14 जुलाई 2026
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पुणे में जनगणना कर्मचारी पर हमला: महिला के कपड़े फाड़े, बेटे को 4 टांके; 5 आरोपियों पर FIR

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पुणे में जनगणना कर्मचारी पर हमला: महिला के कपड़े फाड़े, बेटे को 4 टांके; 5 आरोपियों पर FIR

सारांश

पुणे में जनगणना-2027 का सर्वे कर रही महिला कर्मचारी वनीता पाटोले पर 10-12 लोगों के समूह ने हमला किया — कपड़े फाड़े, बेटे को 4 टांके आए। यह घटना सरकारी कर्मचारियों, खासकर महिलाओं की फील्ड सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाती है।

मुख्य बातें

वनीता गोरखनाथ पाटोले (48) , पुणे नगर निगम कर्मचारी, पर 28 मई 2026 को मीनाताई ठाकरे वसाहत, स्वारगेट में जनगणना सर्वे के दौरान हमला हुआ।
10 से 12 लोगों के समूह ने लात-घूंसों और पत्थरों से हमला किया; पीड़िता के कपड़े फाड़े गए और जान से मारने की धमकी दी गई।
पीड़िता के बेटे को गंभीर चोट आई और 4 टांके लगाने पड़े।
स्वारगेट पुलिस ने 5 नामजद आरोपियों — विकास मोरे, क्रांति मोरे, मुक्ता कसबे, लीलावती मोरे और अभिजीत मोरे — के खिलाफ FIR दर्ज की।
वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक यशवंत निकम ने जाँच जारी होने और कानूनी कार्रवाई का आश्वासन दिया।

पुणे नगर निगम की महिला कर्मचारी वनीता गोरखनाथ पाटोले (48) पर जनगणना-2027 के सर्वे के दौरान 28 मई 2026 को पुणे के स्वारगेट इलाके में कथित तौर पर बर्बर हमला किया गया। पीड़िता का आरोप है कि 10 से 12 लोगों के समूह ने उन्हें और उनके बेटे को घेरकर लात-घूंसों और पत्थरों से पीटा, उनके कपड़े फाड़े और जान से मारने की धमकी दी। स्वारगेट पुलिस स्टेशन में 5 नामजद आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है।

मुख्य घटनाक्रम

वनीता पाटोले पुणे नगर निगम के बिबवेवाड़ी क्षेत्रीय कार्यालय में अटेंडेंट के पद पर कार्यरत हैं। उन्हें जनगणना-2027 के तहत स्वारगेट क्षेत्र की मीनाताई ठाकरे वसाहत का सर्वे करने की जिम्मेदारी दी गई थी।

27 मई को दोपहर करीब 3 से 4:30 बजे के बीच जब वे गली नंबर-14 में काम कर रही थीं, तब विकास नवन्नाथ मोरे, उनकी पत्नी क्रांति मोरे, बहन मुक्ता कसबे, माँ लीलावती मोरे और भतीजे अभिजीत मोरे ने कथित तौर पर उनके साथ अभद्र व्यवहार किया, गाली-गलौज की और सरकारी काम में बाधा डाली। पीड़िता के अनुसार, उसी दिन उन्हें धमकी भी दी गई थी।

28 मई को वनीता अपने बेटे और अन्य कर्मचारियों के साथ अधूरा काम पूरा करने दोबारा उसी इलाके में पहुँचीं। जब हालात बिगड़ते देख वे वहाँ से निकलने लगीं, तो आरोपियों ने और लोगों को बुलाकर हमला किया।

हमले का विवरण

पीड़िता के अनुसार, 10 से 12 लोगों के समूह ने उन्हें और उनके बेटे को घेर लिया और लात-घूंसों, पत्थरों तथा हाथों से हमला किया। उन्हें जमीन पर गिराकर बेरहमी से पीटा गया। हमले के दौरान उनके बेटे को गंभीर चोट आई और उसे 4 टांके लगाने पड़े।

वनीता पाटोले ने बताया, 'मैं सिर्फ अपना कर्तव्य निभा रही थी। मेरा किसी से कोई निजी विवाद नहीं था। इसके बावजूद मुझे और मेरे बेटे को बेरहमी से पीटा गया। मेरे कपड़े फाड़ दिए गए, साड़ी खींची गई और मुझे अपमानित किया गया। साथ ही मोबाइल फोन, घड़ी और गले की चेन छीनने की भी कोशिश की गई।'

