₹5 करोड़ रिश्वत मामले में ईडी की एंट्री: पंजाब CM भगवंत मान के साले अमरदीप ग्रेवाल को समन
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की पत्नी डॉ. गुरप्रीत कौर से जुड़े कथित ₹5 करोड़ रुपये की रिश्वत मामले में जांच का दायरा बढ़ा दिया है। एजेंसी ने मुख्यमंत्री के साले और पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े अमरदीप सिंह ग्रेवाल को समन जारी कर पूछताछ के लिए तलब किया है। यह कदम उस समय आया है जब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी इस मामले में पंजाब सरकार और पुलिस महानिदेशक से दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट मांगी है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद एक कथित रेप मामले को दबाने के लिए ₹5 करोड़ रुपये मांगे जाने के आरोप से जुड़ा है। पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजीत सिंह, शिरोमणि अकाली दल (SAD) नेता बिक्रम मजीठिया और हरसिमरत कौर बादल ने आरोप लगाया था कि अमरदीप सिंह ग्रेवाल ने एक रेस्टोरेंट में आरोपी के साथी और मीडिया इन्फ्लुएंसर गुरि चहल के साथ कथित तौर पर ₹5 करोड़ की डील तय की थी।
आरोपों के अनुसार, ग्रेवाल ने मुख्यमंत्री की पत्नी की तस्वीर दिखाकर अपनी पहुँच का दावा किया था। यह भी आरोप लगाया गया है कि कथित डील के बाद आरोपी को दो महीने में रिहा कर दिया गया और बाद में वह अमेरिका चला गया। हालाँकि, ये सभी आरोप अभी अदालत में साबित नहीं हुए हैं।
अमरदीप ग्रेवाल कौन हैं
अमरदीप सिंह ग्रेवाल पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री का एक जाना-पहचाना नाम हैं। वह एम/एस ईस्ट सनशाइन प्रोडक्शन प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े हैं, जिसने 'मौजां ही मौजां' (2023) और 'स्नोमैन' (2022) जैसी पंजाबी फिल्मों का निर्माण किया है। 'मौजां ही मौजां' में गिप्पी ग्रेवाल और बिन्नू ढिल्लों मुख्य भूमिकाओं में थे। उनकी कंपनी के ओवरसीज प्रोडक्शन और फिल्म रिलीज़ से जुड़े वित्तीय लेन-देन अब ईडी की जांच के केंद्र में हैं।
ईडी की जांच का फोकस
ईडी कथित ₹5 करोड़ रुपये के लेन-देन के मनी ट्रेल की जांच कर रही है। जांच एजेंसी को आशंका है कि कथित रकम फिल्म प्रोडक्शन कंपनी के खातों या ओवरसीज फिल्म रिलीज़ से जुड़े फंड के ज़रिये लाई गई हो सकती है। ग्रेवाल को भेजे गए समन में उनके प्रोडक्शन हाउस के बैंक खातों, विदेशी निवेश और फिल्मों की फंडिंग से जुड़े दस्तावेज मांगे गए हैं।
गौरतलब है कि ईडी की यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग कानून (PMLA) के तहत है और कथित वित्तीय अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच का हिस्सा है।
डॉ. गुरप्रीत कौर और अदालती कार्रवाई
मुख्यमंत्री भगवंत मान की पत्नी डॉ. गुरप्रीत कौर ने इन सभी आरोपों को बेबुनियाद करार दिया है। उन्होंने बिक्रम मजीठिया, हरसिमरत कौर बादल और खैरा के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मामला दायर किया है, यह दावा करते हुए कि फर्जी ऑडियो, तस्वीरों और सीसीटीवी फुटेज के ज़रिये उनकी छवि खराब करने की कोशिश की गई।
चंडीगढ़ सिविल कोर्ट ने मजीठिया, खैरा और जस्टिस रंजीत सिंह द्वारा असत्यापित मानहानिकारक सामग्री प्रकाशित किए जाने पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा का अधिकार भी संविधान के अंतर्गत संरक्षित है।
NHRC और आगे की राह
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए पंजाब सरकार और पुलिस महानिदेशक (DGP) से दो सप्ताह के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी है। शिकायत में आरोप था कि इस प्रकरण से पीड़िता के न्याय पाने के मूलभूत अधिकार का हनन हुआ है।
यह मामला अब एक साथ तीन मोर्चों — ईडी की वित्तीय जांच, अदालती कार्यवाही और NHRC की जवाबदेही प्रक्रिया — पर सक्रिय है। आरोपों की पुष्टि या खंडन का अंतिम निर्णय जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।