23 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

अशोक गहलोत का खुलासा: कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए तैयार था, साजिश ने रोका

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
अशोक गहलोत का खुलासा: कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए तैयार था, साजिश ने रोका

सारांश

अशोक गहलोत ने वर्षों बाद खुलकर कहा — वे कांग्रेस अध्यक्ष बनने से मुकरे नहीं थे, बल्कि एक साजिश ने उन्हें रोका। AICC पर्यवेक्षकों के अचानक आगमन और उसके बाद के 'तमाशे' ने उनकी छवि को नुकसान पहुँचाया, जबकि असली सच्चाई आज भी देश से छुपी है — यही उनकी पीड़ा है।

मुख्य बातें

अशोक गहलोत ने दावा किया कि कांग्रेस नेतृत्व ने उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने का फैसला कर लिया था।
गहलोत के अनुसार AICC पर्यवेक्षकों ( मल्लिकार्जुन खड़गे व अजय माकन ) के अचानक राजस्थान आगमन के बाद हालात बदले।
उन्होंने इसे 'बड़ी कॉन्सपिरेसी' बताया और कहा कि बदनामी उनकी हुई, जबकि वे अध्यक्ष पद के लिए पूरी तरह तैयार थे।
गहलोत ने सोनिया गांधी के सामने खेद व्यक्त किया था, क्योंकि वे विधायक दल के नेता के रूप में प्रस्ताव पास नहीं करवा पाए।
उन्होंने महात्मा गांधी , पंडित नेहरू और सरदार पटेल जैसे पूर्व अध्यक्षों का हवाला देते हुए कहा कि वे इस पद को ठुकराने की सोच भी नहीं सकते थे।

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने 7 जून 2026 को एक बार फिर उस विवादित प्रसंग को सार्वजनिक रूप से उठाया, जब वे कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनते-बनते रह गए थे। गहलोत का दावा है कि पार्टी नेतृत्व ने उन्हें अध्यक्ष बनाने का फैसला कर लिया था, लेकिन एक सुनियोजित साजिश ने पूरी तस्वीर पलट दी।

गहलोत का दावा: अध्यक्ष पद के लिए पूरी तरह तैयार था

गहलोत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए न केवल तैयार थे, बल्कि उत्सुक भी थे। उन्होंने कहा, 'मैं कांग्रेस प्रेसिडेंट बन रहा था। मैं अनपढ़ नहीं हूं। मुझे पता है कांग्रेस प्रेसिडेंट का पद — जहाँ महात्मा गांधी, पंडित नेहरू, मोतीलाल नेहरू, सरदार पटेल जैसे महान नेता अध्यक्ष रहे हों — उस सम्मान के लिए क्या मैं मना करूंगा?' यह बयान उस प्रचलित धारणा को सीधे चुनौती देता है कि गहलोत ने राजस्थान का मुख्यमंत्री पद बचाने के लिए अध्यक्ष बनने से इनकार किया था।

साजिश का आरोप: पर्यवेक्षकों के आने से बदले हालात

गहलोत के अनुसार, जैसे ही अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के पर्यवेक्षक राजस्थान भेजे गए, स्थिति अचानक बदल गई। उन्होंने कहा, 'अचानक ऑब्जर्वर आ गए, अचानक तमाशा हो गया, बदनाम मैं हो गया।' गहलोत ने इसे एक 'बड़ी कॉन्सपिरेसी' करार दिया। उन्होंने मल्लिकार्जुन खड़गे और अजय माकन का नाम लेते हुए कहा कि वे AICC पर्यवेक्षक के रूप में आए थे, और वे विधायक दल की बैठक में प्रस्ताव पास नहीं करवा पाए।

सोनिया गांधी से माफी और चुप्पी की वजह

गहलोत ने बताया कि उन्होंने उस समय सोनिया गांधी के सामने जाकर खेद व्यक्त किया था। उनके शब्दों में, 'मैं विधायक दल का नेता था। पार्टी ने मुझे सब कुछ दिया, फिर भी यह स्थिति बन गई, इसलिए मैंने माफी माँगी।' उन्होंने यह भी कहा कि मीडिया द्वारा फैलाई गई बातों पर वे जानबूझकर चुप रहे, क्योंकि उनकी प्राथमिकता पार्टी नेतृत्व को सच्चाई बताना था।

