राम मंदिर चढ़ावा गबन: जमीन बेचकर ₹1 करोड़ दान देने वाले प्रतापगढ़ के सियाराम उमरवैश्य बोले — 'भगवान माफ नहीं करेंगे'
सारांश
मुख्य बातें
प्रतापगढ़ के समाजसेवी सियाराम उमरवैश्य ने 26 जून 2026 को अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गबन पर गहरा दुख जताया। उमरवैश्य वही शख्स हैं जिन्होंने अपनी जमीन बेचकर श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट को ₹1 करोड़ का दान दिया था। उन्होंने कहा कि दान की राशि का दुरुपयोग करने वालों को भगवान राम कभी माफ नहीं करेंगे।
कैसे दिया था ₹1 करोड़ का दान
75 वर्षीय सियाराम उमरवैश्य ने बताया कि जब अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का कार्य शुरू हुआ, तो उन्होंने ठान लिया कि वे भी इस पुनीत कार्य में योगदान देंगे। इसके लिए उन्होंने अपनी जमीन बेची और ₹1 करोड़ की राशि श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट को दान में दी।
उन्होंने कहा, 'मैंने सोचा था कि राम मंदिर बन रहा है, तो मुझे भी कुछ करना चाहिए। इसलिए मैंने अपनी जमीन बेची और ₹1 करोड़ दान दिया था, यह सोचकर कि इसका इस्तेमाल भगवान राम के काम में होगा। अब इस पूरे मामले को सुनकर बड़ा दुख हो रहा है।'
गबन के आरोपों पर क्या बोले उमरवैश्य
समाजसेवी उमरवैश्य ने कहा कि चढ़ावे का कथित गबन उन लोगों ने किया है जिन पर पूरे समाज का विश्वास था। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'ट्रस्ट के लोगों ने दान के पैसों को इधर-उधर करके खाने का काम किया।'
उन्होंने यह भी जोड़ा कि ऊँचे पदों पर बैठे लोगों द्वारा इस तरह का कृत्य न केवल कानूनी अपराध है, बल्कि धार्मिक दृष्टि से भी अक्षम्य है। उनके अनुसार, 'जिन्होंने भी ऐसा किया है, उन्हें सजा जरूर मिलेगी। उनका पाप एक दिन सामने आएगा।'
भगवान राम की छवि पर असर
उमरवैश्य ने इस प्रकरण का एक और पहलू उठाया — सनातन धर्म और भगवान राम की सामाजिक छवि पर पड़ने वाला असर। उन्होंने कहा, 'जो सनातन धर्म को न मानने वाले लोग हैं, आज वो कह रहे हैं कि भगवान राम भी रक्षा नहीं कर पाए। सोचिए, इससे कितना दुख होता है।'
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इसमें भगवान राम का कोई दोष नहीं है — दोष उन मनुष्यों का है जिन्होंने अपनी जिम्मेदारी से विश्वासघात किया। उनके अनुसार, 'अगर हम लोग ही बेईमान हो जाएंगे तो इसमें भगवान राम का कोई दोष नहीं है।'
आम जनता और भक्तों में आक्रोश
यह प्रकरण केवल प्रतापगढ़ तक सीमित नहीं है। पूरे देश में राम मंदिर के लाखों दानदाताओं और भक्तों में इस कथित गबन को लेकर गहरी पीड़ा और आक्रोश है। उमरवैश्य जैसे लोग, जिन्होंने अपनी जीवन-भर की कमाई और संपत्ति दान की, वे इस खबर से विशेष रूप से आहत हैं।
सियाराम उमरवैश्य ने अंत में कहा कि दोषी लोग न केवल कानून की नजर में, बल्कि समाज की नजरों में भी गिर जाएंगे। आने वाले दिनों में जाँच और कानूनी कार्रवाई के नतीजे इस मामले की दिशा तय करेंगे।