27 सितंबर 2026
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राजनाथ सिंह की कड़ी चेतावनी: आतंकवाद को हवा देने वाले देश से बातचीत बंद, भारत हर कार्रवाई के लिए स्वतंत्र

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राजनाथ सिंह की कड़ी चेतावनी: आतंकवाद को हवा देने वाले देश से बातचीत बंद, भारत हर कार्रवाई के लिए स्वतंत्र

सारांश

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सीधे शब्दों में कह दिया — जो देश आतंकवाद को हथियार बनाए, उससे संवाद की कोई गुंजाइश नहीं। SCO में PM मोदी के कड़े संदेश की पृष्ठभूमि में यह बयान भारत की बदली हुई राष्ट्रीय सुरक्षा नीति का सार्वजनिक ऐलान है।

मुख्य बातें

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 27 सितंबर 2026 को कहा — आतंकवाद को हवा देने वाले किसी भी देश से बातचीत की गुंजाइश समाप्त हो जाती है।
SCO बैठक में PM मोदी ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद किसी के लिए भी रणनीतिक संपत्ति नहीं हो सकता।
रक्षा मंत्रालय ने स्टार्टअप और MSME से ₹2,400 करोड़ से अधिक की खरीद और ₹1,500 करोड़ की तकनीक परियोजनाओं को मंजूरी दी।
UP और तमिलनाडु के रक्षा गलियारों में ₹70,000 करोड़ के निवेश प्रस्ताव; ₹10,000 करोड़ का निवेश पूरा।
भारतीय रक्षा उत्पाद अब 100 से अधिक देशों में निर्यात हो रहे हैं।
राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन के तहत सेमीकंडक्टर आपूर्ति शृंखला और खनिज आयात-निर्भरता घटाने पर काम जारी।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 27 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि कोई पड़ोसी देश भारत के खिलाफ आतंकवाद को हवा देता रहेगा, तो उससे किसी भी स्तर पर बातचीत की गुंजाइश स्वयं ही समाप्त हो जाती है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत शांति का पक्षधर है, किंतु शांति और कमज़ोरी में स्पष्ट अंतर है — और राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में देश कोई समझौता नहीं करेगा।

मुख्य घटनाक्रम और बयान

राजनाथ सिंह ने कहा, 'भारत युद्ध नहीं चाहता। भारत किसी देश की ज़मीन पर कब्जा नहीं चाहता। भारत किसी देश को धमकाना नहीं चाहता। लेकिन शांति और कमज़ोरी में अंतर होता है — भारत अपनी सुरक्षा के साथ समझौता नहीं करेगा।' उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक पड़ोसी देश आतंकवाद को राज्य नीति के रूप में अपनाए रखेगा, भारत भी आतंकवाद के खिलाफ हर तरह की कार्रवाई के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है।

SCO बैठक और PM मोदी का संदेश

रक्षा मंत्री ने बताया कि शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की हालिया बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी यही रुख सामने रखा — जो देश आतंकवाद को अपनी नीति का साधन बनाते हैं और आतंकियों को पनाह व समर्थन देते हैं, उन्हें कड़ा संदेश देना होगा। मोदी ने कहा कि आतंकवाद किसी के लिए भी रणनीतिक संपत्ति नहीं हो सकता। यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान संबंध कई मोर्चों पर तनावपूर्ण बने हुए हैं।

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा

राजनाथ सिंह ने रक्षा आत्मनिर्भरता को लेकर कई अहम आँकड़े साझा किए। रक्षा मंत्रालय ने स्टार्टअप और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) से ₹2,400 करोड़ से अधिक की खरीदारी को मंजूरी दी है। इसके अलावा नई तकनीक विकास के लिए ₹1,500 करोड़ से अधिक की परियोजनाएँ स्वीकृत की गई हैं। उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु के रक्षा औद्योगिक गलियारों में अब तक करीब ₹70,000 करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं, जिनमें से लगभग ₹10,000 करोड़ का निवेश वास्तव में हो चुका है।

