राजस्थान शहरी निकाय चुनाव: भीलवाड़ा टिकट पर रामलाल जाट और धीरज गुर्जर में जयपुर वॉर रूम में तीखी भिड़ंत
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान में आगामी शहरी निकाय चुनावों से पहले भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) का अंदरूनी संकट 29 अगस्त 2026 को खुलकर सामने आ गया, जब जयपुर स्थित पार्टी के वॉर रूम में पूर्व मंत्री रामलाल जाट और पूर्व विधायक धीरज गुर्जर के बीच भीलवाड़ा की शहरी निकाय सीटों पर टिकट वितरण को लेकर तीखी नोकझोंक हो गई। स्थिति इतनी बिगड़ी कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली को बीच-बचाव के लिए हस्तक्षेप करना पड़ा।
वॉर रूम में क्या हुआ
पार्टी सूत्रों के अनुसार, बैठक शुरू होते ही दोनों नेताओं के बीच तनाव स्पष्ट था। भीलवाड़ा की सीटों पर उम्मीदवारों के चयन पर मतभेद इतने गहरे थे कि दोनों एक साथ चर्चा करने को भी तैयार नहीं थे। बताया जा रहा है कि रामलाल जाट ने धीरज गुर्जर पर गंभीर टिप्पणियाँ कीं, जबकि गुर्जर ने भी जाट की कार्यशैली पर सवाल उठाए। आसपास के कमरों में मौजूद अन्य नेताओं ने ऊँची आवाज़ें सुनीं और दोनों के बीच का तनाव देखा। वरिष्ठ नेताओं के हस्तक्षेप के बाद ही मामला शांत हो सका।
गुटीय संघर्ष की पृष्ठभूमि
यह विवाद भीलवाड़ा कांग्रेस इकाई के भीतर लंबे समय से चले आ रहे गुटीय टकराव का ताज़ा विस्फोट है। रामलाल जाट को पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का करीबी माना जाता है, जबकि धीरज गुर्जर को सचिन पायलट खेमे से जुड़ा नेता माना जाता है। दोनों के समर्थक स्थानीय राजनीति में पहले भी आमने-सामने आ चुके हैं। यह ऐसे समय में आया है जब पार्टी पहले से ही 2023 के राजस्थान विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार से उबरने की कोशिश कर रही है।
2023 चुनाव में दोनों नेताओं की हार
गौरतलब है कि 2023 के राजस्थान विधानसभा चुनाव में दोनों नेताओं को पराजय का सामना करना पड़ा था। धीरज गुर्जर भीलवाड़ा जिले की सहाड़ा सीट से चुनाव लड़े और भाजपा के गोपीचंद मीणा ने उन्हें महज 580 वोटों के अंतर से हराया। वहीं रामलाल जाट मांडल सीट से मैदान में उतरे थे, जहाँ भाजपा के उदयलाल भड़ाना ने उन्हें 35,878 वोटों के बड़े अंतर से पराजित किया।
पार्टी नेतृत्व की प्रतिक्रिया
घटना के बाद न तो रामलाल जाट और न ही धीरज गुर्जर ने सार्वजनिक रूप से विस्तृत बयान दिया। गुर्जर ने केवल इतना स्वीकार किया कि टिकट वितरण को लेकर मतभेद हैं, लेकिन आगे टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और टीकाराम जूली ने हस्तक्षेप कर मामले को उस दिन के लिए शांत किया, हालाँकि मूल मतभेद अनसुलझे बताए जा रहे हैं।
आगे क्या होगा
नामांकन की अंतिम तारीख नज़दीक आने के साथ कांग्रेस के लिए यह विवाद संगठनात्मक एकजुटता की परीक्षा बन गया है। टिकट के दावेदारों की नाराज़गी और बगावत की आशंकाओं के बीच पार्टी नेतृत्व को भीलवाड़ा समेत पूरे राजस्थान में संतुलन साधने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। यदि असंतोष थमा नहीं, तो विद्रोही उम्मीदवारों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।