राहुल गांधी लोकसभा में विपक्ष नेता बनने योग्य नहीं: कर्नाटक भाजपा नेता आर. अशोक
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता और वरिष्ठ भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता आर. अशोक ने बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को चित्रदुर्ग में कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी लोकसभा में विपक्ष के नेता के पद के योग्य नहीं हैं। अशोक ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी बार-बार चुनाव आयोग और अन्य संवैधानिक एजेंसियों पर सवाल उठाकर संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा को ठेस पहुँचा रहे हैं।
दिल्ली विरोध प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया
नई दिल्ली में चुनाव आयोग के विरुद्ध कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए अशोक ने स्पष्ट किया कि सड़कों पर प्रदर्शन करने से किसी संवैधानिक पदाधिकारी को पद से नहीं हटाया जा सकता। उन्होंने कहा कि संविधान के तहत निर्धारित महाभियोग की प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है।
अशोक ने कहा, 'चुनाव आयोग एक स्वतंत्र और संवैधानिक निकाय है। संविधान के तहत महाभियोग की प्रक्रिया निर्धारित है। यह मनमाने ढंग से नहीं किया जा सकता। संसद का सत्र बुलाया जाना चाहिए, कथित गलती का स्पष्टीकरण दिया जाना चाहिए और राष्ट्रपति को भेजे जाने से पहले प्रस्ताव को बहुमत प्राप्त करना आवश्यक है।'
शिवकुमार पर तुलनात्मक तर्क
अशोक ने अपनी बात को और पुख्ता करते हुए मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा, 'अगर मैं सड़क पर खड़ा होकर यह चिल्लाऊँ कि भ्रष्टाचार और लूटपाट के कारण मुख्यमंत्री शिवकुमार को इस्तीफा देना चाहिए, तो क्या यह संभव होगा? नहीं। यह राज्य विधानसभा में बहुमत के माध्यम से ही संभव हो पाएगा।' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब कांग्रेस चुनाव जीतती है तब राहुल गांधी चुनाव आयोग को कुशल और पारदर्शी मानते हैं, लेकिन हार के बाद उसकी कार्यशैली पर सवाल उठाने लगते हैं।
इस संदर्भ में अशोक ने केरल का उल्लेख किया और कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद हुए चुनावों में कांग्रेस को बहुमत मिला, जबकि BJP तीन सीटें भी नहीं जीत सकी। उन्होंने तर्क दिया कि यदि चुनाव में धांधली होती, तो परिणाम अलग होते।
संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप
अशोक ने राहुल गांधी पर प्रवर्तन निदेशालय (ED), केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) और न्यायपालिका जैसी एजेंसियों पर भी सवाल उठाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 'राहुल गांधी लोकसभा में विपक्ष के नेता बनने के लायक नहीं हैं। उन्होंने कोई संवैधानिक एजेंसी नहीं छोड़ी है। वे कहते हैं कि ED और CBI भाजपा की हैं, और अब वे कह रहे हैं कि चुनाव आयोग भी भाजपा का है। उन्होंने न्यायपालिका पर भी सवाल उठा दिए हैं।'
शिवकुमार की संत-विवाद टिप्पणी पर निशाना
अशोक ने मुख्यमंत्री शिवकुमार की संतों से जुड़ी हालिया टिप्पणी की भी कड़ी आलोचना की। गौरतलब है कि शिवकुमार ने कथित तौर पर कहा था कि वीरशैव और लिंगायत समुदायों के सभी संतों को उनकी सेवा करनी चाहिए, क्योंकि राज्य में उनके हितों की रक्षा करने वाला उनके जैसा कोई नहीं है। अशोक ने कहा, 'उनका बयान वीडियो में मौजूद है। अब वे कह रहे हैं कि बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया। अगर जरा भी शर्म है तो माफी माँगें। मीडिया को दोष देने से कुछ नहीं होगा।'
अशोक ने शिवकुमार को चुनौती दी कि वे ऐसी ही टिप्पणी मुस्लिम धर्मगुरुओं की उपस्थिति में की गई किसी बैठक में करके दिखाएँ। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री हिंदुओं को लक्षित कर बयानबाजी कर रहे हैं और आलोचना होने पर मीडिया को निशाना बनाने की कोशिश करते हैं।
राजनीतिक संदर्भ और आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में कांग्रेस और BJP के बीच राजनीतिक तनाव चरम पर है और चुनाव आयोग को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज़ हो गई है। अशोक की यह टिप्पणी कांग्रेस के उस विरोध प्रदर्शन के ठीक बाद आई है जो दिल्ली में चुनाव आयोग के समक्ष आयोजित किया गया था। राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में यह विवाद और तीखा होने की संभावना है क्योंकि दोनों दल अपने-अपने आरोपों पर अड़े हुए हैं।