रांची हत्याकांड का खुलासा: कमलेश कुमार की हत्या में पति-पत्नी सहित तीन गिरफ्तार, ट्रक से दुर्घटना का रूप देने की कोशिश
सारांश
मुख्य बातें
रांची पुलिस ने 6 मई 2026 को टाटीसिल्वे थाना क्षेत्र में कमलेश कुमार नामक युवक की हत्या के मामले का खुलासा करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने हत्या के बाद शव को सड़क दुर्घटना का रूप देने की कोशिश की थी, लेकिन तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जाँच में यह सुनियोजित हत्या साबित हुई।
कौन हैं गिरफ्तार आरोपी
गिरफ्तार तीनों आरोपियों में शिवनाथ कुमार सिंह (33), उनकी पत्नी अंगिता देवी (28) और साहिल राजा (19) शामिल हैं। पुलिस जाँच में सामने आया है कि मृतक कमलेश कुमार का अंगिता देवी के साथ कथित अवैध संबंध था। इसी को लेकर शिवनाथ कुमार सिंह ने हत्या की साजिश रची और इसमें साहिल राजा ने सहयोगी की भूमिका निभाई।
हत्या और शव छुपाने की साजिश
पुलिस के मुताबिक, कमलेश कुमार की हत्या अनगड़ा थाना क्षेत्र के जानुम हाहे स्थित एक घर में की गई। हत्या के बाद शव को एक हाईवा ट्रक में लादकर टाटीसिल्वे थाना क्षेत्र के मानकीडीपा रिंग रोड के पास लाया गया। वहाँ शव को सड़क किनारे फेंककर ट्रक का अगला पहिया शव पर चढ़ा दिया गया, ताकि मामला सड़क दुर्घटना जैसा प्रतीत हो। हालाँकि, पुलिस की जाँच में यह हत्याकांड साबित हुआ।
विशेष टीम का गठन और तकनीकी जाँच
इस वारदात की जाँच के लिए रांची के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राकेश रंजन के निर्देश पर ग्रामीण पुलिस अधीक्षक गौरव गोस्वामी के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई। टीम का नेतृत्व सीनियर डीएसपी (मुख्यालय) प्रथम अमर कुमार पांडेय कर रहे थे। जाँच में टाटीसिल्वे थाना प्रभारी हंसे उरांव, नामकुम थाना प्रभारी राम नारायण समेत तकनीकी शाखा और सशस्त्र बल के जवान भी शामिल रहे।
साक्ष्य और स्वीकारोक्ति
पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों — विशेषकर मोबाइल लोकेशन — के आधार पर संदिग्धों की पहचान कर छापेमारी की। आरोपियों की निशानदेही पर घटना में इस्तेमाल एक हाईवा ट्रक, एक स्कूटी और तीन मोबाइल फोन बरामद किए गए। पूछताछ में तीनों आरोपियों ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है। टाटीसिल्वे थाना में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और आगे की जाँच जारी है।
आगे की कार्रवाई
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले में और भी तथ्य सामने आ सकते हैं क्योंकि जाँच अभी जारी है। गौरतलब है कि इस तरह के प्रकरणों में अपराध को दुर्घटना का रूप देने की कोशिश जाँच एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती होती है, लेकिन इस बार तकनीकी साक्ष्यों ने निर्णायक भूमिका निभाई। न्यायालय में आरोप-पत्र दाखिल होने के बाद तीनों आरोपियों पर कानूनी कार्रवाई और तेज होने की संभावना है।