अशोक गहलोत का खुलासा: कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए तैयार था, साजिश ने रोका
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने 7 जून 2026 को एक बार फिर उस विवादित प्रसंग को सार्वजनिक रूप से उठाया, जब वे कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनते-बनते रह गए थे। गहलोत का दावा है कि पार्टी नेतृत्व ने उन्हें अध्यक्ष बनाने का फैसला कर लिया था, लेकिन एक सुनियोजित साजिश ने पूरी तस्वीर पलट दी।
गहलोत का दावा: अध्यक्ष पद के लिए पूरी तरह तैयार था
गहलोत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए न केवल तैयार थे, बल्कि उत्सुक भी थे। उन्होंने कहा, 'मैं कांग्रेस प्रेसिडेंट बन रहा था। मैं अनपढ़ नहीं हूं। मुझे पता है कांग्रेस प्रेसिडेंट का पद — जहाँ महात्मा गांधी, पंडित नेहरू, मोतीलाल नेहरू, सरदार पटेल जैसे महान नेता अध्यक्ष रहे हों — उस सम्मान के लिए क्या मैं मना करूंगा?' यह बयान उस प्रचलित धारणा को सीधे चुनौती देता है कि गहलोत ने राजस्थान का मुख्यमंत्री पद बचाने के लिए अध्यक्ष बनने से इनकार किया था।
साजिश का आरोप: पर्यवेक्षकों के आने से बदले हालात
गहलोत के अनुसार, जैसे ही अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के पर्यवेक्षक राजस्थान भेजे गए, स्थिति अचानक बदल गई। उन्होंने कहा, 'अचानक ऑब्जर्वर आ गए, अचानक तमाशा हो गया, बदनाम मैं हो गया।' गहलोत ने इसे एक 'बड़ी कॉन्सपिरेसी' करार दिया। उन्होंने मल्लिकार्जुन खड़गे और अजय माकन का नाम लेते हुए कहा कि वे AICC पर्यवेक्षक के रूप में आए थे, और वे विधायक दल की बैठक में प्रस्ताव पास नहीं करवा पाए।
सोनिया गांधी से माफी और चुप्पी की वजह
गहलोत ने बताया कि उन्होंने उस समय सोनिया गांधी के सामने जाकर खेद व्यक्त किया था। उनके शब्दों में, 'मैं विधायक दल का नेता था। पार्टी ने मुझे सब कुछ दिया, फिर भी यह स्थिति बन गई, इसलिए मैंने माफी माँगी।' उन्होंने यह भी कहा कि मीडिया द्वारा फैलाई गई बातों पर वे जानबूझकर चुप रहे, क्योंकि उनकी प्राथमिकता पार्टी नेतृत्व को सच्चाई बताना था।
जनधारणा और गहलोत की पीड़ा
गहलोत ने कहा कि देशभर में यही समझा जाता है कि उन्होंने मुख्यमंत्री बने रहने की चाहत में विद्रोह करवाया। उन्होंने इस पर अफसोस जताते हुए कहा, 'पूरा मुल्क जानता है कि मुझे मुख्यमंत्री रहना था, इसलिए मैंने रिवोल्ट करवा दिया — अब मैं उन्हें कैसे समझाऊं?' यह बयान उनकी उस पीड़ा को उजागर करता है जो वर्षों से उनके साथ जुड़ी सार्वजनिक छवि को लेकर है।
आगे क्या
गहलोत के इस नए बयान से कांग्रेस के भीतरी समीकरणों पर एक बार फिर बहस छिड़ने की संभावना है। यह ऐसे समय में आया है जब पार्टी 2027 के राजस्थान विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी है। गहलोत की यह स्वीकारोक्ति कांग्रेस के आंतरिक लोकतंत्र और नेतृत्व चयन प्रक्रिया पर नए सवाल खड़े करती है।