जनधारणा और गहलोत की पीड़ा

गहलोत ने कहा कि देशभर में यही समझा जाता है कि उन्होंने मुख्यमंत्री बने रहने की चाहत में विद्रोह करवाया। उन्होंने इस पर अफसोस जताते हुए कहा, 'पूरा मुल्क जानता है कि मुझे मुख्यमंत्री रहना था, इसलिए मैंने रिवोल्ट करवा दिया — अब मैं उन्हें कैसे समझाऊं?' यह बयान उनकी उस पीड़ा को उजागर करता है जो वर्षों से उनके साथ जुड़ी सार्वजनिक छवि को लेकर है।

आगे क्या

गहलोत के इस नए बयान से कांग्रेस के भीतरी समीकरणों पर एक बार फिर बहस छिड़ने की संभावना है। यह ऐसे समय में आया है जब पार्टी 2027 के राजस्थान विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी है। गहलोत की यह स्वीकारोक्ति कांग्रेस के आंतरिक लोकतंत्र और नेतृत्व चयन प्रक्रिया पर नए सवाल खड़े करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सवाल यह है कि इसका समय क्यों अभी चुना गया। राजस्थान में अगले विधानसभा चुनाव की आहट के बीच यह खुलासा महज आत्मशुद्धि नहीं लगता — यह कांग्रेस के भीतर अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने की कोशिश भी हो सकती है। साजिश का आरोप गंभीर है, लेकिन गहलोत ने न तो किसी का नाम लिया और न ही कोई दस्तावेज़ी साक्ष्य सामने रखा। जब तक पार्टी की आंतरिक जाँच या किसी अन्य पक्ष की पुष्टि न हो, यह एकपक्षीय आख्यान ही रहेगा — और मुख्यधारा की कवरेज इस अंतर को नज़रअंदाज़ कर रही है।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अशोक गहलोत ने कांग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर क्या नया दावा किया है?
गहलोत ने कहा कि वे कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए पूरी तरह तैयार थे और पार्टी नेतृत्व ने उन्हें चुनने का फैसला भी कर लिया था। उनके अनुसार AICC पर्यवेक्षकों के अचानक राजस्थान आने के बाद एक साजिश के तहत हालात बदल दिए गए और वे अध्यक्ष नहीं बन पाए।
गहलोत ने किन AICC पर्यवेक्षकों का नाम लिया?
गहलोत ने मल्लिकार्जुन खड़गे और अजय माकन का नाम AICC पर्यवेक्षकों के रूप में लिया। उन्होंने कहा कि इन पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में वे विधायक दल की बैठक में प्रस्ताव पास नहीं करवा पाए।
आम जनता में गहलोत की छवि को लेकर क्या धारणा है?
गहलोत के अनुसार देशभर में यह माना जाता है कि उन्होंने राजस्थान का मुख्यमंत्री पद बचाने के लिए जानबूझकर विद्रोह करवाया और अध्यक्ष बनने से मुकर गए। गहलोत इस धारणा को गलत बताते हैं और कहते हैं कि असली सच्चाई अभी भी लोगों से छुपी है।
गहलोत ने सोनिया गांधी से माफी क्यों माँगी थी?
गहलोत ने सोनिया गांधी के सामने इसलिए खेद व्यक्त किया क्योंकि वे उस समय विधायक दल के नेता थे और पार्टी पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में प्रस्ताव पास नहीं करवा सके। उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन्हें सब कुछ दिया था, इसलिए इस स्थिति के लिए उन्होंने जिम्मेदारी महसूस की।
इस विवाद की पृष्ठभूमि क्या है?
कुछ वर्ष पहले कांग्रेस में अध्यक्ष पद का चुनाव हुआ था, जिसमें गहलोत को संभावित उम्मीदवार माना जा रहा था। राजस्थान में पार्टी विधायकों के एक वर्ग के विद्रोह के बाद गहलोत का नाम अध्यक्ष पद की दौड़ से हट गया और अंततः मल्लिकार्जुन खड़गे कांग्रेस अध्यक्ष बने।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले