राहुल गांधी को जनता ने बार-बार नकारा: असम के नवनिर्वाचित भाजपा विधायक भूपेन कुमार बोरा
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर तीखा प्रहार करते हुए असम के नवनिर्वाचित भारतीय जनता पार्टी (BJP) विधायक भूपेन कुमार बोरा ने 22 मई को गुवाहाटी में पत्रकारों से कहा कि भारत की जनता ने राहुल गांधी के नेतृत्व को बार-बार अस्वीकार किया है। बोरा ने दावा किया कि कांग्रेस नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ की जा रही टिप्पणियों से अपनी राजनीतिक स्वीकार्यता और घटाते जा रहे हैं।
मुख्य आरोप और बयान
बोरा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राहुल गांधी लंबे समय से देश के प्रधानमंत्री पद की आकांक्षा रखते थे, किंतु भारत की जनता ने उन्हें इस भूमिका के लिए उपयुक्त नहीं समझा। उनके अनुसार, 'राहुल गांधी देश के प्रधानमंत्री बनना चाहते थे, लेकिन देश की जनता उन्हें इस पद पर नहीं चाहती।'
भाजपा विधायक ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटना जनता के उनके नेतृत्व में अटूट विश्वास का प्रमाण है। उनके शब्दों में, 'नरेंद्र मोदी तीन बार इसलिए प्रधानमंत्री बने क्योंकि देश की जनता उन्हें भारत का नेतृत्व करते देखना चाहती थी।'
राहुल गांधी की भाषा पर आपत्ति
बोरा ने राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री के विरुद्ध कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए लहजे और शब्दों की भी आलोचना की। उनका कहना था कि इस तरह की भाषा कांग्रेस नेता की सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुँचा रही है और उन्हें जनता के बीच 'और भी कम स्वीकार्य' बना रही है।
भूपेन बोरा का राजनीतिक सफर
असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (APCC) के पूर्व अध्यक्ष रहे बोरा ने हाल ही में संपन्न असम विधानसभा चुनावों से ठीक पहले कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा था। इस दलबदल ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में व्यापक चर्चा बटोरी थी। भाजपा ने उन्हें बिहपुरिया विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया, जहाँ उन्होंने जीत दर्ज की।
यह ऐसे समय में आया है जब भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने असम विधानसभा चुनाव में निर्णायक जनादेश हासिल किया, जिससे मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में नई सरकार के गठन का मार्ग प्रशस्त हुआ।
राजनीतिक संदर्भ
गौरतलब है कि बोरा का कांग्रेस से भाजपा में आना असम में कांग्रेस के कमजोर होते जनाधार की बड़ी तस्वीर का हिस्सा है। आलोचकों का कहना है कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का इस तरह पाला बदलना कांग्रेस के संगठनात्मक संकट को और गहरा करता है। वहीं, भाजपा इस घटनाक्रम को अपनी बढ़ती स्वीकार्यता के प्रमाण के रूप में प्रस्तुत कर रही है।
आने वाले दिनों में देखना होगा कि राहुल गांधी और कांग्रेस इन हमलों का किस तरह जवाब देते हैं और असम में विपक्ष की भूमिका किस दिशा में जाती है।