तकनीकी क्षमता और वैश्विक निर्यात

रक्षा मंत्री के अनुसार, रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) अब केवल एक शोध संस्था नहीं रह गया — यह उद्योगों, विश्वविद्यालयों, स्टार्टअप और वैज्ञानिकों को जोड़ने वाला राष्ट्रीय नवाचार मंच बन चुका है। उन्होंने कहा कि भारत के युवा अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), मानव रहित विमान, रोबोटिकी, क्वांटम तकनीक और साइबर सुरक्षा के क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। आज भारतीय रक्षा उत्पाद 100 से अधिक देशों तक पहुँच रहे हैं — एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और यूरोप सभी इसमें शामिल हैं। सेमीकंडक्टर क्षेत्र में पूरी आपूर्ति शृंखला भारत में विकसित करने और महत्वपूर्ण खनिजों में आयात-निर्भरता घटाने के लिए राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन शुरू किया गया है।

राष्ट्रीय एकता और ग्लोबल साउथ की भूमिका

राजनाथ सिंह ने कहा कि देश की सुरक्षा केवल सीमा पर तैनात सैनिकों की ज़िम्मेदारी नहीं, बल्कि यह समाज का सामूहिक दायित्व है। उन्होंने आग्रह किया कि धर्म, जाति, भाषा या क्षेत्र के आधार पर वैमनस्य समाज को कमज़ोर करता है और राष्ट्रहित को व्यक्तिगत हितों से ऊपर रखना हर नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत ग्लोबल साउथ के हितों को वैश्विक मंचों पर लगातार आगे बढ़ा रहा है और ज़रूरत के समय इन देशों के साथ खड़ा रहता है। आने वाले समय में रक्षा निर्यात और तकनीकी साझेदारी भारत की विदेश नीति का और अधिक अभिन्न हिस्सा बनती दिख रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

भले ही नाम नहीं लिया गया। SCO जैसे बहुपक्षीय मंच पर PM मोदी के बयान के तुरंत बाद रक्षा मंत्री का यह सार्वजनिक दोहराव संकेत देता है कि भारत अब 'रणनीतिक अस्पष्टता' की जगह 'रणनीतिक स्पष्टता' को प्राथमिकता दे रहा है। ₹70,000 करोड़ के निवेश और 100 देशों को निर्यात के आँकड़े प्रभावशाली हैं, लेकिन असली कसौटी यह होगी कि ये गलियारे कितने सत्यापन-योग्य रोज़गार और स्वदेशी तकनीक उत्पन्न कर पाते हैं — महज निवेश-इरादे नहीं, बल्कि ठोस परिणाम।
RashtraPress
27 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजनाथ सिंह ने आतंकवाद और बातचीत पर क्या कहा?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 27 सितंबर 2026 को कहा कि यदि कोई देश भारत के खिलाफ आतंकवाद को हवा देगा तो उससे बातचीत की गुंजाइश स्वतः समाप्त हो जाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक पड़ोसी देश आतंकवाद को राज्य नीति के रूप में अपनाए रखेगा, भारत हर कार्रवाई के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है।
SCO बैठक में PM मोदी ने आतंकवाद पर क्या संदेश दिया?
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक में PM मोदी ने कहा कि जो देश आतंकवाद को अपनी नीति का साधन बनाते हैं और आतंकियों को पनाह देते हैं, उन्हें कड़ा संदेश देना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि आतंकवाद किसी के लिए रणनीतिक संपत्ति नहीं हो सकता।
भारत के रक्षा औद्योगिक गलियारों में कितना निवेश हुआ है?
उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु के रक्षा औद्योगिक गलियारों में अब तक करीब ₹70,000 करोड़ के निवेश प्रस्ताव आए हैं, जिनमें से लगभग ₹10,000 करोड़ का निवेश वास्तव में पूरा हो चुका है।
DRDO की भूमिका में क्या बदलाव आया है?
रक्षा मंत्री के अनुसार DRDO अब केवल रक्षा शोध संस्था नहीं रह गया — यह उद्योगों, विश्वविद्यालयों, स्टार्टअप और वैज्ञानिकों को जोड़ने वाला राष्ट्रीय नवाचार मंच बन चुका है। AI, ड्रोन, रोबोटिकी, क्वांटम तकनीक और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में भारतीय युवा काम कर रहे हैं।
भारत कितने देशों को रक्षा उत्पाद निर्यात कर रहा है?
राजनाथ सिंह के अनुसार आज भारतीय रक्षा उत्पाद 100 से अधिक देशों तक पहुँच रहे हैं — इनमें एशिया और अफ्रीका के साथ-साथ लैटिन अमेरिका और यूरोप के देश भी शामिल हैं।
राष्ट्र प्रेस
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