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राजनाथ सिंह के बांग्लादेश वाले बयान पर कांग्रेस का तीखा पलटवार, बोले — 'दूसरी आजादी की लड़ाई लड़ रहे हैं'

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राजनाथ सिंह के बांग्लादेश वाले बयान पर कांग्रेस का तीखा पलटवार, बोले — 'दूसरी आजादी की लड़ाई लड़ रहे हैं'

सारांश

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विपक्ष के आंदोलन को बांग्लादेश से प्रेरित बताया, तो कांग्रेस और AAP नेताओं ने मोर्चा खोल दिया। 'दूसरी आजादी की लड़ाई', मताधिकार की चोरी और ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग — यह विवाद अब सीधे चुनावी लोकतंत्र के सवालों तक पहुँच गया है।

मुख्य बातें

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विपक्ष के आंदोलन को बांग्लादेश से प्रेरित बताया, जिस पर विपक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई।
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि वे 'देश की दूसरी आजादी की लड़ाई' लड़ रहे हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की माँग की।
कांग्रेस सांसद मनोज कुमार ने NEET लीक मामले में रक्षा मंत्रालय की विफलता का हवाला देते हुए पलटवार किया।
कांग्रेस नेता उदित राज ने कहा कि संविधान और वोट बचाने की लड़ाई को 'अराजक' कहा जाए तो वे अराजक हैं।
AAP विधायक गोपाल राय ने जंतर-मंतर पर प्रतिबंध हटाने और ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग की।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के उस बयान पर — जिसमें उन्होंने विपक्ष के आंदोलन को बांग्लादेश से प्रेरित बताया — कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के नेताओं ने 16 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में कड़ी प्रतिक्रिया दी। विपक्षी नेताओं ने इस आरोप को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि वे संविधान और मताधिकार की रक्षा के लिए लड़ रहे हैं।

प्रमोद तिवारी का बयान: 'दूसरी आजादी की लड़ाई'

कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा, 'कांग्रेस ऐसा कभी नहीं कहेगी। अगर किसी ने ऐसे विचार व्यक्त किए हैं, तो वे उस व्यक्ति के निजी विचार हो सकते हैं।' उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस संविधान के अनुसार, लोकतांत्रिक तरीकों से सरकार में बदलाव चाहती है।

तिवारी ने आगे कहा, 'हम देश की दूसरी आजादी की लड़ाई लड़ रहे हैं। यह व्यक्तिगत लड़ाई नहीं है। आजादी के बाद संविधान के ज़रिए हमें मताधिकार मिला था, जो आज चोरी से छीना जा रहा है।' उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और बैलेट पेपर से चुनाव कराने की माँग भी दोहराई।

विपक्ष की शांतिपूर्ण लड़ाई का जिक्र करते हुए तिवारी ने कहा कि विपक्ष 'लाठियाँ खाने और छर्रों के हमलों का सामना करने के बावजूद शांति बनाए हुए है।' उन्होंने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन पर लगाई गई रोक को लोकतंत्र पर 'तानाशाही' करार दिया।

1975 का संदर्भ: 'अब 2026 की बात करें'

तिवारी ने रक्षा मंत्री को सीधे संबोधित करते हुए कहा, 'मैं उनसे कहना चाहता हूं कि 1975 की घटना के बाद से कई बार जनादेश मिल चुके हैं। कांग्रेस पार्टी ने संविधान के तहत लगाई गई इमरजेंसी पर अपना पक्ष रखा है और इस पर खेद भी जताया है।' उन्होंने 1975 या 2025 की बजाय 2026 के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया।

मनोज कुमार का हमला: 'भारत बांग्लादेश से भी पीछे'

कांग्रेस सांसद मनोज कुमार ने कहा, 'क्या इसका मतलब यह है कि हम चुप रहें और वोटों की चोरी होने दें?' उन्होंने NEET प्रश्न पत्र लीक का हवाला देते हुए कहा कि हेलीकॉप्टर से प्रश्न पत्र पहुँचाने की ज़िम्मेदारी रक्षा मंत्रालय की थी, फिर भी दिल्ली और पटना में कई लोगों को गिरफ्तार किया गया।

उन्होंने दावा किया कि भारत की आर्थिक स्थिति बांग्लादेश से भी खराब है और सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि 2047 तक 'विश्व गुरु' बनने के सपने देखने से पहले आर्थिक विफलताओं का जवाब देना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति के निजी बयान का दोष राहुल गांधी पर थोपना उचित नहीं है।

