18 अक्टूबर 2026
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रामकृष्ण मिशन दुर्गा पूजा में कुमारी पूजा: स्वामी सर्वलोकानंद ने बताया शुभ शक्ति जागरण का संदेश

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रामकृष्ण मिशन दुर्गा पूजा में कुमारी पूजा: स्वामी सर्वलोकानंद ने बताया शुभ शक्ति जागरण का संदेश

सारांश

रामकृष्ण मिशन नई दिल्ली के सचिव स्वामी सर्वलोकानंद ने बताया कि कुमारी पूजा — जिसमें 5 से 12 वर्ष की कन्याओं में देवी का स्वरूप देखा जाता है — मिशन की दुर्गा पूजा की सबसे विशिष्ट परंपरा है। इस वर्ष सप्तमी तिथि दो दिन होने से पूजा क्रम में विशेष बदलाव आया है।

मुख्य बातें

रामकृष्ण मिशन नई दिल्ली के सचिव स्वामी सर्वलोकानंद ने 18 अक्टूबर 2026 को दुर्गा पूजा के आध्यात्मिक महत्व पर विचार साझा किए।
इस वर्ष पंचांग के अनुसार सप्तमी तिथि दो दिन पड़ने से पूजा के क्रम में विशेष बदलाव आया।
कुमारी पूजा में 5 से 12 वर्ष तक की कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप मानकर उनकी आराधना की जाती है।
स्वामी विवेकानंद ने बेलूर मठ में इस परंपरा को विशेष महत्व दिया था, जो आज भी अनवरत जारी है।
नई दिल्ली स्थित रामकृष्ण मिशन में वर्ष 2023 से दुर्गा पूजा का आयोजन हो रहा है।
स्वामी जी ने कहा कि पूजा का लक्ष्य बाहरी आडंबर नहीं, बल्कि आंतरिक साधना और शुभ शक्ति का जागरण है।

नई दिल्ली स्थित रामकृष्ण मठ एवं रामकृष्ण मिशन के सचिव स्वामी सर्वलोकानंद ने 18 अक्टूबर 2026 को दुर्गा पूजा के धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने स्पष्ट किया कि मां दुर्गा की आराधना महज एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर सुप्त शुभ शक्ति को जागृत करने का एक सशक्त माध्यम है।

इस वर्ष पंचांग के कारण पूजा क्रम में विशेष बदलाव

स्वामी सर्वलोकानंद ने बताया कि इस वर्ष पंचांग के अनुसार सप्तमी तिथि दो दिन पड़ रही है, जिससे पूजा के सामान्य क्रम में परिवर्तन आया है। सामान्यतः सप्तमी, अष्टमी और नवमी के पश्चात दशमी को मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है। तिथियों की इस विशेष व्यवस्था के कारण कुमारी पूजा का आयोजन दूसरे दिन किया जाता है।

कुमारी पूजा: रामकृष्ण मिशन की विशिष्ट परंपरा

उन्होंने बताया कि कुमारी पूजा में पाँच से बारह वर्ष तक की कन्याओं को देवी का साक्षात स्वरूप मानकर उनकी आराधना की जाती है। इस अनुष्ठान में कन्या में भगवती और मां दुर्गा के दिव्य स्वरूप का दर्शन किया जाता है। स्वामी जी ने इसे रामकृष्ण मिशन की दुर्गा पूजा की सबसे महत्वपूर्ण और विशिष्ट विशेषता बताया।

गौरतलब है कि स्वामी विवेकानंद ने बेलूर मठ में दुर्गा पूजा के दौरान कुमारी पूजा की परंपरा को विशेष महत्व दिया था, और यह परंपरा तब से अनवरत श्रद्धा के साथ निभाई जाती रही है। नई दिल्ली स्थित रामकृष्ण मिशन में वर्ष 2023 से दुर्गा पूजा का विधिवत आयोजन हो रहा है।

शास्त्रसम्मत पूजा, आडंबर से परे

स्वामी सर्वलोकानंद ने रेखांकित किया कि रामकृष्ण मिशन में दुर्गा पूजा शास्त्रों और निर्धारित विधि-विधानों के अनुसार संपन्न की जाती है। सुबह से शाम तक पूजा के विभिन्न अनुष्ठान श्रद्धा और भक्ति के साथ किए जाते हैं। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि इस पूजा में बाहरी आडंबर के स्थान पर आंतरिक साधना और भक्ति को सर्वोच्च महत्व दिया जाता है।

