राष्ट्रीय एकता दिवस 2026: 31 अक्टूबर को सरदार पटेल जयंती पर क्यों और कैसे मनाया जाता है यह दिन
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय एकता दिवस प्रतिवर्ष 31 अक्टूबर को भारत के पहले उप प्रधानमंत्री एवं गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर मनाया जाता है, जो देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता के प्रति नागरिकों की प्रतिबद्धता को नवीनीकृत करने का अवसर है। यह दिन उन असाधारण प्रयासों की स्मृति में समर्पित है, जिनके बल पर पटेल ने स्वतंत्रता के तत्काल बाद 560 से अधिक रियासतों को भारत संघ में समाहित किया। 2014 में पहली बार मनाए जाने के बाद से यह दिवस देशभर में एक महत्त्वपूर्ण राष्ट्रीय आयोजन बन चुका है।
राष्ट्रीय एकता दिवस की स्थापना और पृष्ठभूमि
भारत सरकार ने 2014 में पहली बार 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में घोषित किया, ताकि राष्ट्र निर्माण में सरदार पटेल के उल्लेखनीय योगदान को औपचारिक रूप से सम्मानित किया जा सके। इसके अगले वर्ष 31 अक्टूबर 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' पहल की घोषणा की, जिसका उद्देश्य देश के विभिन्न क्षेत्रों के लोगों के बीच निरंतर और सुसंगठित संपर्क, आपसी समझ तथा सांस्कृतिक जुड़ाव को बढ़ावा देना था। यह पहल आज भी सक्रिय रूप से लागू है।
मुख्य आयोजन और परंपराएँ
इस दिन देशभर में 'रन फॉर यूनिटी' (एकता दौड़) का आयोजन किया जाता है, जिसमें छात्र, सरकारी कर्मचारी, सैनिक एवं आम नागरिक बड़ी संख्या में भाग लेते हैं। सरकारी कार्यालयों, विद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में राष्ट्रीय एकता शपथ ली जाती है, जिसमें देश की एकता और सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त की जाती है।
गुजरात के एकता नगर (केवडिया) स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी — जो विश्व की सबसे ऊँची प्रतिमा है — पर प्रतिवर्ष सबसे भव्य कार्यक्रम आयोजित होता है। इस वर्ष भी 31 अक्टूबर 2026 को यहाँ भव्य समारोह का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शामिल होने की जानकारी है।
सरदार पटेल का ऐतिहासिक योगदान
1947 में भारत की स्वतंत्रता के समय भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम के तहत देशी रियासतों के शासकों को यह विकल्प दिया गया था कि वे भारत या पाकिस्तान में सम्मिलित हों अथवा स्वतंत्र रहें। उस समय 560 से अधिक रियासतें भारत के कुल क्षेत्रफल और जनसंख्या का लगभग 40 प्रतिशत थीं, जो देश की अखंडता के लिए एक गंभीर चुनौती प्रस्तुत करती थीं।
सरदार पटेल ने अपने राज्य विभाग के माध्यम से कूटनीतिक वार्ता, समझाने-बुझाने और जहाँ आवश्यक हुआ, कड़े प्रशासनिक उपायों का सहारा लिया। 15 अगस्त 1947 तक या उसके तत्काल बाद उन्होंने इन रियासतों को सफलतापूर्वक भारत संघ में एकीकृत कर लिया, जिससे आधुनिक भारत की क्षेत्रीय अखंडता सुनिश्चित हुई और संभावित विखंडन टला। इसीलिए उन्हें 'लौह पुरुष' और 'भारत के बिस्मार्क' जैसी उपाधियों से विभूषित किया जाता है।
राष्ट्रीय एकता दिवस का महत्त्व
यह दिवस केवल एक ऐतिहासिक स्मरण नहीं, बल्कि वर्तमान पीढ़ी के लिए एक प्रेरणा-स्रोत भी है। विविधताओं से भरे भारत में सांस्कृतिक, भाषाई और धार्मिक अनेकता के बावजूद एकता बनाए रखना — यही इस दिवस का केंद्रीय संदेश है। गौरतलब है कि 'विविधता में एकता' की यह अवधारणा ही भारतीय लोकतंत्र की आधारशिला मानी जाती है।
आने वाले वर्षों में यह आयोजन और व्यापक होने की संभावना है, क्योंकि 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' पहल के अंतर्गत राज्यों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों का विस्तार जारी है।