राम मंदिर चढ़ावा गबन: अविनाश शुक्ला पहले बेचता था पानी की बोतल, फिर मिली पैसे गिनने की नौकरी
सारांश
मुख्य बातें
अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा गबन मामले की जांच तेज हो गई है। पुलिस ने अविनाश शुक्ला नामक युवक को गिरफ्तार किया है, जिस पर मंदिर ट्रस्ट से जुड़े धन के दुरुपयोग और गबन के गंभीर आरोप हैं। 1 जुलाई 2026 तक मामले की जांच जारी है और पुलिस वित्तीय लेन-देन के रिकॉर्ड खंगाल रही है।
आरोपी की पृष्ठभूमि
सेवादार सुंदरलाल के अनुसार, अविनाश शुक्ला पहले मंदिर परिसर के पास पानी की बोतल बेचने की दुकान चलाता था और छोटे-मोटे काम करता था। बाद में कथित तौर पर उसे राम मंदिर ट्रस्ट में पैसे गिनने का काम मिला। यह नौकरी उसे करीब डेढ़ साल पहले मिलने की बात कही जा रही है।
अविनाश का संपर्क अयोध्या के कौशलपुरी फेज-2 स्थित एक योग केंद्र से उसके बड़े भाई अभिषेक शुक्ला के माध्यम से हुआ था। यह योग केंद्र पिछले दो दशकों से अधिक समय से संचालित है।
योग केंद्र का संबंध
योगाचार्य सीमा तिवारी ने बताया कि अभिषेक लगभग दस साल पहले आर्थिक रूप से कमजोर स्थिति में इस केंद्र से जुड़ा था। गुरुजी ने उसे शिक्षा के साथ-साथ रहने और खाने की व्यवस्था भी की। बाद में अभिषेक को प्राथमिक शिक्षक की नौकरी मिली और वह स्थिर हो गया। इसी दौरान वह अपने छोटे भाई अविनाश को भी केंद्र में ले आया।
सीमा तिवारी ने स्पष्ट किया कि उन्हें अविनाश के कथित गबन में शामिल होने की कोई पूर्व जानकारी नहीं थी। उन्हें इस पूरे मामले की जानकारी सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों से मिली।
पुलिस की छापेमारी और बरामदगी
5 जून को पुलिस ने योग केंद्र और संबंधित स्थानों पर छापेमारी की और परिसर की तलाशी ली। अविनाश शुक्ला को हिरासत में लेकर पूछताछ के लिए ले जाया गया। पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपी के किराए के घर से ₹20 लाख से अधिक नकद बरामद किए जाने की बात कही जा रही है, हालांकि इस पर आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी। परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग में 5 जून की घटना कैद हुई, जिससे स्थिति और स्पष्ट हुई।
जांच की स्थिति
पुलिस सूत्रों के अनुसार, मामले में वित्तीय लेन-देन के रिकॉर्ड, नौकरी से जुड़े दस्तावेज और सीसीटीवी फुटेज की गहन जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह मामला राम मंदिर प्रशासन और ट्रस्ट की आंतरिक निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है।