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ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर युवक की पिटाई का वीडियो वायरल, लापरवाही पर जीआरपी एसआई पुलिस लाइन भेजा

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ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर युवक की पिटाई का वीडियो वायरल, लापरवाही पर जीआरपी एसआई पुलिस लाइन भेजा

सारांश

ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर भीड़ द्वारा युवक की पिटाई का वीडियो वायरल हुआ तो जीआरपी की नींद टूटी — लेकिन सवाल यह है कि पुलिस मौके पर थी, फिर भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई? एसआई का तबादला जवाबदेही की शुरुआत है, असली परीक्षा जांच के नतीजों में होगी।

मुख्य बातें

29 जून की शाम ग्वालियर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 2 पर यात्रियों ने एक युवक के साथ मारपीट की।
महिला ने युवक पर सोने की बाली छीनने की कोशिश का आरोप लगाया था।
आरपीएफ ने युवक को भीड़ से बचाकर जीआरपी को सौंपा, लेकिन जीआरपी ने कथित तौर पर तत्काल कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की।
वायरल वीडियो पर संज्ञान लेते हुए जीआरपी एसआई चेतन कोरोलिया को पुलिस लाइन भेजा गया।
एसपी राजेश सिंह ने विभागीय जांच की पुष्टि की; मारपीट में शामिल यात्रियों की पहचान जारी है।

ग्वालियर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 2 पर 29 जून की शाम एक युवक के साथ यात्रियों द्वारा की गई मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) हरकत में आई है। मामले को संभालने में कथित लापरवाही के आरोप में सब-इंस्पेक्टर चेतन कोरोलिया को विभागीय जांच पूरी होने तक पुलिस लाइन भेज दिया गया है।

घटना का पूरा घटनाक्रम

29 जून की शाम करीब 4 बजे एक महिला ने युवक पर उसके कान से सोने की बाली छीनने की कोशिश का आरोप लगाया। महिला के शोर मचाने पर मौजूद यात्रियों ने युवक को घेर लिया और सुरक्षा कर्मियों के पहुँचने से पहले ही उसके साथ मारपीट शुरू कर दी।

मारपीट के दौरान युवक ने खुद को भीड़ से बचाने के लिए अपने साथ मौजूद एक बच्चे को गोद में उठा लिया। मौके पर उपस्थित एक व्यक्ति ने पूरी घटना का वीडियो रिकॉर्ड किया, जो बाद में सोशल मीडिया पर तेज़ी से फैल गया।

आरपीएफ का हस्तक्षेप और जीआरपी पर सवाल

रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के जवानों ने भीड़ से युवक को बचाया और आगे की कार्रवाई के लिए उसे जीआरपी को सौंप दिया। हालाँकि, आरोप है कि जीआरपी ने कथित आरोपी के खिलाफ कोई तत्काल कानूनी कार्रवाई नहीं की और उसे जाने दिया। इसी कथित लापरवाही ने वायरल वीडियो के साथ मिलकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए।

विभागीय जांच और एसआई का तबादला

वायरल वीडियो पर संज्ञान लेते हुए रेलवे पुलिस मुख्यालय ने प्रारंभिक जांच के आदेश दिए। जांच के प्रारंभिक निष्कर्षों के आधार पर जीआरपी सब-इंस्पेक्टर चेतन कोरोलिया को विभागीय जांच पूरी होने तक पुलिस लाइन भेज दिया गया।

एसपी की प्रतिक्रिया

रेलवे पुलिस अधीक्षक राजेश सिंह ने कहा, 'घटना की विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। हम वायरल वीडियो के आधार पर युवक के साथ मारपीट में शामिल लोगों की पहचान भी कर रहे हैं। दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।'

आगे क्या होगा

यह घटना सार्वजनिक स्थानों पर भीड़ द्वारा कानून हाथ में लेने की बढ़ती प्रवृत्ति और रेलवे पुलिस की जवाबदेही, दोनों पर गंभीर सवाल उठाती है। विभागीय जांच के नतीजे तय करेंगे कि एसआई कोरोलिया सहित अन्य संबंधित अधिकारियों और मारपीट में शामिल यात्रियों के खिलाफ आगे कोई अनुशासनात्मक या कानूनी कदम उठाया जाएगा या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

और अक्सर पुलिस की निष्क्रियता उन्हें और हवा देती है। एसआई का तबादला एक प्रशासनिक प्रतिक्रिया है, न कि जवाबदेही का ठोस संकेत — असली सवाल यह है कि आरपीएफ द्वारा सौंपे जाने के बाद जीआरपी ने कार्रवाई क्यों नहीं की। जब तक मारपीट में शामिल यात्रियों पर एफआईआर दर्ज नहीं होती और जांच के नतीजे सार्वजनिक नहीं होते, यह कार्रवाई महज दिखावटी राहत बनकर रह जाएगी।
RashtraPress
2 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर मारपीट की घटना कब और कहाँ हुई?
यह घटना 29 जून की शाम करीब 4 बजे ग्वालियर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 2 पर हुई। एक महिला के आरोप के बाद यात्रियों ने युवक को घेरकर मारपीट की।
जीआरपी एसआई को पुलिस लाइन क्यों भेजा गया?
आरोप है कि जीआरपी सब-इंस्पेक्टर चेतन कोरोलिया ने आरपीएफ द्वारा सौंपे गए कथित आरोपी के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई नहीं की और उसे जाने दिया। वायरल वीडियो पर संज्ञान लेने के बाद रेलवे पुलिस मुख्यालय ने जांच के आदेश दिए और एसआई को विभागीय जांच पूरी होने तक पुलिस लाइन भेज दिया।
मारपीट में शामिल यात्रियों पर क्या कार्रवाई होगी?
रेलवे पुलिस अधीक्षक राजेश सिंह के अनुसार, वायरल वीडियो के आधार पर मारपीट में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है। दोषी पाए जाने पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
आरपीएफ और जीआरपी की इस मामले में क्या भूमिका थी?
रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के जवानों ने भीड़ से युवक को बचाया और आगे की कार्रवाई के लिए जीआरपी को सौंपा। इसके बाद जीआरपी पर आरोप है कि उसने कोई तत्काल कानूनी कदम नहीं उठाया, जो विवाद की जड़ बना।
इस घटना की विभागीय जांच कब तक पूरी होगी?
अभी तक जांच पूरी होने की कोई निश्चित समयसीमा घोषित नहीं की गई है। जांच के नतीजों के आधार पर एसआई कोरोलिया सहित अन्य संबंधितों के खिलाफ अनुशासनात्मक या कानूनी कार्रवाई तय होगी।
राष्ट्र प्रेस
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