हरियाणा-दिल्ली बॉर्डर पर कर्नाटक के 30 से अधिक CJP स्वयंसेवक हिरासत में, महिला पुलिसकर्मी न होने पर उठे सवाल
सारांश
मुख्य बातें
सिटिज़न्स फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) ने 11 अक्टूबर 2026 को आरोप लगाया कि कर्नाटक से नई दिल्ली जा रहे उसके स्वयंसेवकों के एक समूह को हरियाणा-दिल्ली सीमा के निकट अधिकारियों ने कथित तौर पर रोका, हिरासत में लिया और राजधानी से दूर ले जाया। यह घटना उस समय सामने आई जब दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक प्रदर्शन आयोजित हो रहा था, जिसमें ये स्वयंसेवक शामिल होने जा रहे थे।
हिरासत की घटनाक्रम
CJP की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, हिरासत में लिए गए समूह में कथित तौर पर लगभग 15 से 20 पुरुष और 12 से 13 महिलाएँ शामिल हैं। संगठन का कहना है कि इन स्वयंसेवकों को विवादित परिस्थितियों में दिल्ली से बाहर ले जाया जा रहा है, जिससे उनके परिवारों और कानूनी दलों में गहरी चिंता उत्पन्न हो गई है।
CJP के अनुसार, परिवहन के दौरान दल के साथ कथित तौर पर कोई महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थी। संगठन का कहना है कि यह सर्वोच्च न्यायालय के उन दिशानिर्देशों का उल्लंघन है, जो महिलाओं की हिरासत के दौरान महिला पुलिस की अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित करने का निर्देश देते हैं।
मानवाधिकार और कानूनी चिंताएँ
CJP और अन्य अधिवक्ताओं ने हिरासत में लिए गए लोगों के सटीक स्थान और स्वास्थ्य की जानकारी सार्वजनिक करने की तत्काल माँग की है। संगठन ने यह भी माँग की है कि कानूनी सहायता संस्थाओं और प्रतिनिधियों को इन स्वयंसेवकों तक तत्काल पहुँच दी जाए। इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि हिरासत से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन होना चाहिए।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में हुआ है जब देश भर में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और स्वायत्तता को लेकर बहस तेज़ है। विपक्षी दल और नागरिक समाज संगठन लगातार मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाते रहे हैं।
पुलिस और प्रशासन की प्रतिक्रिया
अभी तक पुलिस या प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हरियाणा पुलिस और दिल्ली पुलिस की भूमिका स्पष्ट नहीं हो पाई है, क्योंकि हिरासत की सटीक जगह सीमा पर विवादित बताई जा रही है। राष्ट्र प्रेस इस विषय पर दोनों पक्षों से पुष्टि के प्रयास कर रहा है।
आगे क्या होगा
CJP ने संकेत दिया है कि यदि स्वयंसेवकों की सुरक्षित रिहाई और उनके ठिकाने की जानकारी शीघ्र नहीं दी गई, तो संगठन कानूनी कार्रवाई का रास्ता अपनाएगा। कर्नाटक में उनके परिवार और कानूनी दल अधिकारियों से संपर्क में हैं। यह घटना नागरिक समाज के विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिरासत की प्रक्रिया और प्रोटोकॉल पर एक बड़ी बहस को जन्म दे सकती है।