राम मंदिर सेवक ध्रुवेश मिश्रा ने लौटाई ₹20 लाख की हीरे जड़ी सोने की चेन, चढ़ावा विवाद के बीच ईमानदारी की मिसाल
सारांश
मुख्य बातें
अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे और कीमती सामान की कथित चोरी को लेकर चल रहे विवाद के बीच, मंदिर सेवक ध्रुवेश मिश्रा की ईमानदारी की एक कहानी ने स्थानीय लोगों और तीर्थयात्रियों का दिल जीत लिया है। शनिवार को मिश्रा को हनुमानगढ़ी की ओर जाने वाली सड़क पर लगभग ₹20 लाख मूल्य की हीरे जड़ी सोने की चेन मिली, जिसे उन्होंने तुरंत पुलिस के माध्यम से उसके असली मालिक तक पहुँचाया।
कैसे मिली चेन और क्या हुआ आगे
राम जन्मभूमि मंदिर में सेवक के रूप में कार्यरत ध्रुवेश मिश्रा को शनिवार को हनुमानगढ़ी मार्ग पर हीरे जड़ी सोने की चेन पड़ी मिली। चेन की अनुमानित बाज़ार कीमत लगभग ₹20 लाख बताई जाती है। इसे वापस करने के दृढ़ इरादे से मिश्रा सीधे पुलिस आयोग कार्यालय पहुँचे और एक सार्वजनिक घोषणा करवाई, ताकि चेन का असली मालिक सामने आ सके।
मालकिन की पहचान और भावुक पुनर्मिलन
सार्वजनिक घोषणा के बाद मुजफ्फरनगर की श्रद्धालु निर्मला देवी, जो मोहन कुमार की पत्नी हैं, चेन पर दावा करने के लिए आगे आईं। पुलिसकर्मियों की उपस्थिति में आवश्यक पूछताछ और सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद रविवार को चेन उन्हें सौंप दी गई। चेन वापस मिलने पर निर्मला देवी भावुक हो उठीं और उन्होंने बताया कि यह गहना उनके दिवंगत पति की यादगार निशानी है — इसलिए इसका भावनात्मक मूल्य इसके मौद्रिक मूल्य से कहीं अधिक है।
विवादों के बीच ईमानदारी की रोशनी
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब अयोध्या का राम मंदिर कई विवादों से घिरा हुआ है। मंदिर के दान-चढ़ावे की कथित चोरी और नकद राशि के दुरुपयोग के आरोप हाल के दिनों में चर्चा में रहे हैं। चढ़ावे की गिनती और उसके प्रबंधन को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे माहौल में ध्रुवेश मिश्रा का यह कदम न केवल व्यक्तिगत ईमानदारी का प्रमाण है, बल्कि मंदिर परिसर से जुड़े लोगों की छवि के लिए भी एक सकारात्मक संदेश है।
आम जनता और तीर्थयात्रियों की प्रतिक्रिया
स्थानीय निवासियों और अयोध्या पहुँचे श्रद्धालुओं ने ध्रुवेश मिश्रा के इस कार्य की मुक्त कंठ से सराहना की है। गौरतलब है कि धार्मिक स्थलों पर ईमानदारी के ऐसे उदाहरण आम जनता में आस्था और विश्वास को मज़बूत करते हैं। यह घटना इस बात की भी याद दिलाती है कि बड़े विवादों के बीच भी व्यक्तिगत नैतिकता अपनी अलग पहचान बनाती है।