राजनाथ सिंह: एमएसएमई विकसित भारत की रीढ़, रक्षा क्षेत्र में 16,000 उद्यमों को मिलेंगे नए अवसर
सारांश
मुख्य बातें
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 1 सितंबर 2026 को नोएडा में इंडियन इंडस्ट्री एसोसिएशन के एमएसएमई पुरस्कार समारोह में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को विकसित भारत की मजबूत आर्थिक और रणनीतिक नींव करार दिया। उन्होंने कहा कि भारत के रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (डीपीएसयू) से जुड़े करीब 16,000 एमएसएमई के लिए रक्षा विनिर्माण में असाधारण संभावनाएं हैं।
रक्षा क्षेत्र में एमएसएमई की भूमिका
राजनाथ सिंह ने उद्यमियों से रक्षा क्षेत्र को केवल सरकारी खरीद का बाजार न समझने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट किया कि ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, साइबर सुरक्षा, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स, सेंसर, स्वायत्त प्रणालियाँ, उन्नत सामग्री, अंतरिक्ष और क्वांटम तकनीक जैसे क्षेत्रों में भविष्य की बड़ी संभावनाएं हैं। उन्होंने निजी क्षेत्र को भरोसा दिलाया कि रक्षा तकनीक की ज़रूरत पड़ने पर डीआरडीओ से संपर्क करने में संकोच न करें और किसी भी समस्या पर वे स्वयं भी उपलब्ध रहेंगे।
गुणवत्ता और तकनीकी उन्नयन पर जोर
रक्षा मंत्री ने एमएसएमई के विकास के लिए पाँच प्रमुख क्षेत्रों — गुणवत्ता, कौशल विकास, तकनीकी उन्नयन, बाजार तक पहुँच और वित्त — पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने 'जीरो डिफेक्ट' और 'जीरो कॉम्प्रोमाइज ऑन क्वालिटी' का लक्ष्य अपनाने पर जोर दिया। उनके अनुसार वैश्विक प्रतिस्पर्धी माहौल में केवल अच्छा उत्पाद बनाना पर्याप्त नहीं — उत्पाद को कम लागत में, नई तकनीक से लैस और अंतरराष्ट्रीय बाजार के योग्य बनाना होगा।
अनुसंधान और साझेदारी की अपील
राजनाथ सिंह ने एमएसएमई से अपने टर्नओवर का एक हिस्सा अनुसंधान एवं विकास और तकनीकी उन्नयन में निवेश करने का आग्रह किया। उन्होंने विश्वविद्यालयों, आईआईटी, अनुसंधान संस्थानों, डीआरडीओ प्रयोगशालाओं, स्टार्टअप और बड़ी औद्योगिक इकाइयों के साथ साझेदारी को समय की जरूरत बताया। डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमेशन, एआई और एडवांस्ड प्रोडक्शन टेक्नोलॉजी को एमएसएमई के लिए सुलभ और किफायती बनाने की आवश्यकता पर भी उन्होंने बल दिया।
उत्तर प्रदेश और उत्तर भारत की संभावनाएं
रक्षा मंत्री ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली और हरियाणा में मैन्युफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा, टेक्सटाइल, फूड प्रोसेसिंग और सर्विस सेक्टर में एमएसएमई के मजबूत आधार का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में स्थापित रक्षा औद्योगिक गलियारा नए अवसर लेकर आया है और लखनऊ में करीब ₹2,000 करोड़ के निवेश से रक्षा क्षेत्र से जुड़ी प्रयोगशाला स्थापित करने की योजना है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश भारत के मैन्युफैक्चरिंग और डिफेंस इकोसिस्टम का महत्वपूर्ण केंद्र बनने की दिशा में अग्रसर है।
वैश्विक बाजार और विकसित भारत का लक्ष्य
राजनाथ सिंह ने कहा कि दुनिया तेजी से बदलती वैश्विक सप्लाई चेन के बीच भरोसेमंद मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर की तलाश कर रही है, और यह भारत के लिए बड़ा अवसर है। भारत ने कई वैश्विक साझेदारों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जिनसे एमएसएमई के लिए निर्यात के नए रास्ते खुलेंगे। उन्होंने उद्यमियों से सरकार की क्रेडिट गारंटी, जीएसटी युक्तिकरण और अन्य योजनाओं का लाभ उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि एमएसएमई को घरेलू आपूर्तिकर्ता बनने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि वैश्विक उद्यमी, टेक्नोलॉजी डेवलपर, सिस्टम सप्लायर और निर्यातक के रूप में उभरना होगा। उन्होंने 2047 तक विकसित, समृद्ध, सुरक्षित और सशक्त भारत के निर्माण के लिए उद्योग जगत, युवाओं और उद्यमियों से मिलकर काम करने का आह्वान किया।