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पुरुलिया में नकली लॉटरी रैकेट का भंडाफोड़, शक्ति यादव और गणेश साव गिरफ्तार; ₹10.42 लाख नकद बरामद

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पुरुलिया में नकली लॉटरी रैकेट का भंडाफोड़, शक्ति यादव और गणेश साव गिरफ्तार; ₹10.42 लाख नकद बरामद

सारांश

पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में पुलिस ने नकली लॉटरी रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए मुख्य सप्लायर गणेश साव और वितरक शक्ति यादव को गिरफ्तार किया। एक साल से फरार इन आरोपियों के पास से ₹10.42 लाख नकद बरामद हुए। झारखंड से अंतर-राज्यीय कनेक्शन की जाँच जारी है।

मुख्य बातें

पुरुलिया पुलिस ने 16 जून 2026 को नकली लॉटरी रैकेट के दो मुख्य आरोपी शक्ति यादव और गणेश साव को गिरफ्तार किया।
आरोपियों के पास से ₹10.42 लाख नकद बरामद; दोनों एक साल से फरार थे।
दोनों को रघुनाथपुर सब-डिविजनल कोर्ट ने पाँच दिन की पुलिस हिरासत में भेजा।
23 अप्रैल को भी इसी मामले में दो अन्य आरोपी गिरफ्तार हुए थे, तब ₹22,000 नकद और नकली टिकट बरामद हुए थे।
जाँच में पड़ोसी राज्य झारखंड से अंतर-राज्यीय कनेक्शन की संभावना सामने आई है।

पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले की पुलिस ने एक बड़े नकली लॉटरी रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए 16 जून 2026 को दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान शक्ति यादव और गणेश साव के रूप में हुई है, जो क्रमशः नेतुरिया पुलिस स्टेशन क्षेत्र के अमडांगा और रानीपुर गाँव के निवासी हैं। जिले के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

मुख्य घटनाक्रम

पुलिस के अनुसार, गणेश साव इस नकली लॉटरी नेटवर्क का मुख्य सप्लायर था, जबकि शक्ति यादव नेतुरिया क्षेत्र में वितरक के रूप में कार्य करता था। दोनों आरोपी गिरफ्तारी से पहले करीब एक साल से फरार चल रहे थे। एक आरोपी के घर पर की गई तलाशी में ₹10.42 लाख नकद बरामद हुए।

जाँचकर्ताओं को जानकारी मिलने पर पहले गणेश को गिरफ्तार किया गया। उससे हुई पूछताछ के आधार पर नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान हुई, जिसके बाद शक्ति यादव को भी पकड़ा जा सका। दोनों को रघुनाथपुर सब-डिविजनल कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ अदालत ने उन्हें पाँच दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया।

रैकेट की कार्यप्रणाली

पुलिस ने बताया कि आरोपी असली कागज़ी लॉटरी टिकटों जैसे दिखने वाले नकली लॉटरी टिकट छापते थे, जिससे उनमें और असली टिकटों में फर्क कर पाना अत्यंत कठिन होता था। असली टिकटों की तुलना में नकली टिकटों पर विक्रेताओं को काफी अधिक कमीशन दिया जाता था, जो इस रैकेट की मुख्य कड़ी थी। इस प्रकार रैकेट का विस्तार ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में किया गया, ताकि पकड़े जाने की आशंका कम रहे।

शुरुआती जाँच से यह भी सामने आया है कि नकली टिकट एक संगठित डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के ज़रिये स्थानीय विक्रेताओं तक पहुँचाए जाते थे और इस प्रक्रिया में अनजान खरीदारों को ठगा जाता था।

पूर्व कार्रवाई और अंतर-राज्यीय कनेक्शन

गौरतलब है कि 23 अप्रैल को भी इसी मामले में दो अन्य व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया था, जिनके पास से बड़ी संख्या में नकली लॉटरी टिकट और ₹22,000 नकद बरामद हुए थे। उस मामले का मुख्य आरोपी तब से फरार था, जिसे अब इस कार्रवाई में पकड़ा गया है।

अधिकारियों के अनुसार, पुरुलिया जिले में लंबे समय से अवैध लॉटरी का कारोबार चल रहा है। इससे पहले जिला पुलिस और क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) ने कई बार छापेमारी कर अनेक लोगों को गिरफ्तार किया है। जाँच में पड़ोसी राज्य झारखंड से संबंध होने के संकेत मिले हैं और पुलिस ने मौजूदा मामले में भी इसी तरह के अंतर-राज्यीय कनेक्शन की संभावना से इनकार नहीं किया है।

आगे की जाँच

पाँच दिन की पुलिस हिरासत के दौरान दोनों आरोपियों से गहन पूछताछ की जाएगी, जिससे नेटवर्क के अन्य सदस्यों और संभावित अंतर-राज्यीय आपूर्ति श्रृंखला का पर्दाफाश होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो निगरानी तंत्र की सीमाओं को उजागर करता है। झारखंड से संभावित अंतर-राज्यीय कनेक्शन यह सवाल उठाता है कि क्या यह महज़ स्थानीय धोखाधड़ी है या एक व्यापक संगठित अपराध नेटवर्क का हिस्सा। ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में असली जैसे दिखने वाले नकली टिकटों का प्रसार यह भी दर्शाता है कि सबसे कम साक्षर और आर्थिक रूप से कमज़ोर तबका इस ठगी का सबसे बड़ा शिकार बन रहा है।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुरुलिया नकली लॉटरी रैकेट क्या है?
पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले में चल रहा यह रैकेट असली कागज़ी लॉटरी टिकटों जैसे दिखने वाले नकली टिकट छापकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में बेचता था। विक्रेताओं को असली टिकटों से कहीं अधिक कमीशन देकर इस नेटवर्क का विस्तार किया गया था।
इस मामले में किन्हें गिरफ्तार किया गया है?
पुलिस ने मुख्य सप्लायर गणेश साव (रानीपुर गाँव) और वितरक शक्ति यादव (अमडांगा गाँव) को गिरफ्तार किया है। इससे पहले 23 अप्रैल को दो अन्य आरोपी भी इसी मामले में गिरफ्तार हो चुके हैं।
आरोपियों के पास से क्या बरामद हुआ?
एक आरोपी के घर की तलाशी में ₹10.42 लाख नकद बरामद हुए। अप्रैल की कार्रवाई में बड़ी संख्या में नकली लॉटरी टिकट और ₹22,000 नकद भी ज़ब्त किए गए थे।
क्या इस रैकेट का झारखंड से कोई संबंध है?
जाँच में पड़ोसी राज्य झारखंड के लोगों से संबंध होने के संकेत मिले हैं। पुलिस ने मौजूदा मामले में भी अंतर-राज्यीय कनेक्शन की संभावना से इनकार नहीं किया है और इस दिशा में जाँच जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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