7 अक्टूबर 2026
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राहुल गांधी लोकसभा में विपक्ष नेता बनने योग्य नहीं: कर्नाटक भाजपा नेता आर. अशोक

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राहुल गांधी लोकसभा में विपक्ष नेता बनने योग्य नहीं: कर्नाटक भाजपा नेता आर. अशोक

सारांश

कर्नाटक भाजपा नेता आर. अशोक ने राहुल गांधी को लोकसभा में विपक्ष नेता बनने के अयोग्य करार दिया और चुनाव आयोग विरोध प्रदर्शन को संविधान-विरुद्ध बताया। साथ ही CM शिवकुमार की संत-टिप्पणी पर माफी माँगने की माँग की।

मुख्य बातें

अशोक ने 7 अक्टूबर 2026 को चित्रदुर्ग में कहा कि राहुल गांधी लोकसभा में विपक्ष नेता बनने के योग्य नहीं हैं।
अशोक ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने चुनाव आयोग , ED , CBI और न्यायपालिका — सभी संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन को संविधान-विरुद्ध बताया और महाभियोग प्रक्रिया का हवाला दिया।
केरल SIR के बाद हुए चुनावों में कांग्रेस की जीत का उदाहरण देते हुए चुनावी धांधली के आरोपों को खारिज किया।
शिवकुमार की वीरशैव-लिंगायत संतों पर की गई कथित टिप्पणी को लेकर माफी की माँग की और मीडिया को दोष देने की आलोचना की।

कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता और वरिष्ठ भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता आर. अशोक ने बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को चित्रदुर्ग में कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी लोकसभा में विपक्ष के नेता के पद के योग्य नहीं हैं। अशोक ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी बार-बार चुनाव आयोग और अन्य संवैधानिक एजेंसियों पर सवाल उठाकर संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा को ठेस पहुँचा रहे हैं।

दिल्ली विरोध प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया

नई दिल्ली में चुनाव आयोग के विरुद्ध कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए अशोक ने स्पष्ट किया कि सड़कों पर प्रदर्शन करने से किसी संवैधानिक पदाधिकारी को पद से नहीं हटाया जा सकता। उन्होंने कहा कि संविधान के तहत निर्धारित महाभियोग की प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है।

अशोक ने कहा, 'चुनाव आयोग एक स्वतंत्र और संवैधानिक निकाय है। संविधान के तहत महाभियोग की प्रक्रिया निर्धारित है। यह मनमाने ढंग से नहीं किया जा सकता। संसद का सत्र बुलाया जाना चाहिए, कथित गलती का स्पष्टीकरण दिया जाना चाहिए और राष्ट्रपति को भेजे जाने से पहले प्रस्ताव को बहुमत प्राप्त करना आवश्यक है।'

शिवकुमार पर तुलनात्मक तर्क

अशोक ने अपनी बात को और पुख्ता करते हुए मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा, 'अगर मैं सड़क पर खड़ा होकर यह चिल्लाऊँ कि भ्रष्टाचार और लूटपाट के कारण मुख्यमंत्री शिवकुमार को इस्तीफा देना चाहिए, तो क्या यह संभव होगा? नहीं। यह राज्य विधानसभा में बहुमत के माध्यम से ही संभव हो पाएगा।' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब कांग्रेस चुनाव जीतती है तब राहुल गांधी चुनाव आयोग को कुशल और पारदर्शी मानते हैं, लेकिन हार के बाद उसकी कार्यशैली पर सवाल उठाने लगते हैं।

इस संदर्भ में अशोक ने केरल का उल्लेख किया और कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद हुए चुनावों में कांग्रेस को बहुमत मिला, जबकि BJP तीन सीटें भी नहीं जीत सकी। उन्होंने तर्क दिया कि यदि चुनाव में धांधली होती, तो परिणाम अलग होते।

संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप

अशोक ने राहुल गांधी पर प्रवर्तन निदेशालय (ED), केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) और न्यायपालिका जैसी एजेंसियों पर भी सवाल उठाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 'राहुल गांधी लोकसभा में विपक्ष के नेता बनने के लायक नहीं हैं। उन्होंने कोई संवैधानिक एजेंसी नहीं छोड़ी है। वे कहते हैं कि ED और CBI भाजपा की हैं, और अब वे कह रहे हैं कि चुनाव आयोग भी भाजपा का है। उन्होंने न्यायपालिका पर भी सवाल उठा दिए हैं।'

