4 अगस्त 2026
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राजस्थान कांग्रेस में हाईकमान विवाद: धारीवाल के बयान से गहलोत-पायलट गुटबाजी फिर उभरी

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राजस्थान कांग्रेस में हाईकमान विवाद: धारीवाल के बयान से गहलोत-पायलट गुटबाजी फिर उभरी

सारांश

शांति धारीवाल के एक बयान ने राजस्थान कांग्रेस की वह दरार फिर उघाड़ दी जो 2023 की हार के बाद से ढकी हुई थी। जयपुर की बैठक एकता के बजाय गुटबाजी का मंच बन गई — और पायलट व रंधावा की अनुपस्थिति ने सवालों को और गहरा कर दिया।

मुख्य बातें

वरिष्ठ कांग्रेस नेता शांति धारीवाल ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को राजस्थान कांग्रेस का 'हाईकमान' बताया, जिससे पार्टी में तीखी प्रतिक्रियाएँ आईं।
पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने बयान को खारिज करते हुए कहा, राहुल गांधी ही एकमात्र हाईकमान हैं।
गहलोत ने स्वयं किसी हैसियत का दावा करने से परहेज किया और लीडरशिप के फैसले को कांग्रेस हाईकमान का अधिकार बताया।
मालवीय नगर की पूर्व प्रत्याशी अर्चना शर्मा और हवा महल के पूर्व प्रत्याशी आर.आर.
तिवारी ने विधानसभा चुनावों में पार्टी के भीतर से भीतरघात का आरोप लगाया।
पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट और राज्य प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा नीट विरोध-प्रदर्शन और बैठक से अनुपस्थित रहे।
पंचायत और शहरी स्थानीय निकाय चुनावों की तैयारी के बीच यह आंतरिक कलह कांग्रेस के लिए संगठनात्मक चुनौती बन गई है।

राजस्थान कांग्रेस में 4 अगस्त 2026 को एक बार फिर वही पुरानी दरार खुलकर सामने आई, जब वरिष्ठ कांग्रेस नेता शांति धारीवाल ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को राज्य में पार्टी का 'हाईकमान' करार दिया। इस बयान ने जयपुर में पंचायत और शहरी स्थानीय निकाय चुनावों की तैयारी पर बुलाई गई बैठक को आंतरिक सत्ता-संघर्ष के मंच में बदल दिया। गहलोत-पायलट खेमों के बीच की यह खींचतान अब एक बार फिर संगठन के लिए सिरदर्द बन गई है।

धारीवाल का बयान और पार्टी में हलचल

धारीवाल के बयान ने कांग्रेस के भीतर तीखी प्रतिक्रियाएँ जन्म दीं। हवा महल के पूर्व प्रत्याशी आर.आर. तिवारी ने धारीवाल का खुलकर समर्थन किया और कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी राष्ट्रीय नेतृत्व ज़रूर हैं, लेकिन राजस्थान की ज़मीनी राजनीतिक सच्चाई अलग है। तिवारी के अनुसार, गहलोत अपने संगठनात्मक नेटवर्क, जन-संपर्क और दशकों पुरानी नेतृत्व-क्षमता के कारण राज्य कांग्रेस में प्रभाव के निर्विवाद केंद्र बने हुए हैं।

बैठक में उभरी गुटबाजी

जयपुर में बुलाई गई यह बैठक पार्टी को एकजुट करने की बजाय गुटबाजी का आईना बन गई। समर्थकों ने बार-बार अलग-अलग नेताओं के पक्ष में नारे लगाए। जयपुर जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुनील शर्मा और कांग्रेस विधायक रफीक खान ने कार्यकर्ताओं से व्यक्तित्व-केंद्रित राजनीति से बचने की अपील की। यहाँ तक कि राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भी संगठनात्मक कार्यक्रमों में किसी एक नेता के पक्ष में नारे न लगाने की सलाह दी — फिर भी नारे थमे नहीं, जो इस बात का साफ संकेत है कि पार्टी के भीतर सत्ता की लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई है।

प्रत्याशियों के आरोप और आंतरिक विद्रोह

मालवीय नगर की पूर्व प्रत्याशी अर्चना शर्मा ने खुलेआम आरोप लगाया कि विधानसभा चुनावों के दौरान उनकी सबसे बड़ी लड़ाई भारतीय जनता पार्टी (BJP) के खिलाफ नहीं, बल्कि अपनी ही पार्टी के नेताओं के खिलाफ थी। उनका दावा है कि चुनाव से करीब छह महीने पहले ही उनके विरुद्ध एक साजिश शुरू हो गई थी। आर.आर. तिवारी ने भी अपनी हार का ठीकरा पार्टी के 'जयचंदों' पर फोड़ते हुए कहा कि आधिकारिक उम्मीदवारों के खिलाफ ही भीतरघात किया गया।

