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नीति आयोग बैठक: CM रेवंत रेड्डी की माँग — 6 महानगरों को ₹1 लाख करोड़ प्रत्येक, बने 'M-6 सिटीज टास्क फोर्स'

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नीति आयोग बैठक: CM रेवंत रेड्डी की माँग — 6 महानगरों को ₹1 लाख करोड़ प्रत्येक, बने 'M-6 सिटीज टास्क फोर्स'

सारांश

नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल बैठक में CM रेवंत रेड्डी ने देश के 6 बड़े महानगरों को ₹1 लाख करोड़ प्रत्येक देने और 'M-6 सिटीज टास्क फोर्स' बनाने की माँग रखी। हैदराबाद के लिए मेट्रो फेज-2, रीजनल रिंग रोड और IIM समेत कई बड़े प्रस्ताव भी पेश किए।

मुख्य बातें

CM रेवंत रेड्डी ने 11 जून 2026 को नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल बैठक में 6 महानगरों को ₹1 लाख करोड़ प्रत्येक देने की माँग रखी।
प्रस्तावित 'M-6 सिटीज टास्क फोर्स' में नई दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, हैदराबाद और बेंगलुरु शामिल हैं, जो मिलकर भारत के GDP का लगभग एक-चौथाई उत्पन्न करते हैं।
हैदराबाद के लिए रीजनल रिंग रोड, मेट्रो फेज-2, मूसी नदी पुनर्जीवन और 30 हज़ार एकड़ के 'नेट-जीरो भारत फ्यूचर सिटी' के लिए केंद्रीय सहयोग माँगा गया।
यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन हैदराबाद में ऑफशोर कैंपस स्थापित करने जा रही है; हार्वर्ड, MIT, ऑक्सफोर्ड जैसी संस्थाओं को लाने के प्रयास जारी हैं।
2024 के राज्य सर्वेक्षण में 3.55 करोड़ लोगों और 242 जातियों को शामिल किया गया; सरकारी शिक्षा की गुणवत्ता में गंभीर कमियाँ उजागर हुईं।
इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के तहत APMP सुविधा, OSAT क्लस्टर, माइक्रो-एलईडी फैब्रिकेशन यूनिट और IIM हैदराबाद की भी माँग की गई।

तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने 11 जून 2026 को नई दिल्ली में आयोजित नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल बैठक में केंद्र सरकार के सामने एक महत्वाकांक्षी प्रस्ताव रखा — देश के छह प्रमुख महानगरों में से प्रत्येक को ₹1 लाख करोड़ का निवेश दिया जाए और इसके क्रियान्वयन के लिए एक विशेष 'M-6 सिटीज टास्क फोर्स' का गठन किया जाए। इस प्रस्ताव में नई दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, हैदराबाद और बेंगलुरु को वैश्विक स्तर के शहरों में रूपांतरित करने की योजना शामिल है।

महानगरों को 'निवेश' की दरकार, 'खर्च' की नहीं

मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने बैठक में तर्क दिया कि ये छह महानगर भारत की अर्थव्यवस्था के असली इंजन हैं। उन्होंने कहा कि देश की लगभग 10 प्रतिशत आबादी इन शहरों में निवास करती है और ये मिलकर भारत के कुल जीडीपी का लगभग एक-चौथाई हिस्सा उत्पन्न करते हैं। इसके बावजूद, वैश्विक महानगरों की तुलना में ये शहर अभी भी पीछे हैं।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इन शहरों का विकास खर्च नहीं, बल्कि निवेश है, क्योंकि ये राजस्व, रोज़गार और वैश्विक पहचान के स्रोत हैं। उनका आग्रह था कि केंद्र सरकार एक सशक्त राष्ट्रीय टास्क फोर्स गठित करे जो इन महानगरों को विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस करने की दिशा में काम करे।

