ताकि नवोदित कलाकारों को वास्तविक धरातल पर सहायता मिल सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि वित्तीय सहायता और बाज़ार पहुँच के वादे ठोस नीतिगत ढाँचे में कब तब्दील होंगे — भारतीय दृश्य कला क्षेत्र में संस्थागत समर्थन की कमी की शिकायत दशकों पुरानी है। ललित कला अकादमी का बजट आवंटन और वास्तविक वितरण तंत्र अक्सर घोषणाओं के अनुरूप नहीं रहा। दूरदराज के कलाकारों के लिए प्रशिक्षण का आह्वान तब तक अधूरा है जब तक संस्कृति मंत्रालय क्षेत्रीय केंद्रों को पर्याप्त संसाधन नहीं देता। समारोह का उत्सवी माहौल महत्वपूर्ण है, पर दीर्घकालिक प्रभाव के लिए जवाबदेही का ढाँचा ज़रूरी है।
RashtraPress
21 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ललित कला अकादमी पुरस्कार 2026 किसने प्रदान किए?
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 21 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित समारोह में ललित कला अकादमी पुरस्कार प्रदान किए। ये पुरस्कार 65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी के चयनित कलाकारों को दिए गए।
65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी क्या है?
65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी ललित कला अकादमी द्वारा आयोजित वार्षिक प्रतिष्ठित कला प्रतियोगिता और प्रदर्शनी है, जिसमें देशभर के दृश्य कलाकार भाग लेते हैं। इसमें चयनित कलाकारों को राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं।
प्रिंट बिएनाले इंडिया 2026 में कौन-से पुरस्कार दिए गए?
तीसरे प्रिंट बिएनाले इंडिया, 2026 में ग्रैंड प्राइज विजेताओं और 'ऑनरेबल मेंशन' (सम्माननीय उल्लेख) पाने वाले कलाकारों को राष्ट्रपति मुर्मु ने सम्मानित किया। यह आयोजन भारतीय मुद्रण कला को राष्ट्रीय मंच पर प्रतिष्ठित करने का प्रयास है।
राष्ट्रपति मुर्मु ने नवोदित कलाकारों के बारे में क्या कहा?
राष्ट्रपति मुर्मु ने नवोदित और युवा कलाकारों को वित्तीय सहायता, व्यापक बाज़ारों तक पहुँच और कला संग्राहकों से संपर्क दिलाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने दूरदराज के कलाकारों को नई तकनीकों का प्रशिक्षण देने और उन्हें व्यापक मंचों पर प्रतिस्पर्धी बनाने का भी आह्वान किया।
यह समारोह किसके तत्वावधान में आयोजित हुआ?
यह समारोह राष्ट्रपति सचिवालय और संस्कृति मंत्रालय के तत्वावधान में आयोजित किया गया। इसमें भारत के दृश्य कला पारिस्थितिकी तंत्र को पोषित करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि की गई।
राष्ट्र प्रेस
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