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राम मंदिर दान विवाद: भाजपा सांसद करण भूषण सिंह बोले — दोषियों को उम्रकैद तक की सजा मिले

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राम मंदिर दान विवाद: भाजपा सांसद करण भूषण सिंह बोले — दोषियों को उम्रकैद तक की सजा मिले

सारांश

राम मंदिर दान विवाद पर भाजपा सांसद करण भूषण सिंह ने साफ कहा — जाँच निष्पक्ष हो, एफआईआर में देरी इसलिए कि कोई बच न सके, और दोषियों को उम्रकैद तक की सजा मिले। श्रद्धालुओं की आस्था से खिलवाड़ को उन्होंने अत्यंत निंदनीय करार दिया।

मुख्य बातें

भाजपा सांसद करण भूषण सिंह ने 18 जून को गोंडा में राम मंदिर दान विवाद पर कड़ा रुख अपनाया।
उन्होंने कहा कि एफआईआर में देरी का कारण यह है कि सभी दोषियों की जिम्मेदारी एक साथ तय हो — कोई भी बचने न पाए।
दोषियों के लिए उम्रकैद या अन्य कठोर दंड की माँग की।
राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े पुराने लोगों को मंदिर प्रबंधन में बनाए रखने की वकालत की।
श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े दान की चोरी को अत्यंत निंदनीय बताया।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद करण भूषण सिंह ने 18 जून को गोंडा में राम मंदिर दान विवाद पर अपनी स्पष्ट प्रतिक्रिया दी और कहा कि इस मामले में जाँच पूरी निष्पक्षता के साथ होनी चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जो भी दोषी पाया जाए, उसे उम्रकैद या किसी अन्य कठोर दंड से कम कुछ नहीं मिलना चाहिए।

मंदिर प्रबंधन और पुराने लोगों की भूमिका

राम मंदिर से जुड़े प्रबंधन पर करण भूषण सिंह ने कहा कि यह तय करना संबंधित लोगों का अधिकार है कि व्यवस्था में कौन बना रहेगा और कौन नहीं। उन्होंने हालाँकि यह भी जोड़ा कि जो लोग राम जन्मभूमि आंदोलन के समय से जुड़े रहे हैं और जिन्होंने ढाँचा गिराए जाने के बाद भी मंदिर का रखरखाव और प्रबंधन किया, उन्हें भी बनाए रखा जाना चाहिए।

सांसद ने कहा कि दशकों तक इस मंदिर और उससे जुड़े कार्यों का प्रबंधन सही ढंग से किया गया है, और इस योगदान को नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए।

एफआईआर में देरी पर सरकार का पक्ष

विपक्ष की ओर से एफआईआर दर्ज होने में देरी पर उठाए जा रहे सवालों के जवाब में करण भूषण सिंह ने कहा कि यह मुद्दा वे बुधवार को भी मीडिया के सामने रख चुके हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि देरी का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल एक व्यक्ति को दोषी ठहराकर बाकी शामिल लोगों को बचने का मौका न मिले।

उन्होंने कहा, 'एफआईआर इसलिए देर से हो रही है, क्योंकि सरकार चाहती है कि जो भी इस मामले में शामिल हैं, उनकी पूरी जिम्मेदारी तय हो — सिर्फ एक को बलि का बकरा बनाकर बाकी न बच सकें।'

श्रद्धालुओं की भावनाओं पर तीखी टिप्पणी

सांसद ने श्रद्धालुओं की भावनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि अगर कोई व्यक्ति आस्था और विश्वास के साथ भगवान को चढ़ावा चढ़ाता है और कोई उसे चुरा ले, तो यह अत्यंत निंदनीय कृत्य है। उन्होंने कहा, 'ऐसे लोगों के साथ कोई नरमी नहीं होनी चाहिए।'

यह ऐसे समय में आया है जब राम मंदिर दान विवाद को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार और मंदिर ट्रस्ट पर लगातार सवाल उठाए हैं। गौरतलब है कि यह मामला देश की सबसे संवेदनशील धार्मिक संस्थाओं में से एक से जुड़ा है, जिससे इसकी राजनीतिक और सामाजिक अनुगूँज और अधिक गहरी हो जाती है।

आगे क्या होगा

करण भूषण सिंह ने भरोसा जताया कि सरकार इस दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रही है और जाँच आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि दोषियों को हर हाल में कड़ी सजा मिलेगी — चाहे वह उम्रकैद हो या कोई अन्य कठोर दंड। मामले की निष्पक्ष जाँच और जवाबदेही सुनिश्चित करने का आश्वासन उन्होंने दोहराया।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन विपक्ष इसे संरक्षण की रणनीति के रूप में पेश कर रहा है। असली सवाल यह है कि जाँच एजेंसी की स्वतंत्रता और मंदिर ट्रस्ट की जवाबदेही का ढाँचा क्या होगा — क्योंकि बिना पारदर्शी तंत्र के, 'सख्त कार्रवाई' के आश्वासन महज़ बयानबाज़ी बनकर रह जाते हैं।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर दान विवाद क्या है?
राम मंदिर दान विवाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को मिले चढ़ावे और दान के कथित दुरुपयोग से जुड़ा मामला है। श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान में अनियमितताओं के आरोप लगे हैं, जिस पर जाँच की माँग उठ रही है।
एफआईआर दर्ज होने में देरी क्यों हो रही है?
भाजपा सांसद करण भूषण सिंह के अनुसार, एफआईआर में देरी इसलिए है ताकि केवल एक व्यक्ति को दोषी ठहराकर बाकी शामिल लोगों को बचने का मौका न मिले। सरकार चाहती है कि सभी दोषियों की जिम्मेदारी एक साथ तय हो।
करण भूषण सिंह ने दोषियों के लिए क्या सजा की माँग की?
उन्होंने कहा कि दोषियों को उम्रकैद या किसी अन्य कठोर दंड से कम कुछ नहीं मिलना चाहिए। उनका कहना था कि इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाना चाहिए।
राम मंदिर प्रबंधन में पुराने लोगों की भूमिका पर क्या कहा गया?
करण भूषण सिंह ने कहा कि राम जन्मभूमि आंदोलन के समय से जुड़े और मंदिर का रखरखाव करने वाले लोगों को प्रबंधन में बनाए रखा जाना चाहिए। उन्होंने स्वीकार किया कि व्यवस्था में कौन रहेगा यह संबंधित लोगों का फैसला है।
इस विवाद का आम श्रद्धालुओं पर क्या असर है?
सांसद ने कहा कि जो लोग आस्था और विश्वास के साथ भगवान को चढ़ावा चढ़ाते हैं, उनकी भावनाओं के साथ यह धोखा अत्यंत निंदनीय है। यह विवाद लाखों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं से सीधे जुड़ा है।
राष्ट्र प्रेस
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