पंजाब में कानून-व्यवस्था ध्वस्त, अपराधियों के हौसले बुलंद: कांग्रेस नेता राज कुमार वेरका का भगवंत सरकार पर हमला
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता राज कुमार वेरका ने 20 जुलाई को अमृतसर में पंजाब की भगवंत मान सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और अपराधियों के हौसले दिन-ब-दिन बुलंद होते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार अपराध रोकने में पूरी तरह विफल साबित हुई है और आम नागरिक खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है।
बिगड़ती कानून-व्यवस्था पर वेरका का हमला
वेरका ने कहा कि पंजाब में लूटपाट, फिरौती और अन्य आपराधिक घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं, जबकि सरकार मूकदर्शक बनी हुई है। उनके अनुसार, हाल के दिनों में महिलाओं और युवतियों के साथ होने वाली आपराधिक घटनाओं ने जनमानस में भय का माहौल पैदा कर दिया है। वेरका ने आरोप लगाया कि पुलिस और सरकार दोनों ही बेबस नज़र आ रहे हैं और सरकार की अपराधियों तथा माफिया तत्वों के साथ सांठगांठ का संदेह पैदा हो रहा है।
उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए जवाबदेही तय करने की माँग की। वेरका ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि सरकार कानून-व्यवस्था संभालने में सक्षम नहीं है, तो उसे इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
कांग्रेस की संगठनात्मक बैठक और गुटबाजी के आरोप
दिल्ली में पार्टी की बुलाई गई बैठक और पंजाब कांग्रेस में कथित गुटबाजी के सवाल पर वेरका ने कहा कि पार्टी के भीतर किसी प्रकार की गुटबाजी नहीं है। उनके अनुसार, दिल्ली में होने वाली यह बैठक आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों और संगठनात्मक रणनीति को अंतिम रूप देने के लिए बुलाई गई है।
बैठक में पंजाब कांग्रेस के सभी वरिष्ठ नेता और पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व शामिल होगा। वेरका ने कहा कि इसमें पूरे राज्य में अभियान को प्रभावी ढंग से चलाने की रणनीति तैयार की जाएगी और सभी नेताओं को उनकी जिम्मेदारियाँ सौंपी जाएंगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि कांग्रेस एकजुट होकर मैदान में उतर रही है।
सुखबीर बादल और एसआईटी जाँच पर सवाल
शिरोमणि अकाली दल (SAD) के नेता सुखबीर सिंह बादल के एसआईटी के समक्ष पेश होने के मुद्दे पर वेरका ने कहा कि यह मामला वर्षों से लंबित है और बार-बार पूछताछ के बावजूद कोई स्पष्ट निष्कर्ष सामने नहीं आ रहा है। उन्होंने कहा कि यदि जाँच एजेंसियों के पास पर्याप्त साक्ष्य हैं, तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए और यदि पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं, तो संबंधित व्यक्ति को स्पष्ट रूप से राहत दी जानी चाहिए।
वेरका ने कहा कि सालों तक एक ही मामले में लगातार पूछताछ और जाँच की प्रक्रिया जारी रखना उचित नहीं है। पंजाब के लोग चाहते हैं कि ऐसे मामलों का समयबद्ध और निष्पक्ष तरीके से निपटारा हो, ताकि न्यायिक प्रक्रिया पर जनता का विश्वास बना रहे।
जाँच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल
एसआईटी सूत्रों के इस दावे पर कि सुखबीर बादल ने जाँच में सहयोग नहीं किया, वेरका ने जाँच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एजेंसियों को अपनी जाँच पेशेवर और प्रभावी तरीके से करनी चाहिए — यदि किसी व्यक्ति से जवाब चाहिए, तो स्पष्ट और ठोस पूछताछ होनी चाहिए।
वेरका के अनुसार, बार-बार एक ही प्रक्रिया दोहराने के बजाय जाँच को तार्किक निष्कर्ष तक पहुँचाना अधिक आवश्यक है। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब पंजाब में राजनीतिक और कानूनी मोर्चों पर एक साथ हलचल तेज हो गई है।