केंद्र सरकार 'वनवासी' शब्द से आदिवासी पहचान को कमजोर करना चाहती है: राहुल गांधी
सारांश
Key Takeaways
- आदिवासी शब्द का गहरा अर्थ है।
- केंद्र सरकार 'वनवासी' शब्द से पहचान को कमजोर कर रही है।
- आदिवासी समाज का इतिहास बेदखली का है।
- संविधान की रक्षा आवश्यक है।
- आदिवासी जनसंख्या का प्रतिशत लगभग 9-10 है।
वडोदरा, 23 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को वडोदरा में आदिवासी अधिकार संविधान सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि वह आदिवासी शब्द से शुरुआत करना चाहते हैं। आदिवासी शब्द का एक गहरा अर्थ है, क्योंकि यह उस मूल हिंदुस्तान के मालिकों को दर्शाता है। अगर आप यहां दो हजार या तीन हजार साल पहले आते, तो पूरी जमीन आदिवासियों के पास होती।
राहुल गांधी ने आगे कहा कि आदिवासी समाज का इतिहास हमेशा से उनके अधिकारों और भूमि से बेदखली का रहा है। समय के साथ, आदिवासियों को उनकी भूमि से हटा दिया गया और अब 21वीं सदी में “वनवासी” जैसे शब्दों से उनकी पहचान को बदलने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 'वनवासी' शब्द आरएसएस और भाजपा की सोच को दर्शाता है, जबकि “आदिवासी” शब्द यह स्वीकार करता है कि जल, जंगल और जमीन पर मूल अधिकार आदिवासी समाज का है। वनवासी का मतलब यह नहीं है कि आप जंगल में रहते हैं; यह आपकी पहचान को कम करता है।
उन्होंने यह भी कहा कि वनवासी का अर्थ बिरसा मुंडा जी की सोच पर हमला करना है। हम संविधान की रक्षा कर रहे हैं, जिसमें हजारों साल पुरानी सोच है। भाजपा के लोग और पीएम मोदी बिरसा मुंडा जी की प्रतिमा के सामने हाथ जोड़ते हैं, लेकिन उनके विचारों की रक्षा नहीं करते। इस किताब में बिरसा मुंडा जी की आवाज है।
राहुल गांधी ने यह सवाल उठाया कि देश में जमीन किसकी है? जब भी विकास की बात आती है, तो सीधे आदिवासियों की जमीन छीन ली जाती है। जब मैं जाति जनगणना की बात करता हूं, तो आरएसएस, मोदी और भाजपा के लोग मुझ पर हमला करते हैं। पूरा देश जानता है कि लगभग 9-10 प्रतिशत आदिवासी हैं, 15 प्रतिशत दलित हैं, 50 प्रतिशत पिछड़ा वर्ग है, और 15 प्रतिशत अल्पसंख्यक हैं।
उन्होंने कहा कि कुछ साल पहले धूमधाम से बजट पेश किया गया था। 11 अधिकारी खड़े थे और फोटो ली गई थी। मैंने पूछा कि इनमें से 90 प्रतिशत का तो कोई नहीं है। पूरे देश का धन बांटा जा रहा है, लेकिन लाइन में न तो कोई आदिवासी, न दलित, न पिछड़ा नजर आएगा। राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस में आपके लिए बहुत जगह और प्यार है। हम सब संविधान की रक्षा करेंगे। जिस दिन संविधान गायब हो गया, उस दिन आदिवासियों का कुछ नहीं बचेगा।