गहलोत और खाचरियावास की परस्पर विरोधी प्रतिक्रियाएँ

पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने धारीवाल के बयान को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा, "राहुल गांधी ही हाईकमान हैं। शांति धारीवाल एक वरिष्ठ नेता हैं और कुछ भी कह सकते हैं।" दूसरी ओर, स्वयं गहलोत ने ऐसी किसी हैसियत का दावा करने से परहेज किया। उन्होंने कहा, "यह हमारी जिम्मेदारी बिल्कुल नहीं है। हम ऐसी चीज़ पर चर्चा क्यों करें जो हमारे अधिकार क्षेत्र में नहीं है? यह पूरी तरह से हाईकमान की जिम्मेदारी है।" उन्होंने यह भी बताया कि केंद्रीय नेतृत्व सर्वेक्षण, जनता के सुझाव और संगठनात्मक समीक्षाओं के ज़रिए राज्यों की राजनीतिक स्थिति पर लगातार नज़र रखता है। गहलोत ने कहा, "राहुल गांधी ने टिकट वितरण से जुड़े सर्वेक्षण समेत इन सभी प्रक्रियाओं के लिए एक समर्पित संस्थागत प्रणाली बनाई है।"

पायलट और रंधावा की अनुपस्थिति पर सवाल

गौरतलब है कि पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट जयपुर में नीट पेपर लीक मामले पर कांग्रेस के विरोध-प्रदर्शन से उल्लेखनीय रूप से अनुपस्थित रहे। पार्टी के राज्य प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा भी नदारद रहे, जिससे राज्य नेतृत्व के भीतर समन्वय को लेकर नए अटकलों का दौर शुरू हो गया है। इस बीच, गहलोत ने जोधपुर दौरे के दौरान विश्वास जताया कि "हम अगले विधानसभा चुनाव जीत रहे हैं" और पार्टी कार्यकर्ताओं से एकजुट रहने की अपील की।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उनके समर्थकों के नारे और बयान यही बताते हैं कि ज़मीन पर समीकरण अलग हैं। पायलट और रंधावा की एक साथ अनुपस्थिति संयोग नहीं लगती — यह उस समन्वय-शून्यता का संकेत है जो स्थानीय निकाय चुनावों से ठीक पहले पार्टी को सबसे महँगी पड़ सकती है।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शांति धारीवाल ने गहलोत को 'हाईकमान' क्यों कहा?
धारीवाल ने गहलोत को राजस्थान कांग्रेस का 'हाईकमान' इसलिए बताया क्योंकि उनके अनुसार गहलोत का संगठनात्मक नेटवर्क, जन-संपर्क और दशकों पुरानी नेतृत्व-क्षमता उन्हें राज्य में प्रभाव का केंद्र बनाती है। यह बयान 2023 में सत्ता खोने के बावजूद गहलोत की संगठनात्मक पकड़ को रेखांकित करता है।
राजस्थान कांग्रेस में गहलोत-पायलट गुटबाजी क्या है?
राजस्थान कांग्रेस में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच सत्ता और संगठन पर नियंत्रण को लेकर वर्षों पुरानी प्रतिस्पर्धा है। यह दरार 2023 के विधानसभा चुनावों में भी पार्टी की एकजुटता को कमज़ोर करती रही और अब स्थानीय निकाय चुनावों की तैयारी के बीच फिर उभर आई है।
जयपुर बैठक में क्या हुआ?
4 अगस्त को जयपुर में पंचायत और शहरी स्थानीय निकाय चुनावों की तैयारी पर बुलाई गई बैठक गुटबाजी का मंच बन गई। कार्यकर्ताओं ने अलग-अलग नेताओं के पक्ष में नारे लगाए, जबकि जिला कांग्रेस अध्यक्ष, विधायक और प्रदेश अध्यक्ष सभी ने व्यक्तित्व-केंद्रित राजनीति से बचने की अपील की — जो बेअसर रही।
गहलोत ने हाईकमान विवाद पर क्या कहा?
गहलोत ने किसी भी हैसियत का दावा करने से परहेज किया और स्पष्ट किया कि लीडरशिप के फैसले पूरी तरह कांग्रेस हाईकमान के अधिकार क्षेत्र में हैं। उन्होंने कहा कि केंद्रीय नेतृत्व सर्वेक्षण, जनभावना और संगठनात्मक समीक्षाओं के आधार पर फैसले लेता है।
सचिन पायलट और रंधावा की अनुपस्थिति क्यों चर्चा में है?
पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट जयपुर में नीट पेपर लीक पर कांग्रेस के विरोध-प्रदर्शन से और राज्य प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा भी बैठक से अनुपस्थित रहे। स्थानीय निकाय चुनावों से पहले दोनों की एक साथ गैरमौजूदगी ने राज्य नेतृत्व में समन्वय की कमी को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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