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पंजाब पुलिस की 'युवा सांझ' पहल: 1,200 युवाओं की काउंसलिंग सफल, 39 केस स्किल मिशन को रेफर

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पंजाब पुलिस की 'युवा सांझ' पहल: 1,200 युवाओं की काउंसलिंग सफल, 39 केस स्किल मिशन को रेफर

सारांश

पंजाब पुलिस की 'युवा सांझ' पहल महज़ कानून-व्यवस्था से आगे जाकर एक सामाजिक सुधार मॉडल बन रही है — 1,500 भटके युवाओं तक पहुँच, 1,200 की सफल काउंसलिंग और 39 केस स्किल मिशन को रेफर। 530 सांझ केंद्रों का नेटवर्क इस बदलाव की रीढ़ है।

मुख्य बातें

पंजाब पुलिस की 'युवा सांझ' पहल वर्ष 2023 में शुरू हुई; विशेष DGP गुरप्रीत देव ने इसकी प्रगति साझा की।
अब तक लगभग 1,500 युवाओं तक पहुँच बनाई गई; इनमें से 1,200 की काउंसलिंग सफलतापूर्वक पूरी।
राज्यभर में 530 सांझ केंद्रों के नेटवर्क के माध्यम से कार्यक्रम संचालित; प्रत्येक केंद्र में युवा सांझ समिति गठित।
लक्ष्य समूह 15 से 25 वर्ष के युवा; नशा, सोशल मीडिया प्रभाव और कट्टरपंथ प्रमुख चिंताएँ।
लगभग 39 मामले पंजाब स्किल डेवलपमेंट मिशन को रेफर; रोजगार विभाग और जिला प्रशासन के साथ समन्वय जारी।

पंजाब पुलिस की विशेष महानिदेशक (DGP) गुरप्रीत देव ने बताया कि राज्य में वर्ष 2023 में शुरू की गई 'युवा सांझ' पहल एक प्रभावशाली सामाजिक सुधार मॉडल के रूप में आकार ले रही है। इस कार्यक्रम के तहत अब तक लगभग 1,500 युवाओं तक पहुँच बनाई गई है, जो विभिन्न कारणों से भटकाव की राह पर थे, और इनमें से 1,200 की काउंसलिंग सफलतापूर्वक पूरी की जा चुकी है।

कार्यक्रम की संरचना और उद्देश्य

गुरप्रीत देव के अनुसार, 'युवा सांझ' पहल का संचालन पंजाब पुलिस के कम्युनिटी अफेयर्स डिवीजन द्वारा किया जा रहा है। इसके लिए राज्यभर में पहले से सक्रिय 530 सांझ केंद्रों के नेटवर्क को आधार बनाया गया है। प्रत्येक केंद्र में एक स्थानीय सामुदायिक समिति होती है, जिसे पुनर्सक्रिय कर 'युवा सांझ समिति' का रूप दिया गया है, ताकि जमीनी स्तर पर युवाओं तक सीधी पहुँच सुनिश्चित हो सके।

ये सांझ केंद्र पहले से ही नागरिकों को पुलिस वेरिफिकेशन, एफआईआर की प्रति, डीडीआर और अन्य प्रशासनिक दस्तावेज जैसी सेवाएँ प्रदान करते हैं — बिना सीधे थाने जाए। इसके अतिरिक्त एक ऑनलाइन पोर्टल भी उपलब्ध है, जिससे नागरिक घर बैठे भी इन सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं।

लक्ष्य समूह और जोखिम कारक

गुरप्रीत देव ने बताया कि 15 से 25 वर्ष की आयु के युवा इस कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य समूह हैं। इस उम्र में युवा सामाजिक, डिजिटल और बाहरी प्रभावों के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील होते हैं। कमजोर पारिवारिक संरचना और उचित मार्गदर्शन की कमी अक्सर उन्हें गलत दिशा में धकेल देती है।

सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव को भी एक प्रमुख चिंता के रूप में रेखांकित किया गया है। गुरप्रीत देव ने कहा कि कई युवा हिंसक सामग्री या कट्टरपंथी विचारधाराओं की ओर आकर्षित हो जाते हैं। ऐसे मामलों में पुलिस प्रत्यक्ष दंडात्मक कार्रवाई की बजाय समुदाय और विशेषज्ञों की मदद से सुधार का रास्ता अपनाती है।

