3 सितंबर 2026
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पुरुलिया साइबर फ्रॉड रैकेट का भंडाफोड़: ₹82 लाख की ठगी में छह गिरफ्तार, 217 बैंक खाते जब्त

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पुरुलिया साइबर फ्रॉड रैकेट का भंडाफोड़: ₹82 लाख की ठगी में छह गिरफ्तार, 217 बैंक खाते जब्त

सारांश

पुरुलिया में पुलिस ने ₹82 लाख की साइबर ठगी में छह लोगों को गिरफ्तार किया। गिरोह स्थानीय युवाओं के बैंक खाते किराए पर लेकर फ्रॉड की रकम ट्रांसफर करता था। जांच में 217 संदिग्ध खाते सामने आए हैं।

मुख्य बातें

पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में साइबर फ्रॉड रैकेट का भंडाफोड़, छह आरोपी गिरफ्तार ।
कुल ₹82 लाख की ठगी; मुख्य आरोपी श्यामलाल बरन सहिस के खाते में ₹40 लाख जमा मिले।
गिरफ्तार लोगों में सिविल इंजीनियर अंकित सिंह , उसका भाई, झारखंड के दो निवासी और रॉकी बाउरी शामिल।
जांच में 217 बैंक खाते और कई एटीएम काउंटर चिह्नित।
गिरोह स्थानीय युवाओं को किराए का लालच देकर उनके बैंक खाते और एटीएम कार्ड इस्तेमाल करता था।
पुरुलिया साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दो मामले दर्ज; गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी।

पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले में पुलिस ने एक बड़े साइबर फ्रॉड रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए छह लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि इस गिरोह ने कुल ₹82 लाख की धोखाधड़ी को अंजाम दिया था, जिसमें से ₹40 लाख मुख्य आरोपी के बैंक खाते में जमा पाए गए।

मुख्य घटनाक्रम

पुलिस ने सबसे पहले पुरुलिया के बांदवान पुलिस स्टेशन क्षेत्र के धाडका गांव निवासी श्यामलाल बरन सहिस को गिरफ्तार किया। उसके बैंक खाते में ₹40 लाख की संदिग्ध राशि जमा मिली थी। हिरासत में पूछताछ के दौरान उसने साइबर फ्रॉड रैकेट से जुड़े अहम सुराग दिए, जिसके आधार पर पुलिस ने पाँच और आरोपियों को दबोचा।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान

गिरफ्तार किए गए छह लोगों में पुरुलिया शहर निवासी और एक निजी कंपनी में कार्यरत सिविल इंजीनियर अंकित सिंह तथा उसका भाई शामिल हैं। इसके अलावा झारखंड के दो निवासी और पुरुलिया के पारा पुलिस स्टेशन क्षेत्र का युवक रॉकी बाउरी भी गिरफ्त में आए। जांच के अनुसार, इनमें से दो आरोपी झारखंड से आकर पुरुलिया शहर में किराए का मकान लेकर यह रैकेट चला रहे थे।

ठगी का तरीका

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, यह गिरोह स्थानीय युवाओं को घर का किराया देने का लालच देकर उनके बैंक खाते और एटीएम कार्ड किराए पर लेता था। इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम को इधर-उधर करने के लिए किया जाता था। जांच में 217 बैंक खातों और कई एटीएम काउंटरों की पहचान की गई है, जो इस नेटवर्क से जुड़े थे।

पुलिस का विशेष अभियान

पुलिस के अनुसार, साइबर अपराध पर अंकुश लगाने के लिए एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है, जिसके तहत अलग-अलग स्थानों पर स्वतः संज्ञान लेकर मामले दर्ज किए जा रहे हैं। पुरुलिया साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में इस संबंध में दो मामले दर्ज किए गए हैं। सभी गिरफ्तार आरोपियों को पुरुलिया कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ पुलिस ने आगे की जांच के लिए उनकी हिरासत की माँग की।

आगे की जांच

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों से हिरासत में पूछताछ जारी है और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में 'मनी म्यूल' नेटवर्क के ज़रिए साइबर ठगी की घटनाओं में तेज़ी आई है, जहाँ निर्दोष लोगों के खातों का दुरुपयोग किया जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुरुलिया साइबर फ्रॉड मामले में क्या हुआ?
पुरुलिया पुलिस ने ₹82 लाख की साइबर ठगी में शामिल एक रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए छह लोगों को गिरफ्तार किया। मुख्य आरोपी श्यामलाल बरन सहिस के बैंक खाते में ₹40 लाख जमा मिले थे, जिसके बाद जांच आगे बढ़ी।
इस साइबर फ्रॉड रैकेट का तरीका क्या था?
गिरोह स्थानीय युवाओं को घर का किराया देने का लालच देकर उनके बैंक खाते और एटीएम कार्ड किराए पर लेता था। इन खातों का उपयोग साइबर ठगी की रकम ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था। जांच में 217 ऐसे संदिग्ध बैंक खाते चिह्नित किए गए हैं।
गिरफ्तार आरोपी कौन हैं?
गिरफ्तार छह लोगों में पुरुलिया के धाडका गांव निवासी श्यामलाल बरन सहिस, सिविल इंजीनियर अंकित सिंह और उसका भाई, झारखंड के दो निवासी, और पारा पुलिस स्टेशन क्षेत्र के रॉकी बाउरी शामिल हैं।
पुलिस ने इस रैकेट का पर्दाफाश कैसे किया?
पुलिस साइबर अपराध पर विशेष अभियान चला रही थी, जिसके तहत स्वतः संज्ञान लेकर मामले दर्ज किए जा रहे हैं। बैंक खातों की जांच के दौरान श्यामलाल के खाते में ₹40 लाख मिले, उससे पूछताछ के बाद बाकी आरोपी पकड़े गए।
क्या इस मामले में और गिरफ्तारियाँ हो सकती हैं?
पुलिस अधिकारियों के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों से हिरासत में पूछताछ जारी है और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है। पुरुलिया कोर्ट ने पुलिस को आगे की जांच के लिए हिरासत प्रदान की है।
राष्ट्र प्रेस
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