आध्यात्मिक चेतना और शुभ शक्ति का संदेश

स्वामी जी ने कहा कि मां दुर्गा की उपासना का मूल उद्देश्य मनुष्य के भीतर सकारात्मक ऊर्जा और शुभ शक्ति को प्रज्वलित करना है। उनके अनुसार, प्रत्येक मनुष्य में शुभ और अशुभ दोनों प्रकार की प्रवृत्तियाँ विद्यमान होती हैं — आध्यात्मिक चेतना ही वह साधन है जो अशुभ प्रवृत्तियों को क्षीण कर शुभ शक्तियों को सुदृढ़ करती है।

समाज में सद्भाव और सकारात्मकता की अपील

उन्होंने कहा कि दुर्गा पूजा हजारों वर्षों पुरानी शक्ति उपासना की गौरवशाली परंपरा है। वर्तमान समाज में नकारात्मक प्रवृत्तियों को दूर कर सकारात्मक शक्तियों को आगे लाने की विशेष आवश्यकता है। स्वामी सर्वलोकानंद ने आह्वान किया कि मां दुर्गा से यही प्रार्थना होनी चाहिए कि प्रत्येक व्यक्ति के भीतर शुभ शक्ति जागृत हो, जिससे समाज में सद्भाव, अच्छाई और सकारात्मकता का प्रसार हो सके। रामकृष्ण मिशन की यह पूजा-परंपरा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनती रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

एक सांस्कृतिक वक्तव्य है। जब समाज में महिला-सुरक्षा और सम्मान पर बहस जारी है, तब कन्या को देवी मानकर पूजने की यह परंपरा उसी समाज के सामने एक दर्पण रखती है। स्वामी सर्वलोकानंद का 'आंतरिक साधना बनाम बाहरी आडंबर' का आग्रह उन धार्मिक आयोजनों के लिए एक अप्रत्यक्ष टिप्पणी भी है जो चकाचौंध में आध्यात्मिकता खो देते हैं।
RashtraPress
18 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रामकृष्ण मिशन में कुमारी पूजा क्या है?
कुमारी पूजा में 5 से 12 वर्ष तक की कन्याओं को मां दुर्गा और भगवती का साक्षात स्वरूप मानकर उनकी विधिवत आराधना की जाती है। यह रामकृष्ण मिशन की दुर्गा पूजा की सबसे विशिष्ट और महत्वपूर्ण परंपरा है।
इस वर्ष रामकृष्ण मिशन की दुर्गा पूजा में बदलाव क्यों आया?
इस वर्ष पंचांग के अनुसार सप्तमी तिथि दो दिन पड़ रही है, जिसके कारण पूजा के सामान्य क्रम में विशेष बदलाव किया गया है। इसी कारण कुमारी पूजा का आयोजन दूसरे दिन किया जा रहा है।
कुमारी पूजा की परंपरा रामकृष्ण मिशन में कब से है?
यह परंपरा स्वामी विवेकानंद द्वारा बेलूर मठ में दुर्गा पूजा के दौरान स्थापित की गई थी और तब से अनवरत चली आ रही है। नई दिल्ली स्थित रामकृष्ण मिशन में वर्ष 2023 से दुर्गा पूजा का आयोजन हो रहा है।
स्वामी सर्वलोकानंद के अनुसार दुर्गा पूजा का आध्यात्मिक उद्देश्य क्या है?
स्वामी सर्वलोकानंद के अनुसार दुर्गा पूजा का उद्देश्य मनुष्य के भीतर सकारात्मक ऊर्जा और शुभ शक्ति को जागृत करना है। वे कहते हैं कि आध्यात्मिक चेतना ही अशुभ प्रवृत्तियों को समाप्त कर शुभ शक्तियों को सुदृढ़ करती है।
रामकृष्ण मिशन की दुर्गा पूजा अन्य आयोजनों से किस तरह भिन्न है?
स्वामी सर्वलोकानंद के अनुसार रामकृष्ण मिशन की पूजा शास्त्रों और विधि-विधानों के अनुसार संपन्न होती है, जिसमें बाहरी आडंबर के स्थान पर आंतरिक साधना और भक्ति को सर्वोच्च महत्व दिया जाता है। कुमारी पूजा इसकी सबसे अनूठी पहचान है।
राष्ट्र प्रेस
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