राजस्थान निकाय चुनाव: भाजपा ने अजमेर, पाली और उदयपुर में मेयर पद जीता; बीकानेर में कांग्रेस की जीत
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान के नगर निकाय चुनावों में 21 सितंबर 2026 को एक चौंकाने वाला राजनीतिक समीकरण सामने आया — भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अजमेर और पाली नगर निगमों में अधिक पार्षद सीटें गँवाने के बावजूद मेयर पद अपने नाम किए। कांग्रेस दोनों निगमों में सबसे बड़ी पार्टी रही, परंतु बहुमत जुटाने में विफल रही और निर्दलीय पार्षदों के समर्थन का लाभ भाजपा ने उठाया। बीकानेर एकमात्र प्रमुख निगम रहा जहाँ कांग्रेस ने अपनी पकड़ बनाए रखी।
अजमेर: कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी, फिर भी भाजपा का मेयर
अजमेर नगर निगम में 80 वार्डों में से कांग्रेस ने 37 सीटें जीतीं और सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जबकि भाजपा को केवल 32 सीटें मिलीं। 11 निर्दलीय पार्षद भी जीते और बहुमत का आँकड़ा 41 था। इसके बावजूद भाजपा की अनामिका शर्मा ने मेयर पद के चुनाव में 43 वोट हासिल कर जीत दर्ज की, जो स्पष्ट करता है कि निर्दलीय पार्षदों का झुकाव भाजपा की ओर रहा।
यह ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस ने माना था कि सबसे बड़े गुट की स्थिति उसे मेयर पद दिलाएगी। गौरतलब है कि निकाय चुनावों में पार्षद संख्या और मेयर चुनाव के नतीजे अलग-अलग हो सकते हैं, जब निर्दलीय पार्षद निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
पाली: निर्दलीय पार्षदों ने पलटा खेल
पाली नगर निगम में कांग्रेस ने 29 सीटें जीतकर सबसे बड़ा गुट बनाया, जबकि भाजपा के पास 21 पार्षद थे। 15 निर्दलीय पार्षदों ने यहाँ भी निर्णायक भूमिका अदा की। भाजपा की नमिता बुबकिया 33 वोटों के साथ मेयर चुनी गईं, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार सुमित्रा जैन को केवल 3 वोट मिले — एक अप्रत्याशित अंतर जो निर्दलीयों के एकमुश्त भाजपा-समर्थन का संकेत देता है।
उदयपुर और अलवर में भाजपा का दबदबा
उदयपुर नगर निगम में भाजपा की स्थिति बेहद मज़बूत रही — पार्टी ने 80 वार्डों में से 53 जीते और स्पष्ट बहुमत के साथ पारस सिंघवी को मेयर पद दिलाया।
अलवर में भाजपा की सुमनलता अग्रवाल ने कांग्रेस उम्मीदवार कमलेश शर्मा को पराजित किया। अग्रवाल को 42 वोट मिले, जबकि शर्मा 23 वोटों पर रुक गए।
बीकानेर में कांग्रेस की जीत, अटरू में शिक्षा मंत्री के भाई की हार
बीकानेर नगर निगम एकमात्र प्रमुख निकाय रहा जहाँ कांग्रेस ने बाज़ी मारी। पार्टी ने 80 वार्डों में से 42 सीटें जीतकर अपने दम पर बहुमत हासिल किया। पूर्व मंत्री बी.डी. कल्ला के भतीजे और कांग्रेस नेता अनिल कल्ला मेयर चुने गए।
बारां ज़िले की अटरू नगरपालिका में कांग्रेस की निशा नैनवाल ने शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के भाई कृष्ण मुरारी दिलावर को तीन वोटों के अंतर से हराया — यह परिणाम राजनीतिक रूप से उल्लेखनीय माना जा रहा है।
बारां ज़िले की अंता नगरपालिका में कांग्रेस उम्मीदवार प्रदीप नागर ने भाजपा उम्मीदवार धनराज चौरसिया को एक वोट के अंतर से हराया — नागर को 18 वोट मिले। दोनों पार्टियों ने 16-16 सीटें जीती थीं, लेकिन दो निर्दलीयों के कांग्रेस-समर्थन ने पलड़ा झुका दिया।
श्री विजयनगर में तनाव: कथित गोलीबारी और अपहरण के आरोप
श्री गंगानगर ज़िले की श्री विजयनगर नगरपालिका में चेयरमैन पद के चुनाव से पहले गंभीर तनाव की खबरें सामने आईं। कांग्रेस समर्थकों और पुलिस के बीच झड़प में कथित तौर पर एक पुलिस अधिकारी के सिर में चोट लगी।
कांग्रेस नेता टीका राम जूली की अतिरिक्त एसपी (ग्रामीण) प्रियंका रघुवंशी से तीखी बहस भी हुई। जूली ने सवाल उठाया कि भाजपा के चेयरमैन पद के उम्मीदवार पूरन चंद मीणा बिना अनुमति बैरिकेड वाले क्षेत्र में कैसे पहुँचे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारी पक्षपातपूर्ण व्यवहार कर रहे हैं।
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि वार्ड 20 के पार्षद मंगतराम, वार्ड 21 के प्यारेलाल और वार्ड 13 के निर्दलीय पार्षद विजय कुमार का अपहरण किया गया है। तीनों के परिवारजन श्री विजयनगर पुलिस स्टेशन पहुँचे और शिकायत दर्ज कराने की माँग की। बाजुवाला रोड पर एक नर्सरी के पास कथित गोलीबारी की खबरें भी आईं। सूचना मिलते ही रायसिंह-नगर के डीएसपी हनुमान सिंह मौके पर पहुँचे और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया।
इस रिपोर्ट के प्रकाशन तक पुलिस या प्रशासन की ओर से गोलीबारी और अपहरण के आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी।
राजस्थान के इन निकाय चुनाव नतीजों ने स्पष्ट किया है कि पार्षद संख्या में बढ़त और नेतृत्व पद पाना दो अलग-अलग बातें हैं — और आने वाले दिनों में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका राज्य की स्थानीय राजनीति का केंद्रीय विषय बनी रहेगी।