शिवकुमार की संत-विवाद टिप्पणी पर निशाना

अशोक ने मुख्यमंत्री शिवकुमार की संतों से जुड़ी हालिया टिप्पणी की भी कड़ी आलोचना की। गौरतलब है कि शिवकुमार ने कथित तौर पर कहा था कि वीरशैव और लिंगायत समुदायों के सभी संतों को उनकी सेवा करनी चाहिए, क्योंकि राज्य में उनके हितों की रक्षा करने वाला उनके जैसा कोई नहीं है। अशोक ने कहा, 'उनका बयान वीडियो में मौजूद है। अब वे कह रहे हैं कि बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया। अगर जरा भी शर्म है तो माफी माँगें। मीडिया को दोष देने से कुछ नहीं होगा।'

अशोक ने शिवकुमार को चुनौती दी कि वे ऐसी ही टिप्पणी मुस्लिम धर्मगुरुओं की उपस्थिति में की गई किसी बैठक में करके दिखाएँ। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री हिंदुओं को लक्षित कर बयानबाजी कर रहे हैं और आलोचना होने पर मीडिया को निशाना बनाने की कोशिश करते हैं।

राजनीतिक संदर्भ और आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में कांग्रेस और BJP के बीच राजनीतिक तनाव चरम पर है और चुनाव आयोग को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज़ हो गई है। अशोक की यह टिप्पणी कांग्रेस के उस विरोध प्रदर्शन के ठीक बाद आई है जो दिल्ली में चुनाव आयोग के समक्ष आयोजित किया गया था। राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में यह विवाद और तीखा होने की संभावना है क्योंकि दोनों दल अपने-अपने आरोपों पर अड़े हुए हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

वहाँ शिवकुमार की संत-टिप्पणी पर विवाद और चुनाव आयोग बहस को एक साथ जोड़ना भाजपा की दोहरी घेराबंदी की कोशिश दिखाता है। मुख्यधारा की कवरेज इस तथ्य को नज़रअंदाज़ करती है कि ये आरोप-प्रत्यारोप तब और तेज़ होते हैं जब कोई बड़ा चुनाव क्षितिज पर हो।
RashtraPress
7 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आर. अशोक ने राहुल गांधी को विपक्ष नेता के अयोग्य क्यों बताया?
कर्नाटक भाजपा नेता आर. अशोक ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने चुनाव आयोग, ED, CBI और न्यायपालिका जैसी हर संवैधानिक संस्था पर सवाल उठाए हैं, जिससे वे लोकसभा में विपक्ष नेता के पद के अयोग्य हो जाते हैं। उनके अनुसार एक जिम्मेदार विपक्ष नेता को संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखनी चाहिए।
कांग्रेस का चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किस बारे में था?
कांग्रेस ने नई दिल्ली में चुनाव आयोग के कार्यालय के समक्ष विरोध प्रदर्शन आयोजित किया था। अशोक ने इस प्रदर्शन को संविधान-विरुद्ध बताते हुए कहा कि किसी संवैधानिक पदाधिकारी को हटाने के लिए संसद में महाभियोग की निर्धारित प्रक्रिया अपनानी होगी, न कि सड़कों पर प्रदर्शन करना।
शिवकुमार के संत-विवाद में क्या हुआ?
मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कथित तौर पर कहा था कि वीरशैव और लिंगायत समुदायों के सभी संतों को उनकी सेवा करनी चाहिए, क्योंकि राज्य में उनके हितों की रक्षा करने वाला उनके जैसा कोई नहीं। बाद में शिवकुमार ने कहा कि उनके बयान को तोड़-मरोड़ा गया, जिस पर अशोक ने उनसे माफी माँगने की माँग की।
अशोक ने केरल के SIR चुनावों का उल्लेख क्यों किया?
अशोक ने यह तर्क देने के लिए केरल का उदाहरण दिया कि चुनाव आयोग निष्पक्ष है। उन्होंने कहा कि SIR के बाद हुए चुनावों में कांग्रेस को बहुमत मिला जबकि भाजपा तीन सीटें भी नहीं जीत सकी — यदि धांधली होती तो यह संभव नहीं होता।
इस विवाद का कर्नाटक की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा?
यह बयानबाजी कर्नाटक में कांग्रेस और भाजपा के बीच पहले से तनावपूर्ण राजनीतिक माहौल को और गरमाने की संभावना है। शिवकुमार की टिप्पणी और चुनाव आयोग विवाद — दोनों मुद्दों को भाजपा एक साथ उठा रही है, जो आने वाले समय में विपक्षी रणनीति का अहम हिस्सा बन सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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