गहलोत की 50% युवा टिकट मांग पर BJP का पलटवार: 'मोदी के नेतृत्व में पहले से मिल रहा मौका'
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान में आगामी स्थानीय निकाय चुनावों की तैयारियों के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मंगलवार को पार्टी नेतृत्व से मांग की कि निकाय चुनावों में 50 प्रतिशत से अधिक टिकट 'जेन-जी' और युवा उम्मीदवारों को दिए जाएं। इस मांग पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तत्काल पलटवार किया और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में युवाओं को पहले से ही उचित अवसर मिल रहे हैं।
गहलोत की मांग: क्या है पूरा मामला
अशोक गहलोत ने मीडिया से बातचीत में कहा कि देश में युवा बदलाव लाने की कोशिश कर रहे हैं, ऐसे में राजनीति में भी उन्हें उचित अवसर मिलना चाहिए। उनका सुझाव था कि राजस्थान के आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में आधे से ज़्यादा सीटें नई पीढ़ी के हाथों में सौंपी जाएं। यह मांग ऐसे समय में आई है जब देशभर में 'जेन-जी' आंदोलनों और युवा राजनीतिक भागीदारी की चर्चा तेज़ है।
BJP का पलटवार
नई दिल्ली में BJP सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने गहलोत की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'हर पार्टी अपने तरीके से टिकट देती है। जहाँ तक BJP की बात है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पार्टी ने युवाओं, महिलाओं और पार्टी के अन्य वर्गों को उचित जगह दी है और जहाँ भी चुनाव होते हैं, वहाँ इसी आधार पर टिकट दिए जाते हैं।' खंडेलवाल के इस बयान को BJP की सधी हुई राजनीतिक प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है।
कांग्रेस और सपा का समर्थन
लखनऊ में कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने गहलोत की मांग का खुलकर समर्थन किया। उन्होंने कहा, 'जिस तरीके से जेन-जी के आंदोलन हो रहे हैं, भारत में युवाओं की बात चल रही है, तो कांग्रेस पार्टी हमेशा ही युवाओं की बात करती है। अशोक गहलोत की बात को कांग्रेस कार्य समिति (CWC) में रखना चाहिए और यह प्रस्ताव पास किया जाना चाहिए कि 50 प्रतिशत से अधिक टिकट युवाओं को मिलें।'
समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने भी लखनऊ में इस मांग को उचित ठहराया। उन्होंने कहा, 'यह सही मांग है और आगे आने वाले भविष्य को तैयार करने की नींव रखने का समय यही है। हम आगे भी कोशिश करेंगे कि समाजवादी पार्टी भी ज़्यादा से ज़्यादा नए युवाओं को मौका दे और अगले 25-30 साल की राजनीति का आधार यहाँ से ही बनाया जाए।'
राजनीतिक संदर्भ और व्यापक असर
गौरतलब है कि यह बहस केवल राजस्थान तक सीमित नहीं है — देशभर में युवा मतदाताओं की बढ़ती संख्या और उनकी राजनीतिक सक्रियता ने सभी प्रमुख दलों को युवा प्रतिनिधित्व पर पुनर्विचार करने पर मजबूर किया है। यह ऐसे समय में आया है जब 'जेन-जी' पीढ़ी को लेकर वैश्विक स्तर पर भी राजनीतिक विमर्श तेज़ हो रहा है। आलोचकों का कहना है कि केवल मांग उठाने से काम नहीं चलेगा — असली परीक्षा तब होगी जब पार्टियाँ टिकट वितरण में इसे व्यवहार में लाएंगी।
आगे क्या
अब सभी की नज़रें इस पर हैं कि कांग्रेस नेतृत्व गहलोत की इस मांग को CWC में कितनी गंभीरता से लेता है। राजस्थान निकाय चुनावों की तैयारियाँ जैसे-जैसे आगे बढ़ेंगी, युवा टिकट का मुद्दा पार्टी के भीतर और राजनीतिक मंच पर और अधिक केंद्रीय हो सकता है।