रवनीत सिंह बिट्टू का तंज: भगवंत मान ने महिला भत्ता, मेडिकल कॉलेज समेत कोई वादा नहीं किया पूरा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने 26 मई 2026 को धुरी में मीडिया से बातचीत के दौरान पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार और मुख्यमंत्री भगवंत मान पर तीखे आरोप लगाए। बिट्टू ने दावा किया कि मान सरकार अपने चुनावी वादों को पूरा करने में पूरी तरह विफल रही है और पंजाब की जनता सरकार से गहरी निराशा महसूस कर रही है।
महिला भत्ता और स्वास्थ्य सुविधाओं पर वादाखिलाफी का आरोप
बिट्टू ने कहा कि AAP ने विधानसभा चुनाव के दौरान महिलाओं को हर महीने ₹1,000 देने का वादा किया था, लेकिन यह राशि आज तक नहीं दी गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने हर जिले में मेडिकल कॉलेज खोलने और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराने की बात कही थी, परंतु जमीनी स्तर पर कोई उल्लेखनीय बदलाव नहीं आया है।
शिक्षा व्यवस्था पर ग्रामीणों की शिकायतें
बिट्टू के अनुसार, जब वे धुरी पहुँचे तो गाँव के लोगों ने रास्ते में रोककर अपनी समस्याएँ साझा कीं। ग्रामीणों ने बताया कि उनके गाँवों में पर्याप्त स्कूल शिक्षक नहीं हैं और कई स्थानों पर बच्चों के लिए कक्षाएँ तक ठीक से उपलब्ध नहीं हैं। बिट्टू ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी मुद्दों पर सरकार पूरी तरह असफल साबित हुई है।
धरने और जन असंतोष का हवाला
उन्होंने दावा किया कि कई गाँवों में लोग अपनी माँगों को लेकर धरने पर बैठे हैं, जो इस बात का संकेत है कि पंजाब सरकार जनता का विश्वास खो चुकी है। बिट्टू ने यह भी आरोप लगाया कि AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने पंजाब की शासन व्यवस्था को कमज़ोर किया है।
धुरी में BJP की बढ़ती पकड़ का दावा
गौरतलब है कि धुरी को AAP का मज़बूत गढ़ माना जाता है — भगवंत मान इसी विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने जाने के बाद मुख्यमंत्री बने थे। बिट्टू ने दावा किया कि अब इस क्षेत्र में मुख्यमंत्री की राजनीतिक पकड़ कमज़ोर पड़ती दिख रही है और स्थानीय निकाय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार मज़बूती से उभर रहे हैं।
आगे क्या
बिट्टू ने चेतावनी दी कि आने वाले चुनावों में जनता सरकार की विफलताओं का जवाब देने के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार किसी भी कीमत पर अपने उम्मीदवारों को जिताने की कोशिश कर रही है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए चिंताजनक है। पंजाब में स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजे इन दावों की असली परीक्षा होंगे।