विदिशा में सीनियर सिटीजन पुलिस पंचायत: 187 में से 131 मामले सुलझे, 70% शिकायतों का निपटारा
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के विदिशा जिले की पुलिस ने बुजुर्गों को त्वरित न्याय दिलाने के लिए 'सीनियर सिटीजन पुलिस पंचायत' की शुरुआत की है, जो अब तक 187 प्रकरणों में से 131 मामलों का सफलतापूर्वक निराकरण कर चुकी है — यानी लगभग 70 प्रतिशत शिकायतों का समाधान। 23 जनवरी 2025 को शुरू हुई यह पहल वरिष्ठ नागरिकों के लिए पारिवारिक समन्वय, सामाजिक संवेदनशीलता और कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से न्याय का एक भरोसेमंद मंच बन चुकी है।
पहल की पृष्ठभूमि और उद्देश्य
विदिशा पुलिस ने समाज में वरिष्ठ नागरिकों के प्रति सम्मान, सुरक्षा और संवेदनशीलता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से इस पंचायत की नींव रखी। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में बुजुर्गों के साथ पारिवारिक उत्पीड़न और संपत्ति विवाद के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। गौरतलब है कि पारंपरिक पुलिस प्रक्रियाओं में वरिष्ठ नागरिकों की शिकायतों पर त्वरित सुनवाई अक्सर संभव नहीं हो पाती थी।
इस पहल के तहत बुजुर्गों की समस्याओं को न केवल गंभीरता से सुना जाता है, बल्कि आपसी संवाद और विधिसम्मत प्रक्रिया के ज़रिए त्वरित समाधान भी सुनिश्चित किया जाता है।
मुख्य घटनाक्रम और आँकड़े
23 जनवरी 2025 से 15 अप्रैल 2026 तक कुल 54 बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। इन बैठकों में प्राप्त 187 प्रकरणों में से 131 मामलों का सफलतापूर्वक निराकरण हो चुका है। शेष मामलों में दस्तावेज़, साक्ष्य एवं संबंधित पक्षों की उपस्थिति के आधार पर विधिसम्मत कार्यवाही और आगामी सुनवाई की प्रक्रिया जारी है।
हाल ही में आयोजित एक बैठक में 10 प्रकरणों की सुनवाई की गई, जिनमें कई जटिल पारिवारिक मसले शामिल थे।
उल्लेखनीय प्रकरण
शमशाबाद क्षेत्र के एक वरिष्ठ नागरिक ने शिकायत की कि उनके बेटे ने प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि निकालकर खर्च कर दी और उनकी ज़मीन पर खेती की जा रही है। पंचायत ने दोनों पक्षों को समझाइश देकर सहमति बनाई, जिसके तहत बेटे ने 15 दिनों के भीतर शेष राशि लौटाने पर सहमति व्यक्त की।
एक अन्य मामले में एक विधवा बुजुर्ग महिला ने अपने बेटे द्वारा डराने-धमकाने और घर के बाहर खड़ी बाइक में आग लगाने की शिकायत दर्ज कराई। मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित अधिकारियों को विधिसम्मत आपराधिक कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
आम जनता पर असर
यह पहल उन बुजुर्गों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जो पारिवारिक दबाव या सामाजिक संकोच के कारण थाने तक नहीं पहुँच पाते। पंचायत का वातावरण अपेक्षाकृत अनौपचारिक और संवेदनशील होने के कारण वरिष्ठ नागरिक अपनी बात खुलकर रख पाते हैं। यह मॉडल अन्य जिलों के लिए भी अनुकरणीय हो सकता है।
आगे की राह
शेष लंबित मामलों में सुनवाई की प्रक्रिया जारी है और पंचायत नियमित अंतराल पर बैठकें आयोजित करती रहेगी। विदिशा पुलिस की यह कोशिश मध्य प्रदेश में वरिष्ठ नागरिक संरक्षण की दिशा में एक नई मिसाल कायम कर रही है।