गहलोत ने राऊत के सुझाव का समर्थन किया: कांग्रेस से बनी पार्टियाँ राहुल गांधी के नेतृत्व में लौटें
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 12 जून 2026 को शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राऊत के उस सुझाव का खुलकर समर्थन किया, जिसमें कहा गया था कि कांग्रेस से अलग होकर बनी क्षेत्रीय पार्टियाँ एक बार फिर पार्टी में वापस लौटें और राहुल गांधी के नेतृत्व को स्वीकार करें। गहलोत ने यह बात विपक्षी एकजुटता और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के संदर्भ में कही।
गहलोत ने राऊत की बात को बताया दमदार
गहलोत ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'संजय राऊत की बात में दम है।' उन्होंने कहा कि जो पार्टियाँ कांग्रेस से अलग होकर बनी हैं, उन्हें इस अहम राजनीतिक मोड़ पर व्यापक राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए पुनः साथ आने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उनके अनुसार, 'पूरे दिल से राहुल गांधी को अपना नेता स्वीकार करना चाहिए।'
इंडिया गठबंधन को चाहिए स्पष्ट नेतृत्व
गहलोत ने कहा कि इंडिया गठबंधन को देश के सामने एक साफ और स्पष्ट नेतृत्व वाला चेहरा पेश करना चाहिए। उनके अनुसार, पूरे देश में यह संदेश जाना चाहिए कि राहुल गांधी इंडिया गठबंधन के नेता हैं। उन्होंने कहा कि आम जनता नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी के बीच सीधा राजनीतिक मुकाबला देखती है, और यदि सभी विपक्षी दल बिना हिचकिचाहट के राहुल गांधी का नेतृत्व स्वीकार कर लें, तो देश में वोटिंग का पैटर्न काफी बदल सकता है।
किन पार्टियों पर लागू नहीं होता यह सुझाव
गहलोत ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी यह बात उन पार्टियों पर लागू नहीं होती जिनकी अपनी स्वतंत्र ऐतिहासिक पहचान रही है। उन्होंने कहा कि शिवसेना, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और समाजवादी पार्टी जैसी पार्टियों की अपनी अलग शुरुआत और परंपराएँ हैं। उन्होंने कहा, 'हमें उनसे कोई शिकायत नहीं है।' यह ऐसे समय में आया है जब इंडिया गठबंधन के भीतर नेतृत्व और समन्वय को लेकर बहस तेज हो रही है।
लोकतंत्र पर खतरे की चेतावनी
लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए गहलोत ने कहा, 'इस देश में लोकतंत्र पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।' उन्होंने कहा कि हालात बेहद चिंताजनक हैं और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करना सभी राजनीतिक ताकतों की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। गौरतलब है कि इस तरह की चेतावनियाँ विपक्षी खेमे से बार-बार उठती रही हैं, विशेषकर चुनावी नतीजों के बाद।
युवाओं से राजनीति में भागीदारी की अपील
गहलोत ने छात्रों और युवा नागरिकों से विचारधारा के आधार पर सार्वजनिक जीवन और राजनीति में सक्रिय रूप से भाग लेने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, 'आने वाली पीढ़ियों का मूल्यांकन इस आधार पर किया जाएगा कि उन्होंने देश के इतिहास के अहम मौकों पर क्या भूमिका निभाई।' उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं को समझें और उस पार्टी से जुड़ें जो राष्ट्रीय हित में काम करती हो। विपक्षी एकता की इस नई बहस का अगला पड़ाव इंडिया गठबंधन की अगली बैठक में स्पष्ट होगा।