काउंसलिंग और पुनर्वास प्रक्रिया

इस पहल में मनोवैज्ञानिकों और मनोरोग विशेषज्ञों की सेवाएँ ली जाती हैं, ताकि युवाओं की मानसिक स्थिति का सही आकलन कर उन्हें उचित दिशा दी जा सके। काउंसलिंग के बाद उन्हें शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ने का प्रयास किया जाता है। गुरप्रीत देव ने बताया कि अब तक कई युवाओं को नशे की समस्या से बाहर निकाला गया है और कुछ को नौकरी भी दिलाई गई है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल काउंसलिंग पर्याप्त नहीं है — यदि युवाओं के पास आजीविका का ठोस साधन न हो, तो पुनः भटकने का खतरा बना रहता है। इसीलिए पंजाब पुलिस, कौशल विकास मिशन, रोजगार विभाग और जिला प्रशासन के साथ समन्वय करते हुए काम कर रही है।

स्किल मिशन को रेफरल और आगे की राह

गुरप्रीत देव ने बताया कि अब तक लगभग 39 मामले पंजाब स्किल डेवलपमेंट मिशन को रेफर किए जा चुके हैं, ताकि युवाओं को उनकी रुचि और क्षमता के अनुसार व्यावसायिक प्रशिक्षण मिल सके। यह काम अभी जारी है।

गुरप्रीत देव ने कहा कि पुलिस अब केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में नेतृत्वकारी और हस्तक्षेपकारी भूमिका निभा रही है। 'युवा सांझ' मॉडल की सफलता यह संकेत देती है कि सामुदायिक भागीदारी और बहु-विभागीय समन्वय से युवाओं को मुख्यधारा में वापस लाना संभव है।

संपादकीय दृष्टिकोण

500 में से केवल 39 केस स्किल मिशन को रेफर होना यह भी बताता है कि काउंसलिंग और रोजगार के बीच की खाई अभी पाटी नहीं गई। पंजाब में नशे और कट्टरपंथ की समस्या जिस पैमाने पर है, उसके सामने 1,200 सफल काउंसलिंग एक शुरुआत है, मंजिल नहीं। असली कसौटी यह होगी कि इन युवाओं में से कितने दो साल बाद भी मुख्यधारा में टिके हैं — और उसका डेटा सार्वजनिक होना चाहिए।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंजाब पुलिस की 'युवा सांझ' पहल क्या है?
'युवा सांझ' पंजाब पुलिस का एक सामाजिक सुधार कार्यक्रम है, जो वर्ष 2023 में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य 15 से 25 वर्ष के भटके हुए युवाओं को काउंसलिंग, शिक्षा और कौशल विकास के माध्यम से समाज की मुख्यधारा में वापस लाना है।
अब तक कितने युवाओं को इस कार्यक्रम से फायदा हुआ?
विशेष DGP गुरप्रीत देव के अनुसार, अब तक लगभग 1,500 युवाओं तक पहुँच बनाई गई है और इनमें से 1,200 की काउंसलिंग सफलतापूर्वक पूरी की जा चुकी है। कई युवाओं को नशे की समस्या से बाहर निकाला गया है और कुछ को रोजगार भी दिलाया गया है।
सांझ केंद्र क्या हैं और ये 'युवा सांझ' से कैसे जुड़े हैं?
सांझ केंद्र पंजाब पुलिस के कम्युनिटी अफेयर्स डिवीजन द्वारा संचालित नागरिक सेवा केंद्र हैं, जो राज्यभर में 530 स्थानों पर कार्यरत हैं। 'युवा सांझ' पहल को इन्हीं केंद्रों की सामुदायिक समितियों को पुनर्सक्रिय कर 'युवा सांझ समिति' के रूप में लागू किया गया है।
पंजाब स्किल डेवलपमेंट मिशन की इसमें क्या भूमिका है?
अब तक लगभग 39 मामले पंजाब स्किल डेवलपमेंट मिशन को रेफर किए गए हैं, ताकि युवाओं को उनकी रुचि और क्षमता के अनुसार व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जा सके। पुलिस का मानना है कि काउंसलिंग के साथ-साथ रोजगार सुनिश्चित करना पुनर्वास की दीर्घकालिक सफलता के लिए अनिवार्य है।
इस कार्यक्रम में युवाओं की पहचान और मदद कैसे की जाती है?
स्थानीय युवा सांझ समितियाँ और सांझ केंद्र जमीनी स्तर पर भटके युवाओं की पहचान करते हैं। इसके बाद मनोवैज्ञानिकों और मनोरोग विशेषज्ञों की मदद से उनकी मानसिक स्थिति का आकलन कर काउंसलिंग दी जाती है और फिर उन्हें रोजगार विभाग या स्किल मिशन से जोड़ा जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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