25 जुलाई 2026
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कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव विवाद: लोकेश शर्मा का गहलोत पर बड़ा हमला, CM पद न छोड़ने की इच्छा का आरोप

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कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव विवाद: लोकेश शर्मा का गहलोत पर बड़ा हमला, CM पद न छोड़ने की इच्छा का आरोप

सारांश

गहलोत के पूर्व ओएसडी लोकेश शर्मा ने खुलासा किया कि 2022 में कांग्रेस अध्यक्ष पद की पेशकश गहलोत को खुद मिली थी — लेकिन वे मुख्यमंत्री पद छोड़ना नहीं चाहते थे। षड्यंत्र का आरोप गलत, 25 सितंबर का घटनाक्रम 'दबाव की राजनीति' था।

मुख्य बातें

पूर्व ओएसडी लोकेश शर्मा ने 9 जून 2026 को अशोक गहलोत पर तथ्यों को तोड़-मरोड़ने का आरोप लगाया।
शर्मा का दावा — कांग्रेस नेतृत्व ने गहलोत को राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की पेशकश की थी, लेकिन गहलोत ने मुख्यमंत्री पद छोड़ने से इनकार किया।
25 सितंबर 2022 के घटनाक्रम को शर्मा ने 'दबाव की राजनीति' और आलाकमान को चुनौती देने की रणनीति बताया।
गहलोत पर आरोप — निर्णयों की समीक्षा के डर से वे राजस्थान में ही बने रहना चाहते थे।
शर्मा ने गहलोत को चुनौती दी कि वे पार्टी से अलग होकर अपनी राजनीतिक ताकत परखें।

राजस्थान की राजनीति में कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव विवाद एक बार फिर केंद्र में आ गया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पूर्व ओएसडी लोकेश शर्मा ने 9 जून 2026 को गहलोत के हालिया बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कई गंभीर आरोप लगाए। शर्मा का कहना है कि गहलोत तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रहे हैं और 25 सितंबर 2022 के राजनीतिक घटनाक्रम को अपने पक्ष में दिखाने की कोशिश कर रहे हैं।

मुख्य आरोप: षड्यंत्र नहीं, खुद की अनिच्छा थी

लोकेश शर्मा ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस नेतृत्व ने स्वयं अशोक गहलोत को राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की पेशकश की थी और उन्हें इसकी पूर्ण जानकारी थी। उन्होंने कहा, "गहलोत यह दावा कर रहे हैं कि उनके खिलाफ कोई राजनीतिक षड्यंत्र रचा गया था, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है। कांग्रेस नेतृत्व ने स्वयं गहलोत को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने की इच्छा जताई थी और उन्हें इसकी पूरी जानकारी थी।"

शर्मा के अनुसार, 25 सितंबर 2022 को गहलोत को कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल करना था, लेकिन उनकी व्यक्तिगत इच्छा इस पद को स्वीकार करने की नहीं थी।

मुख्यमंत्री पद की चाहत और समीक्षा का डर

पूर्व ओएसडी ने दावा किया कि गहलोत ने उस समय खुद कहा था कि उन्हें दिल्ली की राजनीति और वहाँ की कार्यप्रणाली समझ में नहीं आती और वे राजस्थान में रहकर ही काम करना चाहते हैं। शर्मा ने यह भी आरोप लगाया कि "गहलोत को इस बात की चिंता थी कि यदि कोई दूसरा नेता मुख्यमंत्री बन जाता है तो उनके कार्यकाल के दौरान लिए गए निर्णयों और विभिन्न मामलों की समीक्षा हो सकती है।"

गौरतलब है कि 2018 के विधानसभा चुनाव में कम सीटों के बावजूद पार्टी आलाकमान ने गहलोत पर भरोसा जताते हुए उन्हें मुख्यमंत्री बनाया था। शर्मा का आरोप है कि इसके बावजूद गहलोत ने पार्टी नेतृत्व के निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं किया।

25 सितंबर 2022: दबाव की राजनीति का आरोप

लोकेश शर्मा ने 25 सितंबर 2022 के घटनाक्रम को "दबाव की राजनीति" का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा, "उस दिन कांग्रेस आलाकमान द्वारा भेजे गए पर्यवेक्षकों के सामने जो स्थिति बनी, वह पार्टी नेतृत्व के प्रति असहमति का संकेत थी।" उनके अनुसार, उस समय यह संदेश देने की कोशिश की गई कि बड़ी संख्या में विधायक गहलोत के साथ हैं और पार्टी नेतृत्व को उनकी शर्तें माननी चाहिए।

