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राम मंदिर चढ़ावा गबन: अविनाश शुक्ला पहले बेचता था पानी की बोतल, फिर मिली पैसे गिनने की नौकरी

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राम मंदिर चढ़ावा गबन: अविनाश शुक्ला पहले बेचता था पानी की बोतल, फिर मिली पैसे गिनने की नौकरी

सारांश

पानी की बोतल बेचने वाला अविनाश शुक्ला राम मंदिर ट्रस्ट में पैसे गिनने तक कैसे पहुंचा — और फिर कैसे बना गबन का आरोपी। अयोध्या के इस मामले में ₹20 लाख से अधिक नकद बरामदगी और सीसीटीवी साक्ष्य ने जांच को नया मोड़ दिया है।

मुख्य बातें

पुलिस ने अविनाश शुक्ला को राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े धन के गबन के आरोप में गिरफ्तार किया।
सेवादार सुंदरलाल के अनुसार अविनाश पहले मंदिर के पास पानी की बोतल बेचता था , बाद में उसे पैसे गिनने का काम मिला।
5 जून को पुलिस ने कौशलपुरी फेज-2 स्थित योग केंद्र और संबंधित स्थानों पर छापेमारी की।
आरोपी के किराए के घर से कथित तौर पर ₹20 लाख से अधिक नकद बरामद; आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद।
योगाचार्य सीमा तिवारी ने कहा — उन्हें गबन की कोई पूर्व जानकारी नहीं थी; सीसीटीवी फुटेज जांच का अहम हिस्सा।
पुलिस वित्तीय रिकॉर्ड, नौकरी दस्तावेज और सीसीटीवी साक्ष्य की गहन जांच कर रही है।

अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा गबन मामले की जांच तेज हो गई है। पुलिस ने अविनाश शुक्ला नामक युवक को गिरफ्तार किया है, जिस पर मंदिर ट्रस्ट से जुड़े धन के दुरुपयोग और गबन के गंभीर आरोप हैं। 1 जुलाई 2026 तक मामले की जांच जारी है और पुलिस वित्तीय लेन-देन के रिकॉर्ड खंगाल रही है।

आरोपी की पृष्ठभूमि

सेवादार सुंदरलाल के अनुसार, अविनाश शुक्ला पहले मंदिर परिसर के पास पानी की बोतल बेचने की दुकान चलाता था और छोटे-मोटे काम करता था। बाद में कथित तौर पर उसे राम मंदिर ट्रस्ट में पैसे गिनने का काम मिला। यह नौकरी उसे करीब डेढ़ साल पहले मिलने की बात कही जा रही है।

अविनाश का संपर्क अयोध्या के कौशलपुरी फेज-2 स्थित एक योग केंद्र से उसके बड़े भाई अभिषेक शुक्ला के माध्यम से हुआ था। यह योग केंद्र पिछले दो दशकों से अधिक समय से संचालित है।

योग केंद्र का संबंध

योगाचार्य सीमा तिवारी ने बताया कि अभिषेक लगभग दस साल पहले आर्थिक रूप से कमजोर स्थिति में इस केंद्र से जुड़ा था। गुरुजी ने उसे शिक्षा के साथ-साथ रहने और खाने की व्यवस्था भी की। बाद में अभिषेक को प्राथमिक शिक्षक की नौकरी मिली और वह स्थिर हो गया। इसी दौरान वह अपने छोटे भाई अविनाश को भी केंद्र में ले आया।

सीमा तिवारी ने स्पष्ट किया कि उन्हें अविनाश के कथित गबन में शामिल होने की कोई पूर्व जानकारी नहीं थी। उन्हें इस पूरे मामले की जानकारी सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों से मिली।

पुलिस की छापेमारी और बरामदगी

5 जून को पुलिस ने योग केंद्र और संबंधित स्थानों पर छापेमारी की और परिसर की तलाशी ली। अविनाश शुक्ला को हिरासत में लेकर पूछताछ के लिए ले जाया गया। पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपी के किराए के घर से ₹20 लाख से अधिक नकद बरामद किए जाने की बात कही जा रही है, हालांकि इस पर आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी। परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग में 5 जून की घटना कैद हुई, जिससे स्थिति और स्पष्ट हुई।

जांच की स्थिति

पुलिस सूत्रों के अनुसार, मामले में वित्तीय लेन-देन के रिकॉर्ड, नौकरी से जुड़े दस्तावेज और सीसीटीवी फुटेज की गहन जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह मामला राम मंदिर प्रशासन और ट्रस्ट की आंतरिक निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो पहले मंदिर के बाहर पानी की बोतल बेचता था, संवेदनशील नकद-गणना कार्य कैसे सौंपा गया — इसका जवाब ट्रस्ट को देना होगा। गौरतलब है कि राम मंदिर निर्माण और प्रशासन पहले से ही सार्वजनिक जांच के दायरे में रहा है; यह मामला उस जवाबदेही की मांग को और तेज करेगा।
RashtraPress
1 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अविनाश शुक्ला को किस आरोप में गिरफ्तार किया गया है?
अविनाश शुक्ला को राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े धन के दुरुपयोग और गबन के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार उसके किराए के घर से ₹20 लाख से अधिक नकद बरामद किए जाने की बात कही जा रही है।
अविनाश शुक्ला को राम मंदिर में नौकरी कैसे मिली?
सेवादार सुंदरलाल के अनुसार, अविनाश पहले मंदिर के पास पानी की बोतल बेचता था। उसके बड़े भाई अभिषेक के माध्यम से वह अयोध्या के एक योग केंद्र से जुड़ा और करीब डेढ़ साल पहले उसे राम मंदिर ट्रस्ट में पैसे गिनने का काम मिला।
5 जून को पुलिस ने क्या कार्रवाई की?
5 जून को पुलिस ने कौशलपुरी फेज-2 स्थित योग केंद्र और संबंधित स्थानों पर छापेमारी की। अविनाश शुक्ला को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई और परिसर की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग जब्त की गई।
योग केंद्र का इस मामले से क्या संबंध है?
योगाचार्य सीमा तिवारी के अनुसार, अविनाश का बड़ा भाई अभिषेक लगभग दस साल पहले इस केंद्र से जुड़ा था। बाद में अभिषेक ने अविनाश को भी यहां बुलाया। सीमा तिवारी ने स्पष्ट किया कि उन्हें गबन की कोई पूर्व जानकारी नहीं थी।
मामले की जांच अभी किस स्तर पर है?
पुलिस सूत्रों के अनुसार जांच जारी है और वित्तीय लेन-देन के रिकॉर्ड, नौकरी से जुड़े दस्तावेज तथा सीसीटीवी फुटेज की गहन जांच की जा रही है। नकद बरामदगी पर आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद होगी।
राष्ट्र प्रेस
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