राहुल गांधी कोटा पहुंचे: गहलोत-पायलट एक साथ दिखे, 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में NEET पर बड़ा हमला
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी बुधवार, 17 जून को दोपहर करीब 3:30 बजे चार्टर्ड विमान से कोटा, राजस्थान पहुंचे। वे दशहरा ग्राउंड पर आयोजित 'छात्रों की गूंज' नामक छात्र संवाद कार्यक्रम में भाग लेने के लिए यहाँ आए थे, जो विशेष रूप से छात्रों और युवा प्रतिभागियों के लिए आरक्षित था। उनके इस दौरे की पृष्ठभूमि में NEET पेपर लीक विवाद और दो छात्रों की दुखद मृत्यु की घटनाएँ हैं।
हवाई अड्डे पर स्वागत और गहलोत-पायलट की मुलाकात
कोटा हवाई अड्डे पर राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, विधानसभा में विपक्ष के नेता टीकाराम जुली, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट समेत वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने राहुल गांधी का स्वागत किया। गौरतलब है कि हवाई अड्डे के लाउंज में गहलोत और पायलट एक साथ नज़र आए — हाल की राजनीतिक बयानबाजी के बाद यह उनकी पहली सार्वजनिक मुलाकात थी, जिसे पार्टी एकता का संकेत माना जा रहा है।
काफिले को भारी भीड़ से जूझना पड़ा
हवाई अड्डे परिसर के बाहर उमड़ी भारी भीड़ के कारण राहुल गांधी के काफिले को निकलने में कठिनाई हुई। इसके बाद वे स्टेशन रोड स्थित एक निजी होटल पहुंचे, जहाँ उन्होंने चुनिंदा छात्रों के साथ संक्षिप्त बातचीत की।
छात्र संवाद कार्यक्रम और पवन खेड़ा का बयान
दशहरा ग्राउंड पर 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में प्रवेश केवल सत्यापित रिस्टबैंड और पास धारक छात्रों को ही दिया गया। पार्टी कार्यकर्ताओं को इस कार्यक्रम से दूर रखा गया। कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि यह कार्यक्रम केवल एक संवाद नहीं, बल्कि 'युवाओं की आवाज' है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है और स्पष्ट किया कि ऐसे कृत्यों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
NEET विवाद पर राहुल गांधी का कड़ा रुख
कोटा रवाना होने से पहले राहुल गांधी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि उनके दिल में दो नाम गूंज रहे हैं — उमेश और रिया। उन्होंने कहा कि सीकर में उमेश और देहरादून में रिया — दोनों ने री-NEET मुद्दे के दबाव में अपनी जान दे दी। राहुल गांधी ने लिखा कि 22 और 23 वर्ष की आयु के ये युवा एक अन्यायपूर्ण व्यवस्था के खिलाफ अपनी लड़ाई हार गए। उन्होंने इन मौतों के लिए केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को जिम्मेदार ठहराया और आरोप लगाया कि सरकार ने बार-बार पेपर लीक, परीक्षा कुप्रबंधन और भविष्य के सौदागरों को संरक्षण दिया।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब NEET पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में छात्रों का आक्रोश बढ़ रहा है और विपक्ष संसद से लेकर सड़क तक इस मुद्दे को उठा रहा है। कोटा — जो देश का प्रमुख कोचिंग हब है — को इस आंदोलन का केंद्र बनाना कांग्रेस की रणनीतिक चाल मानी जा रही है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक हलचल और तेज होने की संभावना है।