पीवी नरसिम्हा राव की 105वीं जयंती: शिवराज, मनोहर लाल समेत कई नेताओं ने आर्थिक सुधारों के शिल्पकार को किया नमन
सारांश
मुख्य बातें
पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव की 105वीं जयंती पर 28 जून 2026 को देशभर में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। केंद्रीय मंत्रियों से लेकर कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों तक ने भारत के नौवें प्रधानमंत्री और 'भारत रत्न' राव के आर्थिक सुधारों में योगदान को याद किया। 1991–1996 के उनके कार्यकाल को भारत की आर्थिक उदारीकरण की नींव रखने वाला दौर माना जाता है।
केंद्रीय मंत्रियों की श्रद्धांजलि
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक्स पर लिखा, 'भारत के पूर्व प्रधानमंत्री, भारत रत्न पीवी नरसिम्हा राव की जयंती पर कोटि-कोटि नमन करता हूं। देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिखाने और आमजन के जीवन को सरल बनाने के अभिनव प्रयासों के लिए आपको सदैव याद किया जाएगा।'
केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल ने भी पोस्ट कर कहा, 'लोकप्रिय राजनेता व भारत के पूर्व प्रधानमंत्री, भारत रत्न पीवी नरसिम्हा राव की जयंती पर कोटिशः नमन। देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिखाने के अभिनव प्रयासों के लिए आपको सदैव याद किया जाएगा।'
मुख्यमंत्रियों ने भी किया स्मरण
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि देश के विकास में राव का योगदान सदैव स्मरण किया जाएगा। वहीं, सम्राट चौधरी ने लिखा, 'देश के पूर्व प्रधानमंत्री, भारत रत्न पीवी नरसिम्हा राव की जयंती पर उन्हें सादर नमन। देश के आर्थिक सुधारों, दूरदर्शी नेतृत्व एवं राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को सदैव स्मरण किया जाएगा।'
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी राव को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि देश के विकास में उनका योगदान अविस्मरणीय है।
कौन थे पीवी नरसिम्हा राव
पामुलापर्ति वेंकट नरसिम्हा राव का जन्म 28 जून 1921 को तेलंगाना के करीमनगर में हुआ था। उन्होंने 1991 से 1996 तक भारत के नौवें प्रधानमंत्री के रूप में देश का नेतृत्व किया। उनके कार्यकाल में तत्कालीन वित्त मंत्री मनमोहन सिंह के साथ मिलकर किए गए आर्थिक उदारीकरण के फैसलों ने भारत की अर्थव्यवस्था की दिशा बदल दी।
गौरतलब है कि राव एक बहुभाषी विद्वान और कुशल लेखक भी थे। उन्होंने भारत की विदेश नीति को नई धार देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 2024 में उन्हें मरणोपरांत देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से सम्मानित किया गया।
आर्थिक सुधारों की विरासत
यह ऐसे समय में आया है जब भारत की अर्थव्यवस्था वैश्विक चुनौतियों के बीच अपनी राह बना रही है — और 1991 के उदारीकरण की प्रासंगिकता एक बार फिर चर्चा में है। राव के नेतृत्व में लाइसेंस राज की समाप्ति, विदेशी निवेश के द्वार खोलना और बाज़ार-उन्मुख नीतियों को अपनाना — ये कदम आज भी भारत की आर्थिक बुनियाद के स्तंभ माने जाते हैं।
उनकी जयंती पर विभिन्न दलों के नेताओं का एक स्वर में श्रद्धांजलि देना इस बात का संकेत है कि राव की विरासत दलगत सीमाओं से परे है। आने वाले वर्षों में भी उनके सुधारों की चर्चा भारत की आर्थिक नीति-निर्माण में होती रहेगी।