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त्योहारी सीजन में साइबर ठगी का अलर्ट: राजस्थान पुलिस ने जारी की एडवाइजरी, नकली लिंक और फर्जी ऑफर से बचें

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त्योहारी सीजन में साइबर ठगी का अलर्ट: राजस्थान पुलिस ने जारी की एडवाइजरी, नकली लिंक और फर्जी ऑफर से बचें

सारांश

त्योहारी सेल के नाम पर साइबर ठगों ने जाल बिछाया है। राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम ब्रांच ने फर्जी लिंक, नकली ऐप और यूपीआई स्कैम से सावधान रहने की सख्त एडवाइजरी जारी की है — क्योंकि 'बिग बिलियन डेज' जैसी सेल का लालच ही सबसे बड़ा हथियार है।

मुख्य बातें

राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम ब्रांच (आर4सी) ने 9 अक्टूबर 2026 को त्योहारी सीजन में साइबर धोखाधड़ी के खिलाफ विस्तृत एडवाइजरी जारी की।
डीजीपी राजीव कुमार शर्मा के निर्देश पर और एडीजी वी.के.
सिंह की अगुवाई में यह एडवाइजरी जारी हुई।
व्हाट्सऐप, एसएमएस या सोशल मीडिया पर मिले अनजान लिंक से खरीदारी न करें; केवल आधिकारिक वेबसाइट और ऐप का उपयोग करें।
यूपीआई पिन केवल भुगतान के लिए होता है — रिफंड या कैशबैक के लिए कभी पिन न डालें और न क्यूआर कोड स्कैन करें।
मोबाइल ऐप केवल गूगल प्ले स्टोर या ऐपल ऐप स्टोर से ही डाउनलोड करें।
ठगी होने पर तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें।

राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम ब्रांच (आर4सी) ने 9 अक्टूबर 2026 को फ्लिपकार्ट की 'बिग बिलियन डेज' और अमेज़न की 'ग्रेट इंडियन फेस्टिवल' जैसी बड़ी ई-कॉमर्स सेल के दौरान बढ़ते साइबर धोखाधड़ी के खतरे को देखते हुए एक विस्तृत सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है। पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कुमार शर्मा के निर्देशों पर जारी यह एडवाइजरी उन लाखों ऑनलाइन खरीदारों के लिए है जो त्योहारी सीजन में भारी छूट के लालच में साइबर अपराधियों के जाल में फंस सकते हैं।

धोखाधड़ी के तरीके

अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (साइबर अपराध) वी.के. सिंह ने बताया कि साइबर अपराधी बड़ी ऑनलाइन सेल के दौरान खरीदारों को भारी छूट, सीमित समय के ऑफर और आकर्षक कैशबैक स्कीम का लालच देकर निशाना बनाते हैं। 'आज ही खरीदें', 'सिर्फ दो मिनट बचे हैं' और 'अभी भुगतान करें वरना ऑफर खत्म हो जाएगा' जैसे संदेश ग्राहकों पर जल्दबाजी में फैसले लेने का दबाव बनाने के लिए डिज़ाइन किए जाते हैं।

ठग नकली वेबसाइट, फर्जी मोबाइल ऐप, संदिग्ध लिंक और धोखाधड़ी वाले पेमेंट तरीकों का इस्तेमाल करते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब त्योहारी सीजन के दौरान ऑनलाइन खरीदारी में भारी उछाल देखा जाता है और साइबर अपराधी इसी का फायदा उठाते हैं।

पुलिस की एडवाइजरी में मुख्य बिंदु

राजस्थान पुलिस ने ऑनलाइन खरीदारों के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव जारी किए हैं। सबसे पहले, केवल भारी छूट का वादा देखकर जल्दबाजी में भुगतान न करें। किसी भी डील की पुष्टि सीधे ई-कॉमर्स कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप पर जाकर करें।

व्हाट्सऐप, एसएमएस या सोशल मीडिया पर मिले अनजान लिंक से खरीदारी करने से पूरी तरह बचें। वेबसाइट डोमेन की सावधानीपूर्वक जांच करें, क्योंकि HTTPS या पैडलॉक आइकन होने का अर्थ हमेशा यह नहीं होता कि वेबसाइट वास्तविक है।

यूपीआई और पेमेंट सुरक्षा

पुलिस ने उपयोगकर्ताओं को विशेष रूप से सचेत किया है कि यूपीआई पिन केवल भुगतान को मंजूरी देने के लिए होता है, पैसे प्राप्त करने के लिए नहीं। रिफंड या कैशबैक पाने के लिए कभी भी अपना पिन दर्ज न करें और न ही क्यूआर कोड स्कैन करें।

