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सचिन पायलट के साथ षड्यंत्र हुआ, कांग्रेस की कलह की जड़ राहुल गांधी: आचार्य प्रमोद कृष्णम

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सचिन पायलट के साथ षड्यंत्र हुआ, कांग्रेस की कलह की जड़ राहुल गांधी: आचार्य प्रमोद कृष्णम

सारांश

आचार्य प्रमोद कृष्णम का सीधा आरोप — सचिन पायलट को जानबूझकर मुख्यमंत्री नहीं बनने दिया गया, और इसकी जड़ गहलोत नहीं, राहुल गांधी हैं। पंजाब से राजस्थान तक एक ही पैटर्न: संभावनाशील नेताओं को दबाओ, मोहरों से लड़वाओ।

मुख्य बातें

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने 8 जून को गाजियाबाद में कहा कि सचिन पायलट एक सुनियोजित षड्यंत्र के शिकार हुए हैं।
उनके अनुसार, कांग्रेस की आंतरिक कलह की असली जड़ अशोक गहलोत नहीं, बल्कि राहुल गांधी हैं।
कृष्णम ने अमरिंदर सिंह और सिद्दारमैया को हटाए जाने का हवाला देते हुए पूछा — गहलोत को क्यों नहीं हटाया गया?
पंजाब में अमरिंदर सिंह , नवजोत सिंह सिद्धू और चन्नी के बीच कराई गई बेइज्जती को उसी पैटर्न का हिस्सा बताया।
कृष्णम ने आशंका जताई कि सचिन पायलट को राजस्थान की कमान नहीं सौंपी जाएगी।

धार्मिक-सामाजिक विचारक आचार्य प्रमोद कृष्णम ने 8 जून को गाजियाबाद में कहा कि कांग्रेस नेता सचिन पायलट एक सुनियोजित षड्यंत्र का शिकार हुए हैं और पार्टी की आंतरिक कलह की असली जड़ अशोक गहलोत नहीं, बल्कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी और उनकी टीम ने जानबूझकर गहलोत को मोहरा बनाया ताकि पायलट को मुख्यमंत्री पद से दूर रखा जा सके।

मुख्य आरोप: गहलोत मोहरा, राहुल असली सूत्रधार

कृष्णम ने कहा, 'सचिन पायलट को मुख्यमंत्री नहीं बनाना था, इसीलिए अशोक गहलोत को मोहरा बनाया गया।' उनके अनुसार, राजस्थान में जो राजनीतिक संघर्ष दिखा, वह दिल्ली से संचालित था। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सिद्दारमैया और अमरिंदर सिंह जैसे वरिष्ठ नेताओं को हटाया जा सकता था, तो हाईकमान की बात का उल्लंघन करने के बावजूद गहलोत को बर्खास्त क्यों नहीं किया गया।

पंजाब का उदाहरण: बेइज्जती की राजनीति

कृष्णम ने पंजाब का हवाला देते हुए कहा कि अमरिंदर सिंह की बेइज्जती नवजोत सिंह सिद्धू से कराई गई और फिर सिद्धू की बेइज्जती चरणजीत सिंह चन्नी से। उन्होंने इसे एक रणनीतिक पैटर्न बताया जिसमें नेताओं को एक-दूसरे से लड़वाया जाता है और शीर्ष नेतृत्व दूर खड़ा रहता है। 'ये पानी में आग लगाकर दूर खड़े हो जाते हैं' — यह उनका सीधा आरोप था।

धृतराष्ट्र की उपमा: गहलोत पर तीखा प्रहार

कृष्णम ने अशोक गहलोत की तुलना महाभारत के धृतराष्ट्र से करते हुए कहा कि जिस तरह धृतराष्ट्र पुत्र-मोह में मानसिक रूप से अंधे हो गए थे, उसी तरह गहलोत सत्ता-लोभ में अंधे हो गए हैं। उन्होंने गहलोत को 'सत्ता के लालची व्यक्ति' करार दिया।

पायलट का भविष्य और कांग्रेस की दशा

कृष्णम ने आशंका जताई कि सचिन पायलट को राजस्थान की कमान नहीं सौंपी जाएगी। उनका तर्क था कि जिस नेता में जनाधार और संभावनाएँ दिखती हैं, उसे राहुल गांधी बर्दाश्त नहीं करते। उन्होंने चेतावनी दी कि इसी वजह से राजस्थान, पंजाब और उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पार्टी धीरे-धीरे कमज़ोर होती जा रही है।

कांग्रेस की प्रतिक्रिया

इस बयान पर कांग्रेस की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई। गौरतलब है कि आचार्य प्रमोद कृष्णम कांग्रेस के पूर्व नेता रह चुके हैं और समय-समय पर पार्टी नेतृत्व की आलोचना करते रहे हैं, इसलिए उनके बयान को उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

संपादकीय दृष्टिकोण

पंजाब और उत्तर प्रदेश में पार्टी की सिकुड़ती ज़मीन यह संकेत देती है कि नेतृत्व के फ़ैसले महज़ आंतरिक मामला नहीं रहे — उनका चुनावी मूल्य भी चुका है।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने सचिन पायलट के बारे में क्या कहा?
कृष्णम ने कहा कि सचिन पायलट एक सुनियोजित षड्यंत्र के शिकार हुए हैं और उन्हें जानबूझकर मुख्यमंत्री नहीं बनने दिया गया। उनके अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम में अशोक गहलोत केवल मोहरा थे, असली निर्णय दिल्ली से हुए।
कृष्णम ने राहुल गांधी पर क्या आरोप लगाए?
कृष्णम ने कहा कि राहुल गांधी और उनकी टीम उन नेताओं को बर्दाश्त नहीं करती जिनमें जनाधार और संभावनाएँ हों। उन्होंने राहुल गांधी को कांग्रेस की आंतरिक कलह की 'बुनियाद' बताया।
गहलोत को बर्खास्त न करने पर कृष्णम ने क्या सवाल उठाया?
कृष्णम ने पूछा कि जब सिद्दारमैया और अमरिंदर सिंह को हटाया जा सकता था, तो हाईकमान की बात का उल्लंघन करने वाले गहलोत को क्यों नहीं हटाया गया। उनके अनुसार, यह दोहरा मापदंड इस बात का सबूत है कि पायलट के साथ जानबूझकर अन्याय किया गया।
पंजाब का उदाहरण देकर कृष्णम ने क्या समझाया?
कृष्णम ने कहा कि पंजाब में अमरिंदर सिंह की बेइज्जती नवजोत सिंह सिद्धू से कराई गई और फिर सिद्धू की बेइज्जती चन्नी से — यह एक सोची-समझी रणनीति है जिसमें नेताओं को आपस में लड़वाया जाता है।
क्या सचिन पायलट को राजस्थान की कमान मिलने की उम्मीद है?
कृष्णम के अनुसार, संभावना कम है। उनका कहना था कि जिस नेता में लोग संभावनाएँ देखते हैं, उसे राहुल गांधी और उनकी टीम आगे नहीं बढ़ने देती, इसलिए पायलट को राजस्थान की कमान मिलना मुश्किल है।
राष्ट्र प्रेस
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