स्वतंत्रता दिवस समारोह से राहुल गांधी और खड़गे की अनुपस्थिति पर शेखावत बोले — 'लोकतांत्रिक परंपराओं में आस्था ज़रूरी'
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के 15 अगस्त 2026 को लाल किले पर आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में अनुपस्थित रहने पर केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। शेखावत ने कहा कि लोकतांत्रिक परंपराओं में आस्था रखने वाले हर व्यक्ति को ऐसे राष्ट्रीय अवसरों पर उपस्थित रहने का प्रयास करना चाहिए।
शेखावत की सीधी प्रतिक्रिया
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा, 'मैं नहीं जानता कि वो किस कारण से नहीं आए होंगे।' उन्होंने आगे कहा कि लाल किले के स्वतंत्रता दिवस समारोह में उपस्थिति दो बातों की कसौटी है — पहली, इस बड़े दिन के प्रति व्यक्ति का अपना संकल्प और गरिमा-भाव; और दूसरी, लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं एवं परंपराओं में उसकी आस्था।
शेखावत ने कहा, 'लोकतंत्र के इस महत्वपूर्ण पड़ाव पर देश पहुँचा है। 80 वर्ष लोकतंत्र को अंगीकार किए हो चुके हैं — ऐसे में जो वहाँ अपेक्षित हैं, उन्हें वहाँ रहने का प्रयास करना चाहिए।'
स्वतंत्रता की 80वीं वर्षगांठ और 'वंदे मातरम' की 150वीं जयंती
समारोह के महत्व पर प्रकाश डालते हुए शेखावत ने कहा कि यह वर्ष दोहरे उत्सव का अवसर है — देश लाखों बलिदानों के बाद अर्जित स्वतंत्रता की 80वीं वर्षगांठ मना रहा है, और साथ ही राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' की 150वीं जयंती भी। उन्होंने कहा कि 'वंदे मातरम' ने स्वाधीनता संग्राम में देश को एकता के सूत्र में बाँधने का महती कार्य किया था।
विकसित भारत संकल्प और 'सप्त धारा'
शेखावत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर देश आज़ादी के 100 वर्ष पूरे होने तक 'विकसित भारत' बनाने के संकल्प के पाँचवें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने लाल किले की प्राचीर से 'सप्त धारा' — सात अलग-अलग वर्टिकल्स — पर काम करते हुए भारत को आत्मनिर्भर, विकसित और सामर्थ्यशाली बनाने का आह्वान किया।
युवा, महिला और गरीब — प्रधानमंत्री की प्राथमिकताएँ
लाल किले से युवाओं और महिलाओं के लिए की गई घोषणाओं पर शेखावत ने कहा कि प्रधानमंत्री ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि देश की युवाशक्ति, किसान, मातृशक्ति और गरीब उनकी प्राथमिकताएँ हैं। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने महिलाओं की विधायी कार्यों में प्रत्यक्ष भागीदारी बढ़ाने के लिए सभी दलों को एकजुट होकर आगे आने का आह्वान किया।
शेखावत ने देशवासियों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा, 'हम अपने आप को देश को विकसित करने के लिए समर्पित करें।' यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस का केंद्र बन सकता है।