उन्होंने यह भी कहा, 'मेरे साथ आए कर्मचारियों को भी पीटा गया। मुझे न्याय चाहिए।'

पुलिस की प्रतिक्रिया

शिकायत के बाद स्वारगेट पुलिस ने विकास नवन्नाथ मोरे, क्रांति विकास मोरे, मुक्ता राजाभाऊ कसबे, लीलावती नवन्नाथ मोरे और अभिजीत श्रीधर मोरे समेत कई लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

स्वारगेट पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक यशवंत निकम ने कहा, 'जनगणना कार्य के दौरान महिला कर्मचारी के साथ मारपीट की घटना हुई है। आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। झुग्गी बस्तियों में जनगणना को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है। जहाँ भी कर्मचारियों को पुलिस सहायता की आवश्यकता होगी, वहाँ पूरा सहयोग दिया जाएगा।' फिलहाल पुलिस मामले की आगे जाँच कर रही है।

आम जनता और सरकारी कर्मचारियों पर असर

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब जनगणना-2027 के लिए देशभर में घर-घर सर्वे का काम जोर-शोर से चल रहा है। गौरतलब है कि सरकारी कर्मचारियों, विशेष रूप से महिला कर्मचारियों की सुरक्षा का सवाल पहले भी उठता रहा है। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि क्या जनगणना दलों को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराई जा रही है।

वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक निकम का बयान संकेत देता है कि घनी बस्तियों और झुग्गी क्षेत्रों में जनगणना कार्य को लेकर जागरूकता और पुलिस समन्वय दोनों की आवश्यकता है। आने वाले दिनों में इस मामले में गिरफ्तारियाँ और अदालती कार्रवाई अपेक्षित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

विशेषकर महिलाएँ, करती हैं। जनगणना जैसे राष्ट्रीय महत्व के कार्य में बाधा डालना और कर्मचारियों पर हिंसा करना न केवल कानूनी अपराध है, बल्कि यह लोकतांत्रिक प्रशासन की नींव पर हमला है। पुलिस का 'जागरूकता बढ़ाने' वाला बयान जरूरी है, लेकिन पर्याप्त नहीं — असली सवाल यह है कि क्या जनगणना दलों को तैनाती से पहले पुलिस सुरक्षा प्रोटोकॉल दिया जाता है। बिना संस्थागत सुरक्षा ढाँचे के, ऐसी घटनाएँ दोहराई जाती रहेंगी।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुणे में जनगणना कर्मचारी पर हमला कब और कहाँ हुआ?
यह हमला 28 मई 2026 को पुणे के स्वारगेट इलाके की मीनाताई ठाकरे वसाहत, गली नंबर-14 में हुआ। पीड़िता वनीता पाटोले जनगणना-2027 के तहत घर-घर सर्वे करने गई थीं।
हमले में कितने लोग शामिल थे और किन पर FIR दर्ज हुई?
पीड़िता के अनुसार 10 से 12 लोगों के समूह ने हमला किया। स्वारगेट पुलिस ने विकास नवन्नाथ मोरे, क्रांति विकास मोरे, मुक्ता राजाभाऊ कसबे, लीलावती नवन्नाथ मोरे और अभिजीत श्रीधर मोरे — 5 नामजद आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
पीड़िता और उनके बेटे को कितनी चोट आई?
पीड़िता वनीता पाटोले के कपड़े फाड़े गए, उन्हें जमीन पर गिराकर पीटा गया और मोबाइल, घड़ी व गले की चेन छीनने की कोशिश की गई। उनके बेटे को गंभीर चोट आई और उसे 4 टांके लगाने पड़े।
पुलिस ने इस मामले में क्या कार्रवाई की है?
स्वारगेट पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कर ली गई है। वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक यशवंत निकम ने आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और जनगणना कर्मचारियों को पुलिस सहायता देने का आश्वासन दिया है। मामले की जाँच जारी है।
जनगणना-2027 के सर्वे के दौरान कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर क्या चिंताएँ हैं?
यह घटना दर्शाती है कि घनी बस्तियों और झुग्गी क्षेत्रों में जनगणना कर्मचारियों — विशेषकर महिलाओं — को फील्ड में गंभीर खतरों का सामना करना पड़ सकता है। पुलिस ने स्वयं माना है कि ऐसे क्षेत्रों में जागरूकता और पुलिस समन्वय बढ़ाने की आवश्यकता है।
राष्ट्र प्रेस
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