शर्मा ने कहा कि यदि विरोध केवल किसी संभावित नेतृत्व परिवर्तन को लेकर था, तो उसका समाधान पार्टी मंचों पर किया जा सकता था — लेकिन तब आलाकमान को चुनौती देने जैसा माहौल बनाया गया।

आलाकमान को 'षड्यंत्रकारी' बताना निंदनीय: शर्मा

पूर्व ओएसडी ने गहलोत की हालिया टिप्पणियों की कड़ी आलोचना करते हुए कहा, "कांग्रेस आलाकमान को षड्यंत्रकारी बताना अनुचित और निंदनीय है। पार्टी नेतृत्व ने हमेशा गहलोत को सम्मान दिया और लंबे समय तक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ सौंपीं।"

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि गहलोत ने कांग्रेस संगठन से बहुत कुछ हासिल किया, लेकिन संगठन को उतना योगदान नहीं दिया जितनी अपेक्षा की जाती थी।

शर्मा की चुनौती: खुद की ताकत परखें गहलोत

लोकेश शर्मा ने अंत में कहा कि यदि अशोक गहलोत स्वयं को जननायक मानते हैं, तो उन्हें पार्टी से अलग होकर अपनी राजनीतिक ताकत का परीक्षण करना चाहिए — "उन्हें धरातल का पता चल जाएगा।" यह ऐसे समय में आया है जब राजस्थान में कांग्रेस अपने संगठन को पुनर्गठित करने की कोशिश में है और पार्टी के भीतर गुटबाजी की चर्चाएँ थमी नहीं हैं। आने वाले दिनों में गहलोत की प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि यह विवाद और गहरा होता है या शांत पड़ता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उनका समय महत्वपूर्ण है — यह विवाद तब उभरा है जब राजस्थान में कांग्रेस संगठनात्मक पुनर्गठन की कोशिश कर रही है। गहलोत पर 'दबाव की राजनीति' का आरोप पार्टी के भीतर उस गहरी दरार को उजागर करता है जो 2022 से अब तक पूरी तरह नहीं भरी। असली सवाल यह है कि क्या कांग्रेस नेतृत्व इस सार्वजनिक बयानबाजी को अनुशासनात्मक कार्रवाई से रोकेगा, या इसे राजनीतिक संतुलन का हिस्सा मानकर चलने देगा। जब तक आंतरिक विवाद सार्वजनिक मंचों पर सुलझाए जाते रहेंगे, राजस्थान में कांग्रेस की विपक्षी भूमिका कमज़ोर ही रहेगी।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लोकेश शर्मा ने अशोक गहलोत पर क्या आरोप लगाए हैं?
लोकेश शर्मा ने आरोप लगाया है कि गहलोत कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव से जुड़े तथ्यों को गलत तरीके से पेश कर रहे हैं। उनके अनुसार, गहलोत को राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की पेशकश खुद पार्टी नेतृत्व ने की थी, लेकिन गहलोत मुख्यमंत्री पद छोड़ना नहीं चाहते थे।
25 सितंबर 2022 का राजस्थान राजनीतिक संकट क्या था?
25 सितंबर 2022 को कांग्रेस आलाकमान के पर्यवेक्षकों के सामने राजस्थान में बड़ी संख्या में विधायकों ने गहलोत के समर्थन में एकजुटता दिखाई थी, जिसे आलाकमान के निर्देशों के विरुद्ध असहमति के रूप में देखा गया। लोकेश शर्मा इसे गहलोत की 'दबाव की राजनीति' की रणनीति बताते हैं।
गहलोत ने कांग्रेस अध्यक्ष पद क्यों नहीं स्वीकार किया?
लोकेश शर्मा के अनुसार, गहलोत ने खुद कहा था कि उन्हें दिल्ली की राजनीति समझ में नहीं आती और वे राजस्थान में रहकर काम करना चाहते हैं। शर्मा का यह भी आरोप है कि गहलोत को डर था कि नया मुख्यमंत्री उनके कार्यकाल के फैसलों की समीक्षा कर सकता है।
लोकेश शर्मा कौन हैं और गहलोत से उनका क्या संबंध है?
लोकेश शर्मा पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पूर्व ओएसडी (ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी) रहे हैं। वे गहलोत के करीबी सहयोगी माने जाते थे, इसलिए उनके द्वारा लगाए गए आरोप राजनीतिक रूप से अधिक महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
क्या गहलोत ने इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया दी है?
अभी तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अशोक गहलोत की ओर से लोकेश शर्मा के इन नवीनतम आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। गहलोत की प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि यह विवाद आगे और गहरा होता है या नहीं।
राष्ट्र प्रेस
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