राजस्थान में सोशल मीडिया बना राजनीतिक अखाड़ा: गहलोत ने जेन-जी को सुनने की माँग की, भाजपा की इंस्टाग्राम रणनीति तैयार
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान में सोशल मीडिया अब केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रहा — यह एक सक्रिय राजनीतिक युद्धक्षेत्र बन चुका है। 27 जुलाई 2026 को जयपुर से सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (BJP) दोनों ने स्वीकार किया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म जनमत और चुनावी प्रचार को तेज़ी से प्रभावित कर रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सरकार से जेन-जी की आवाज़ें सुनने का आग्रह किया है, जबकि BJP ने संसद सत्र के बाद आगामी स्थानीय निकाय चुनावों से पहले अपनी इंस्टाग्राम उपस्थिति को और मज़बूत करने की योजना बनाई है।
गहलोत का जेन-जी को समर्थन
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि डिजिटल स्पेस पिछले कुछ वर्षों में एक सशक्त मंच के रूप में उभरा है। उन्होंने कहा, 'सोशल मीडिया पर जेन-जी की आवाज़ बुलंद हो गई है। सरकार को इसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए, बल्कि इस पर ध्यान देना चाहिए क्योंकि यह भारत के भविष्य की आवाज़ है।' गहलोत ने भाजपा सरकार के रवैये पर सवाल उठाते हुए यह भी पूछा कि सरकार जेन-जी के छात्रों को गंभीरता से क्यों नहीं ले रही।
भाजपा की इंस्टाग्राम रणनीति
भाजपा प्रवक्ता रामलाल शर्मा ने बताया कि फ़िलहाल पार्टी कार्यकर्ता संसद सत्र की कार्यवाही में व्यस्त हैं। उन्होंने कहा, 'सत्र समाप्त होने के बाद, हम आगामी स्थानीय निकाय चुनावों पर ध्यान केंद्रित करेंगे और अपनी इंस्टाग्राम तथा सोशल मीडिया रणनीति पर भी विचार करेंगे।' गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा की सोशल मीडिया उपस्थिति — विशेष रूप से इंस्टाग्राम पर — को मज़बूत करने पर ज़ोर दिया है, जहाँ राजनीतिक संदेश तेज़ी से युवा और नए मतदाताओं तक पहुँच रहे हैं।
राजस्थान नेताओं की डिजिटल ताक़त
राजस्थान के भाजपा नेताओं में राज्यवर्धन राठौर का इंस्टाग्राम पर सबसे बड़ा जनाधार है — लगभग 19 लाख फॉलोअर्स। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के लगभग 12 लाख फॉलोअर्स हैं, जबकि उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी के करीब 7.41 लाख फॉलोअर्स हैं। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की ऑनलाइन उपस्थिति भी मज़बूत है — उनके लगभग 11 लाख फॉलोअर्स हैं।
कांग्रेस की ओर से अशोक गहलोत के इंस्टाग्राम पर लगभग 10 लाख फॉलोअर्स हैं, जबकि वरिष्ठ नेता सचिन पायलट के करीब 12 लाख फॉलोअर्स हैं। हालाँकि, यह भी तथ्य है कि राज्य के आधे से अधिक मंत्रियों के इंस्टाग्राम पर 50,000 से भी कम फॉलोअर्स हैं — जो दर्शाता है कि डिजिटल पहुँच अभी भी असमान बनी हुई है।
युवा मतदाता और डिजिटल राजनीति का भविष्य
यह बहस ऐसे समय में उठी है जब इंस्टाग्राम राजनीतिक संदेश पहुँचाने का एक प्रमुख माध्यम बन चुका है — खासकर 18 से 25 वर्ष के पहली बार मतदान करने वाले युवाओं के बीच। आलोचकों का कहना है कि जो पार्टियाँ डिजिटल कथा पर नियंत्रण नहीं रख पातीं, वे ज़मीनी स्तर पर भी पिछड़ सकती हैं। राजस्थान में आगामी स्थानीय निकाय चुनाव इस नई डिजिटल रणनीति की पहली असली परीक्षा होंगे।