राहुल गांधी के कोटा दौरे में गहलोत-पायलट एक मंच पर, 'यूनाइटेड कलर्स ऑफ कांग्रेस' की तस्वीरें वायरल
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के कोटा दौरे के दौरान 18 जून 2026 को एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने राजस्थान की राजनीति में हलचल मचा दी — पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट एक ही मंच पर मुस्कुराते और बातचीत करते नज़र आए। इन तस्वीरों के साथ-साथ शांति धारीवाल और प्रहलाद गुंजल की एक फ्रेम में मौजूदगी ने सोशल मीडिया पर 'यूनाइटेड कलर्स ऑफ कांग्रेस' का ट्रेंड खड़ा कर दिया।
मुख्य घटनाक्रम
राहुल गांधी के कोटा दौरे पर आयोजित कार्यक्रम में राजस्थान कांग्रेस के कई दिग्गज नेता एक साथ उपस्थित रहे। अशोक गहलोत और सचिन पायलट को मंच पर आपस में हल्के-फुल्के अंदाज़ में बातचीत करते देखा गया — जो उन कार्यकर्ताओं के लिए असाधारण दृश्य था, जो वर्षों से दोनों नेताओं के बीच गहरे मतभेदों के गवाह रहे हैं।
इसी कार्यक्रम में राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा भी मौजूद थे और उन्होंने दोनों वरिष्ठ नेताओं के साथ सहज संवाद किया।
धारीवाल-गुंजल की एक फ्रेम में मौजूदगी
एक अन्य चर्चित तस्वीर में अशोक गहलोत के साथ कोटा के वरिष्ठ कांग्रेस नेता शांति धारीवाल और पूर्व भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता से कांग्रेस में शामिल हुए प्रहलाद गुंजल एक साथ दिखाई दिए। यह तस्वीर इसलिए भी विशेष रूप से चर्चा में है क्योंकि धारीवाल और गुंजल को कोटा की स्थानीय राजनीति में लंबे समय से प्रतिद्वंद्वी माना जाता रहा है।
पार्टी कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया
कांग्रेस कार्यकर्ताओं के एक बड़े वर्ग ने इन तस्वीरों को पार्टी में बढ़ती एकजुटता के संकेत के रूप में व्याख्यायित किया है। यह ऐसे समय में आया है जब राजस्थान में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ धीरे-धीरे शुरू हो रही हैं और पार्टी को संगठनात्मक एकता की सख्त ज़रूरत है।
हालाँकि, कुछ नेताओं ने इसे सिर्फ औपचारिक और सार्वजनिक सौहार्द का हिस्सा बताया है। गौरतलब है कि न गहलोत की ओर से और न ही पायलट की ओर से आपसी रिश्तों को लेकर कोई स्पष्ट राजनीतिक बयान जारी किया गया।
राजस्थान कांग्रेस में गुटबाजी की पृष्ठभूमि
राजस्थान कांग्रेस में गहलोत और पायलट के बीच तनाव कोई नई बात नहीं है। 2020 में पायलट के विद्रोह के बाद से दोनों गुटों के बीच की खाई सार्वजनिक रूप से उजागर हो चुकी थी। 2023 के विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद से यह सवाल और प्रासंगिक हो गया है कि क्या कांग्रेस राजस्थान में एकजुट होकर वापसी कर सकती है।
आगे की राह
राहुल गांधी के इस दौरे को पार्टी के भीतर एकता संदेश देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। कांग्रेस नेतृत्व के लिए असली परीक्षा यह होगी कि क्या यह दृश्यात्मक एकजुटता संगठनात्मक सहयोग में तब्दील हो पाती है — या फिर यह सिर्फ एक कार्यक्रम की तस्वीरों तक सीमित रहती है।