उदित राज और किशोर शाहदेव की प्रतिक्रिया

कांग्रेस नेता उदित राज ने कहा, 'देश की रक्षा, वोट की रक्षा और संविधान की रक्षा के लिए लड़ना अगर अराजकता है, तो हम अराजक हैं। चोरी और जिस तरह से वोट डिलीट किए गए हैं, उसे क्या सही ठहराना चाहिए?' उनके इस बयान ने बहस को चुनावी पारदर्शिता के मुद्दे से भी जोड़ दिया।

वहीं किशोर नाथ शाहदेव ने कहा कि पड़ोसी देशों जैसी सत्ता-परिवर्तन की तुलना भाजपा नेता खुद कर रहे हैं। उन्होंने जोड़ा, 'मुझे भारतीय लोकतंत्र, भारत के संविधान, न्याय प्रणाली, मतदाताओं और जनता पर पूरा भरोसा है।'

AAP का आरोप: 'बातचीत की आड़ में दमन'

आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक गोपाल राय ने कहा, 'सरकार बातचीत की बात तो करती है, लेकिन असल में दमन करती है।' उन्होंने जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति देने और संवाद के जरिए समाधान निकालने की माँग की।

राय ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की जनता की माँग का भी उल्लेख किया और आरोप लगाया कि 'पूरी सरकार उन्हें बचाने में लगी हुई है।' यह विवाद ऐसे समय में तेज हुआ है जब चुनावी प्रक्रिया और निर्वाचन आयोग की स्वायत्तता पर बहस पहले से ही गर्म है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो वह राजनीतिक लामबंदी के लिए भावनात्मक कथा बुनता है, लेकिन इससे ज्ञानेश कुमार विवाद या NEET पेपर लीक जैसे ठोस सवालों का जवाब नहीं मिलता। दूसरी तरफ, सरकार का विपक्षी आंदोलन को बाहरी प्रेरणा से जोड़ना — बिना साक्ष्य के — एक खतरनाक राजनीतिक प्रवृत्ति है जो आंतरिक असंतोष को विदेशी साजिश में बदल देती है। जंतर-मंतर पर प्रतिबंध और मुख्य चुनाव आयुक्त पर उठते सवाल — यही वो मुद्दे हैं जिन पर बहस होनी चाहिए, न कि बयानबाजी के इस खेल पर।
RashtraPress
16 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजनाथ सिंह ने विपक्ष के आंदोलन को लेकर क्या कहा था?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आरोप लगाया था कि विपक्ष का आंदोलन बांग्लादेश से प्रेरित है। इसी बयान पर कांग्रेस और AAP नेताओं ने 16 अक्टूबर 2026 को तीखी प्रतिक्रिया दी।
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने 'दूसरी आजादी' से क्या आशय लिया?
प्रमोद तिवारी के अनुसार, आजादी के बाद मिला मताधिकार आज 'चोरी से छीना जा रहा है', इसलिए यह लड़ाई दूसरी आजादी की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह व्यक्तिगत नहीं, संवैधानिक लड़ाई है और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की माँग की।
कांग्रेस ने NEET प्रकरण को इस विवाद से कैसे जोड़ा?
कांग्रेस सांसद मनोज कुमार ने कहा कि NEET प्रश्न पत्र हेलीकॉप्टर से पहुँचाने की जिम्मेदारी रक्षा मंत्रालय की थी, फिर भी दिल्ली और पटना में गिरफ्तारियाँ हुईं। उनका तर्क था कि रक्षा मंत्री को दूसरों पर आरोप लगाने से पहले अपने विभाग की विफलताओं का हिसाब देना चाहिए।
AAP विधायक गोपाल राय की प्रमुख माँगें क्या हैं?
AAP विधायक गोपाल राय ने जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति देने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग की। उन्होंने सरकार पर 'बातचीत की आड़ में दमन' का आरोप भी लगाया।
किशोर नाथ शाहदेव ने भारतीय लोकतंत्र पर क्या कहा?
किशोर नाथ शाहदेव ने कहा कि पड़ोसी देशों जैसी तुलना भाजपा नेता खुद कर रहे हैं, लेकिन उन्हें भारतीय लोकतंत्र, संविधान, न्याय प्रणाली और मतदाताओं पर पूरा भरोसा है। उनका यह बयान भाजपा के आरोप को पलटते हुए भारतीय संस्थाओं में आस्था जताने वाला था।
राष्ट्र प्रेस
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