मोबाइल ऐप केवल गूगल प्ले स्टोर या ऐपल ऐप स्टोर से ही डाउनलोड करें। गूगल सर्च या सोशल मीडिया पर मिले कस्टमर केयर नंबरों पर भरोसा न करें — इसके बजाय आधिकारिक ऐप और वेबसाइट पर दिए गए सपोर्ट विकल्पों का ही उपयोग करें।

आम जनता पर असर

त्योहारी सीजन में करोड़ों भारतीय ऑनलाइन खरीदारी करते हैं और इस दौरान साइबर धोखाधड़ी के मामलों में तेज बढ़ोतरी देखी जाती है। गौरतलब है कि साइबर अपराध के मामले हर साल त्योहारी सीजन में असाधारण रूप से बढ़ते हैं, क्योंकि खरीदारों की सतर्कता छूट के लालच में कम हो जाती है। सावधानी बरतकर और आधिकारिक प्लेटफॉर्म का उपयोग करके ऐसी धोखाधड़ी का जोखिम काफी हद तक कम किया जा सकता है।

क्या होगा आगे

राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम ब्रांच त्योहारी सीजन के दौरान जागरूकता अभियान जारी रखेगी। यदि कोई व्यक्ति ऑनलाइन ठगी का शिकार होता है, तो उसे तत्काल साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करने और cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करने की सलाह दी गई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सवाल यह है कि क्या केवल जागरूकता अभियान पर्याप्त है जब साइबर ठगों की तकनीक हर साल और परिष्कृत होती जा रही है। त्योहारी सीजन में होने वाली साइबर ठगी के मामलों में वर्षानुवर्ष बढ़ोतरी यह संकेत देती है कि सतर्कता के संदेश अपराध की रफ्तार से पीछे रह जाते हैं। राजस्थान पुलिस को चाहिए कि एडवाइजरी के साथ-साथ नकली वेबसाइटों और फर्जी ऐप की सक्रिय निगरानी और त्वरित टेकडाउन का भी तंत्र मजबूत करे। बिना त्वरित प्रवर्तन कार्रवाई के, ये एडवाइजरियां हर साल जारी होकर एक रस्म बनकर रह जाती हैं।
RashtraPress
10 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजस्थान पुलिस ने त्योहारी सीजन में साइबर ठगी को लेकर क्या चेतावनी दी है?
राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम ब्रांच ने फ्लिपकार्ट 'बिग बिलियन डेज' और अमेज़न 'ग्रेट इंडियन फेस्टिवल' जैसी सेल के दौरान नकली वेबसाइट, फर्जी ऐप और संदिग्ध लिंक के जरिए होने वाली धोखाधड़ी से सावधान रहने की एडवाइजरी जारी की है। पुलिस ने खरीदारों से केवल आधिकारिक प्लेटफॉर्म का उपयोग करने और जल्दबाजी में भुगतान न करने की अपील की है।
ऑनलाइन शॉपिंग के दौरान यूपीआई फ्रॉड से कैसे बचें?
पुलिस के अनुसार, यूपीआई पिन केवल भुगतान करने के लिए होता है, पैसे प्राप्त करने के लिए नहीं। रिफंड या कैशबैक के नाम पर कभी भी यूपीआई पिन दर्ज न करें और न ही अनजान क्यूआर कोड स्कैन करें — यह सीधे आपके खाते से पैसे काटने का तरीका है।
नकली ई-कॉमर्स वेबसाइट की पहचान कैसे करें?
केवल HTTPS या पैडलॉक आइकन देखकर वेबसाइट को असली न मानें — साइबर अपराधी ऐसी सुविधाएं भी नकली साइट पर लगा सकते हैं। वेबसाइट का डोमेन नाम ध्यान से जांचें और किसी भी डील की पुष्टि सीधे ई-कॉमर्स कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप पर जाकर करें।
साइबर ठगी का शिकार होने पर कहाँ शिकायत करें?
ऑनलाइन ठगी का शिकार होने पर तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें और cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। जितनी जल्दी शिकायत दर्ज होगी, धनराशि वापस मिलने की संभावना उतनी अधिक होगी।
फेस्टिवल सेल के दौरान सुरक्षित ऑनलाइन खरीदारी के लिए क्या करें?
केवल आधिकारिक ऐप और वेबसाइट से खरीदारी करें और ऐप केवल गूगल प्ले स्टोर या ऐपल ऐप स्टोर से डाउनलोड करें। व्हाट्सऐप, एसएमएस या सोशल मीडिया पर आए लिंक से खरीदारी न करें और गूगल सर्च पर मिले कस्टमर केयर नंबरों पर आंख मूंदकर भरोसा न करें।
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