राजस्थान के 14 जिलों की 80 तहसीलें सूखाग्रस्त घोषित, जालौर-जोधपुर सर्वाधिक प्रभावित
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान सरकार ने 26 अक्टूबर 2026 को मानसून में असामान्य रूप से कम वर्षा और खड़ी फसलों को हुए व्यापक नुकसान के मद्देनज़र 14 जिलों की 80 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया है। प्रभावित क्षेत्रों में जोधपुर, जालौर, बाड़मेर, बालोतरा, पाली, डूंगरपुर, जैसलमेर और अन्य जिले शामिल हैं। यह निर्णय आपदा प्रबंधन एवं राहत विभाग द्वारा बहु-आयामी आकलन के बाद लिया गया है।
सूखे की गंभीरता और वर्गीकरण
रविवार को जारी अधिसूचना के अनुसार, प्रभावित तहसीलों को गंभीर रूप से सूखाग्रस्त और मध्यम रूप से सूखाग्रस्त — दो श्रेणियों में विभाजित किया गया है। आपदा प्रबंधन और राहत विभाग ने इस वर्गीकरण के लिए वर्षा की कमी, भूजल स्तर, सतही जल की उपलब्धता और फसल नुकसान जैसे चार प्रमुख मानदंडों का आकलन किया। यह अधिसूचना जारी होने की तारीख से छह माह तक प्रभावी रहेगी, जिस दौरान सूखा राहत से संबंधित समस्त सरकारी प्रावधान लागू रहेंगे।
जिलावार तहसीलों का ब्यौरा
सरकारी अधिसूचना के अनुसार सर्वाधिक प्रभावित जिलों में जोधपुर की 12 तहसीलें, जालौर की 10 तहसीलें, बाड़मेर की 10 तहसीलें, बालोतरा की 9 तहसीलें और पाली की 8 तहसीलें शामिल हैं। इसके अलावा डूंगरपुर और जैसलमेर की 7-7 तहसीलें, फलोदी की 7 तहसीलें, बांसवाड़ा की 3 तहसीलें, ब्यावर और चूरू की 2-2 तहसीलें, बीकानेर की 2 तहसीलें तथा नागौर और सिरोही में एक-एक तहसील को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है।
वर्षा की कमी के आँकड़े
रिपोर्टों के अनुसार, पाली में सामान्य से 58 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई — जो राज्य में सर्वाधिक कमी है। जैसलमेर में 54 प्रतिशत और जालौर में 50 प्रतिशत की कमी रही। बांसवाड़ा में 39 प्रतिशत, सिरोही में 36 प्रतिशत, बालोतरा में 28 प्रतिशत, जोधपुर में 27 प्रतिशत और डूंगरपुर में 24 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई। गौरतलब है कि यह आँकड़े राजस्थान के पश्चिमी और दक्षिण-पश्चिमी जिलों में मानसून की गहरी विफलता को रेखांकित करते हैं।
सरकार की प्रतिक्रिया और राहत उपाय
विधानसभा में मुख्य सचेतक योगेश्वर गर्ग ने कहा कि राज्य के कई हिस्सों में सूखे जैसे हालात बन गए हैं, जिसके चलते सरकार को तत्काल कदम उठाने पड़े। उन्होंने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में चारा डिपो स्थापित किए जाएंगे और किसानों तथा पशुपालकों को हरसंभव सहायता दी जाएगी। गर्ग ने पुष्टि की कि राहत कार्यक्रम में पशुओं के लिए चारे और पानी की समुचित व्यवस्था के साथ-साथ अन्य सरकारी सहायता भी शामिल होगी।
आम जनता और किसानों पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब राजस्थान के किसान पहले से ही बढ़ती इनपुट लागत और अनिश्चित बाज़ार से जूझ रहे हैं। सूखाग्रस्त घोषणा से इन तहसीलों के किसानों को कर्ज माफी, राहत राशि और फसल बीमा दावों में प्राथमिकता मिलने का रास्ता खुल जाता है। पशुपालकों के लिए चारे की कमी विशेष रूप से चिंताजनक है, क्योंकि जैसलमेर और बाड़मेर जैसे जिले परंपरागत रूप से पशुधन-निर्भर अर्थव्यवस्था के केंद्र हैं। आगामी हफ्तों में राहत वितरण की प्रभावशीलता ही इस घोषणा की असली कसौटी होगी।