हैदराबाद के लिए विशेष माँगें

रेवंत रेड्डी ने हैदराबाद से जुड़ी कई परियोजनाओं के लिए केंद्र का सहयोग माँगा। उन्होंने रीजनल रिंग रोड को हैदराबाद के अगले विकास चरण के लिए अनिवार्य बताया, जो उद्योग, लॉजिस्टिक्स और नियोजित आवासीय विकास को गति देगा।

इसके अलावा, उन्होंने भारत फ्यूचर सिटी को आंध्र प्रदेश के मछलीपट्टनम (बंदर) डीप-वॉटर पोर्ट से जोड़ने के लिए 12-लेन एक्सप्रेसवे की माँग रखी। हैदराबाद मेट्रो रेल फेज-2 को मंजूरी, मूसी नदी पुनर्जीवन परियोजना के लिए सहायता और 30 हज़ार एकड़ में विकसित हो रहे 'नेट-जीरो ग्रीनफील्ड भारत फ्यूचर सिटी' के लिए वित्तीय सहयोग भी उनकी माँगों में शामिल रहा।

मुख्यमंत्री ने एस. जयपाल रेड्डी पलामुरु-रंगारेड्डी लिफ्ट सिंचाई परियोजना को स्वीकृति देने की भी अपील की। साथ ही, इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के तहत APMP सुविधा, OSAT क्लस्टर और माइक्रो-एलईडी फैब्रिकेशन यूनिट स्थापित करने तथा हैदराबाद में भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) खोलने का आग्रह किया।

शिक्षा और ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था पर ज़ोर

रेवंत रेड्डी ने कहा कि तेलंगाना 'विकसित भारत 2047' के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विज़न के साथ पूरी तरह जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि भविष्य की अर्थव्यवस्था ज्ञान-आधारित होगी, इसलिए विश्वस्तरीय शिक्षा, कौशल विकास और अनुसंधान संस्थानों की ज़रूरत है।

राज्य सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप हार्वर्ड, MIT, स्टैनफोर्ड, ऑक्सफोर्ड, कैम्ब्रिज और INSEAD जैसी प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को तेलंगाना लाने की दिशा में काम कर रही है। इस दिशा में पहली बड़ी सफलता मिली है — यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन हैदराबाद में अपना ऑफशोर कैंपस स्थापित करने जा रही है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि शिक्षा, पर्यावरण और रोज़गार (EEE मॉडल) पर आधारित नॉलेज क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। उनका तर्क था कि विश्वस्तरीय संस्थानों की उपस्थिति से हैदराबाद में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटरों की संख्या बढ़ेगी और बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित होगा।

सामाजिक सर्वेक्षण के निष्कर्ष और शिक्षा की गुणवत्ता

रेवंत रेड्डी ने बताया कि 2024 में राज्य सरकार ने 3.55 करोड़ लोगों और 242 जातियों को शामिल करते हुए एक व्यापक सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक, रोज़गार, राजनीतिक और जाति सर्वेक्षण कराया था। इस सर्वेक्षण से सामने आया कि मौजूदा शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता संबंधी गंभीर कमियाँ हैं और सरकारी स्कूलों पर लोगों का भरोसा घट रहा है।

उन्होंने कहा कि अब केवल शिक्षा की पहुँच बढ़ाना पर्याप्त नहीं है — गुणवत्ता और बेहतर परिणामों पर ध्यान देने का समय आ गया है। यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय स्तर पर भी सरकारी शिक्षा की गुणवत्ता एक केंद्रीय बहस का विषय बनी हुई है।

