राम जन्मभूमि ₹7 करोड़ दान विवाद: SIT गठन का महंत लोकेश दास ने किया स्वागत, ओपी राजभर ने अखिलेश पर साधा निशाना
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्री राम जन्मभूमि से जुड़े ₹7 करोड़ के कथित दान गबन विवाद की जांच के लिए 3 सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। SIT में आईएएस विजय विश्वास पंत, आईपीएस किरन एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन को शामिल किया गया है। इस कदम को धार्मिक और राजनीतिक दोनों हलकों में गंभीरता से लिया जा रहा है।
महंत लोकेश दास का SIT जांच को समर्थन
ऋषिकेश के जगन्नाथ आश्रम के महंत लोकेश दास ने उत्तर प्रदेश सरकार के इस निर्णय का स्वागत किया। उन्होंने कहा, 'श्री राम जन्मभूमि मामले में ₹7 करोड़ के दान से जुड़े आरोप गंभीर हैं। हम SIT जांच का स्वागत करते हैं और कोई भी निष्कर्ष निकालने से पहले जांच के ज़रिए सच्चाई सामने आनी चाहिए।'
महंत ने यह भी कहा कि जिस तरह से यह मामला सार्वजनिक रूप से उठाया जा रहा है, वह उचित नहीं है। उनके अनुसार, विपक्ष को बिना जांच के शोर मचाने की बजाय प्रक्रिया का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने यह भी स्मरण कराया कि पूर्व में भी SIT जांच के ज़रिए सच्चाई उजागर हुई है।
ओपी राजभर ने अखिलेश यादव को घेरा
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने इस विवाद पर समाजवादी पार्टी (SP) के प्रमुख और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला। राजभर ने कहा, 'अखिलेश यादव आज तक राम मंदिर नहीं गए। 500 साल के संघर्ष के बाद भगवान राम का मंदिर बना और वे इसका विरोध कर रहे थे। जब वे अच्छे कामों का विरोध करते हैं, तो बुरे कामों के बारे में उनसे क्या उम्मीद की जाए — उनका मकसद सिर्फ विरोध करना है।'
राहुल गांधी पर भी निशाना
राजभर ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी प्रहार किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने 60 वर्षों तक देश पर शासन किया, लेकिन दलितों और वंचितों के लिए ठोस काम नहीं किया। उनके अनुसार, अब जब कांग्रेस सत्ता में नहीं है, तब दलित-न्याय की बात करना जनता को गुमराह करने का प्रयास है।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह विवाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को प्राप्त दान के कथित दुरुपयोग से जुड़ा है। आलोचकों का कहना है कि इस मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच ज़रूरी है, क्योंकि यह देश की धार्मिक आस्था से जुड़े एक अत्यंत संवेदनशील संस्थान की विश्वसनीयता का प्रश्न है। SIT के गठन के बाद अब सभी की निगाहें जांच के नतीजों पर टिकी हैं।