आगे की राह

नीति आयोग की इस बैठक में रखे गए प्रस्तावों पर केंद्र की प्रतिक्रिया अभी आनी बाकी है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब राज्यों ने महानगरों के लिए विशेष वित्तीय पैकेज की माँग की हो, लेकिन 'M-6 सिटीज टास्क फोर्स' का प्रस्ताव एक संरचनात्मक बदलाव की माँग है जो अब तक की चर्चाओं से अलग है। यदि केंद्र इस प्रस्ताव पर सहमति जताता है, तो यह भारत के शहरी विकास नीति में एक नई दिशा का संकेत होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिससे इसे केवल 'एक राज्य की माँग' के रूप में खारिज करना कठिन हो जाता है। लेकिन ₹6 लाख करोड़ की कुल राशि और उसके वित्तपोषण का कोई स्पष्ट खाका सामने नहीं आया है — यह प्रस्ताव की सबसे बड़ी कमज़ोरी है। गौरतलब है कि भारत में शहरी विकास की फंडिंग हमेशा केंद्र-राज्य साझेदारी की जटिलताओं में उलझती रही है, और स्मार्ट सिटीज़ मिशन जैसे पिछले प्रयोग अपेक्षित परिणाम नहीं दे सके। बिना बाध्यकारी क्रियान्वयन ढाँचे और जवाबदेही तंत्र के, यह प्रस्ताव भी एक महत्वाकांक्षी घोषणा तक सीमित रह सकता है।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

CM रेवंत रेड्डी ने नीति आयोग बैठक में क्या माँग रखी?
तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने 11 जून 2026 को नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल बैठक में देश के 6 प्रमुख महानगरों — नई दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, हैदराबाद और बेंगलुरु — को ₹1 लाख करोड़ प्रत्येक देने और एक 'M-6 सिटीज टास्क फोर्स' गठित करने की माँग रखी। उनका तर्क था कि ये शहर भारत के GDP का करीब एक-चौथाई उत्पन्न करते हैं और इनके विकास में निवेश राष्ट्रीय हित में है।
'M-6 सिटीज टास्क फोर्स' क्या है?
यह CM रेवंत रेड्डी द्वारा प्रस्तावित एक विशेष राष्ट्रीय तंत्र है जो भारत के 6 सबसे बड़े महानगरों को वैश्विक स्तर के शहरों में रूपांतरित करने के लिए ₹1 लाख करोड़ प्रत्येक का निवेश सुनिश्चित करे। यह प्रस्ताव अभी केंद्र सरकार के विचाराधीन है और इस पर कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है।
हैदराबाद के लिए रेवंत रेड्डी ने कौन-सी परियोजनाएँ माँगी हैं?
मुख्यमंत्री ने हैदराबाद के लिए रीजनल रिंग रोड, मेट्रो रेल फेज-2, मूसी नदी पुनर्जीवन परियोजना, 30 हज़ार एकड़ के नेट-जीरो 'भारत फ्यूचर सिटी', IIM हैदराबाद, इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के तहत APMP और OSAT क्लस्टर, तथा मछलीपट्टनम पोर्ट से जोड़ने के लिए 12-लेन एक्सप्रेसवे की माँग रखी।
तेलंगाना में शिक्षा को लेकर सर्वेक्षण में क्या सामने आया?
2024 में राज्य सरकार ने 3.55 करोड़ लोगों और 242 जातियों को शामिल करते हुए व्यापक सर्वेक्षण कराया, जिसमें सरकारी शिक्षा की गुणवत्ता में गंभीर कमियाँ और सरकारी स्कूलों पर घटता जन-विश्वास सामने आया। इसी के आधार पर CM ने केवल पहुँच नहीं, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर ज़ोर दिया।
तेलंगाना में कौन-से अंतरराष्ट्रीय शिक्षण संस्थान आने वाले हैं?
यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन हैदराबाद में अपना ऑफशोर कैंपस स्थापित करने जा रही है, जो इस दिशा में पहली बड़ी सफलता है। इसके अलावा, राज्य सरकार हार्वर्ड, MIT, स्टैनफोर्ड, ऑक्सफोर्ड, कैम्ब्रिज और INSEAD जैसी संस्थाओं को तेलंगाना लाने के प्रयास कर रही है।
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